शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

Satire : ठंड क्यों हो रही है कांग्रेस?



ठंड अब तक उस तरह से नहीं गिरी है, जैसी गिरनी चाहिए। तो क्या ठंड कांग्रेस हो रही है? आखिर दोनों की तुलना क्यों हो रही है? और इसमें भाजपा का क्या रोल है? देखिए यह व्यंग्य वीडियो News-Pachchi में.. 


यह वीडियो भी देखिए... पप्पू, मोटा भाई, बाबाजी और सरकार… कैसे सबकी उड़ी धज्जियां



Satire : पप्पू, मोटा भाई, बाबाजी और सरकार… कैसे सबकी उड़ी धज्जियां



इस वीडियो में बात-बात में राहुल गांधी, अमित शाह, बाबा रामदेव, सरकार की धज्जियां उड़ाई गई है। कुल मिलाकर आज की राजनीतिक व्यवस्था पर व्यंग्य है यह वीडियो…

In this video, we did satire on Rahul Gandhi, Amit Shah, Baba Ramdev and the government. Overall, this video is a satire on today’s political system …

यह वीडियो भी देखिए... ठंड क्यों हो रही है कांग्रेस?


सोमवार, 21 दिसंबर 2020

Satire 1 Minute Video : सर्दी के मौसम में देश के काम आएंगे ये बड़े-बड़े नेता...जानिए कैसे?




By A. Jayjeet

पुणे। देश में शीतलहर के बढ़ते प्रकाेप का सामना करने के लिए मौसम विभाग ने प्रभावित इलाकों में ओवेसी और गिरिराज सिंह की CDs बंटवाने का फैसला किया है।

मौसम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया- “ये दोनों जहां भी मुंह फाड़ते हैं, उस पूरे क्षेत्र में माहौल गर्म हो जाता है। इसी के मद्देनजर हमने इनकी CDs खरीदने का फैसला किया है। हम इन CDs को शीतलहर से प्रभावित इलाकों में घर-घर बंटवा देंगे। हमारे आकलन के अनुसार ये CDs भी वही काम करेंगी, जो एक हीटर करता है।”

उन्होंने बताया कि जहां ठंड से ज्यादा ही नुकसान होने की खबर मिलेगी, वहां हम इनके वीडियो भाषण दिखाएंगे। इसके लिए विभाग ने थोक में DVDs भी खरीदने के आदेश दे दिए हैं।

ओवेसी और गिरिराज सिंह ने स्वागत किया :

मौसम विभाग की इस अनूठी पहल का ओवेसी और गिरिराज सिंह ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इस सामाजिक-राष्ट्रीय कार्य में योगदान देकर वे गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इन दोनों ने मौसम विभाग से यह भी कहा है कि अगर ज्यादा ही गर्मी की आवश्यकता हो तो वे राष्ट्रहित में प्रत्यक्ष भाषण देने के लिए भी हरदम तैयार रहेंगे।

गर्मी से बचाव के लिए मनमोहन सिंह के पोस्टर छपवाए जाएंगे :

इस बीच, मौसम विभाग ने अगले साल भारी गर्मी की आशंका को देखते हुए इससे निपटने की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है। इसके तहत मनमोहन सिंह के लाखों पोस्टर छपवाए जा रहे हैं। गर्मी के दिनों में लू-लपट वाले इलाकों में ये पोस्टर चिपकवाकर थोड़ी ठंडक पहुंचाई जाएगी।

विभाग के एक अधिकारी के अनुसार पहले मनमोहन सिंहजी के बयानों की भी CDs खरीदने का विचार था, लेकिन इस आधार पर इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया कि जब कुछ सुनाई ही नहीं देगा तो फिर सीडीज पर धनराशि बर्बाद करने का कोई मतलब नहीं है।

संबंधित वीडियो देखने के लिए क्लिक करें यहां

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ राजनीतिक कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं। )






सोमवार, 7 दिसंबर 2020

Exclusive : कोरोना की जिंदगी में भी शुरू हुआ स्यापा!


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By Jayjeet

कोरोना ने हम सब लोगों की जिंदगी में तूफान मचा रखा है, लेकिन देवउठनी एकादशी के बाद से अब यह तूफान कोरोना (corona) की जिंदगी में उठ रहा है। वजह - उसने कोरोनी से शादी जो कर ली। कोरोना की जिंदगी में क्या स्यापा चल रहा है, आइए सुनते हैं कोरोना और उसकी धर्मपत्नी यानी कोरोनी की यह बातचीत। बहुत ही गोपनीय ढंग से रिकॉर्ड की गई इस बातचीत की एक्सक्लूसिव सीडी केवल हमारे पास ही है :

कोरोना : हे कोरोनी, तुमने ये इतना बड़ा-सा घुंघट क्यों डाल रखा है?

कोरोनी : आपसे हमें संक्रमण ना हो जाए, इसी खातिर...

कोरोना : अरे, जबसे तुमसे शादी हुई है, तबसे हममें संक्रमित करने की ना तो इतनी ताकत बची, ना इतना समय..

कोरोनी : तो इसमें हमें काहे दोष देते हों? हमने ऐसा क्या किया?

कोरोना : क्या किया? सुबह से ही बिस्तर पर बैठे-बेठे ऑर्डर देने लगती हो, चाय बनी क्या? नाश्ता बना क्या? चाय-नाश्ता बनाकर फारिग होता ही हूं कि आलू-प्याज की रट लगा देती हो। बस, थैला उठाए आलू-प्याज और सब्जी लेने निकल जाता हूं। लोगों को संक्रमित क्या खाक करुं?

कोरोनी : देखिए जी, अब ये तो ज्यादा हो रही है... अरे और दूसरे हस्बैंड लोग भी तो हैं। वे अपने पड़ोस में शर्माजी को ही देखो..

कोरोना : शर्माजी, कौन शर्माजी?

कोरोनी : वही शर्माजी, जिनको तुमने हमारी इन्गेजमेंट के दिन ही संक्रमित किया था, भूल गए क्या? देखो उनको भी तो, कैसे बीवी के इशारों पर नाचते हैं, पर बॉस की भी पूरी हाजिरी लगाते हैं। ऐसे एक नहीं, कई लोग हैं जो बीवी और बॉस दोनों की चाकरी पूरे तन-मन से करते हैं और मुंह से उफ्फ तक नहीं निकलाते। और एक तुम हो कि बीवी जरा-से काम क्या बताती, उसी में चाइना वाली नानी याद आने लगती है.... काम धाम कुछ नहीं, शो-बाजी तो पूछो मत...

कोरोना (गुस्से में) : क्या काम-धाम ना करता हूं, बताओ‌ तो जरा? सुबह उठकर चाय-नाश्ता तैयार मैं करता हूं, सब्जी-वब्जी मैं लाता हूं। दोनों टाइम के बर्तन मैं साफ करता हूं। तंग आ गया मैं तो ... घर-गृहस्थी के चक्कर में अपना असली काम ही भूल गया... देखो, कैसे लोग बिंदास बगैर मास्क लगाए घूम रहे हैं, जैसे मुझे चिढ़ा रहे हों कि आ कोरोना आ... पर अब ताकत ही ना बची ...

कोरोनी (मामले को शांत करते हुए) : अरे जानू, तुम तो नाराज हो गए। अच्छा, चलो आज डिनर में खिचड़ी मैं बना दूंगी। .... और सुनो जी, गांधी हॉल में साड़ी की सेल शुरू हुई है। उसमें हजार-हजार की साड़ी पांच-पांच सौ में मिल रही है। चलो ना वहां, तुम्हारा भी मूड फ्रेश हो जाएगा...

कोरोना (सीने में हाथ रखते हुए) : हे भगवान, क्यों सेल का नाम लेकर मेरा बीपी बढ़ा रही हो? उधर, वैक्सीन अलग आ रही है। मेरे लिए तो जिंदगी में टेंशन ही टेंशन है...

कोरोनी : हाय दैया, ये वैक्सीन कौन हैं? हमारी सौत है क्या?

कोराना : अरे, हम थोड़ी ला रहे हैं। सरकार ला रही हैं। हमें नाकारा बनाने के लिए...और ये कोई सौत-वौत नहीं है, ये तो...

कोरोनी (बीच में ही बात काटते हुए) : हम सरकार से कह देंगे कि कोनो वैक्सीन-फैक्सीन को लाने की जरूरत नहीं है। हम कम है क्या? .. अब टेंशन छोड़ो और तैयार हो जाओ, नहीं तो वो सेल में अच्छी-अच्छी साड़ियां खतम हो जाएगी...

और कोरोना 'जी जी' करते हुआ तैयार हुआ और कंधे झुकाए निकल पड़ा बाइक स्टार्ट करने ...

सोमवार, 30 नवंबर 2020

Hindi Satire : नए साल में एक माह का समय बाकी, जानिए लोग क्यों खा रहे हैं बादाम?

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मेरा रिजाेल्यूशन : अगले साल से मैं रोज बादाम खाऊंगा,
ताकि अपना रिजाेल्यूशन याद रहे।

Humour Desk, दिल्ली/भोपाल। अब जबकि नए साल को आने में एक माह से भी कम का वक्त बचा है, लोगों ने पिछली बार लिए अपने-अपने रिजोल्यूशन्स की तलाश तेज कर दी है। कई लोग तो रोज मुट्‌ठी भर-भरके बादाम खा रहे हैं ताकि उन्हें यह याद आ सके कि साल 2020 की शुरुआत में उन्होंने क्या रिजोल्यूशन लिया था।

इस संबंध में हमारी टीम ने कुछ लागों से बात की। भोपाल के युवक राजेश सा रा रा रा ने इस बारे में पूछने पर बताया, “सर, था तो बहुत अच्छा, एकदम यूनिक-सा, पर अभी याद नहीं आ रहा। लेकिन इस बार मैं अपने फोन में सेव कर लूंगा ताकि अगले साल कोई पूछे तो बता तो सकूं।”

इसी तरह एक कॉलेज कन्या ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “मैंने वजन कम करने का रिजोल्यूशन लिया था। पर एक्चुअली हुआ क्या कि फ्रेंड लोग कहने लगे कि इत्ता अच्छा रिजोल्यूशन लिया है तो एक पार्टी तो बनती है। ऑब्वयसली, पार्टी तो बनती थी। तो फिर मैंने दो दिन बाद उसे OLX पर बेच दिया। जो पैसे मिले, उससे ही शानदार पिज्जा पार्टी थ्रो कर दी।’ फिर आनन-फानन में समोसा मुंह में भरते हुए उसने कहा, “इस बार मैं कुछ ऐसा डिफरंट टाइप का रिजोल्यूशन लूंगी कि लोग देखते रह जाएंगे, देखना, रियली!”

क्यों भूल जाते हैं रिजोल्यूशन?

इस बारे में साइकोलॉजिस्ट डॉ. सुरेश शर्मा का कहना है कि नए साल पर 99 फीसदी लोग रिजोल्यूशन लेते ही लेते हैं। इसमें कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं करते। हां, लेकिन इनमें से केवल एक फीसदी ही लोग ऐसे होते हैं जो ईमानदारी के साथ कन्फेस करते हैं कि वे इस साल भी अपना रिजोल्यूशन पूरा नहीं कर पाए। ऐसे लोग फिर उसे अगले साल के लिए कैरी फारवर्ड कर देते हैं। बाकी के बचे 99 फीसदी को तो याद ही नहीं रहता कि उन्होंने रिजोल्यूशन क्या लिया था।

इसलिए डॉ. सुरेश ने लोगों को सलाह दी कि रिजोल्यूशन लेना ही काफी नहीं है। उसे डायरी में लिखकर रखना ज्यादा जरूरी है, ताकि हमें 364 दिन बाद फिर नए रिजोल्यूशन को ढूंढने की मगजमारी नहीं करनी पड़े। उन्होंने कहा, “मैं ऐसा ही करता हूं। अभी डायरी देखकर बता सकता हूं कि मैंने इस साल क्या रिजोल्यूशन लिया था।’

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)

Hindi Satire : 500 रन नहीं बनने पर ICC ने जताई चिंता, गेंदबाजों की चालाकी खत्म करने मशीनों से होंगी बॉलिंग

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By Jayjeet

Humour Desk. मेलबर्न। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने अब तक किसी भी ODI की एक पारी में 500 रन नहीं बनने पर चिंता जताई है। इसने गेंदबाजों की चालाकी और धूर्तता को खत्म करने के लिए अब मशीनों से बॉलिंग करवाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय रविवार को सिडनी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों के शर्मनाक प्रदर्शन की वजह से लिया गया है। इस मैच में दोनों टीमों के बल्लेबाज मिलकर 100 ओवर में महज 727 रन ही बना पाए।

ICC के एक सूत्र ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, “इतने सारे नियमों में बदलाव करने और सपाट पिचें बनाने के बावजूद टीमें एक पारी में 500 रन भी नहीं बना पा रहीं। यहां तक कि सिडनी की सपाट पिचों पर भी बल्लेबाज फेल हो रहे हैं। यह बेहद अफसोसजनक हैं और बल्लेबाजों के निकम्मेपन को दर्शाता है।”

ICC के इस सूत्र ने कहा, “क्रिकेट में रोमांच बना रहे, इसके लिए गेंदबाजों की धूर्तता और चालाकी को खत्म करने का वक्त आ गया है। अब भी देखा गया है कि कई बार कोई-कोई गेंदबाज नैतिकता को ताक पर रखकर ऐसी बॉल फेंक देता है कि बेचारा बल्लेबाज मात खा जाता है। इस विसंगति को दूर करने के लिए अब हम तकनीक का सहारा लेने जा रहे हैं। इसके लिए अब आगे से हर वन डे मैच में गेंदबाजी केवल बॉलिंग मशीनों से होंगी। मशीनों में ऐसी सेटिंग की जाएगी कि न तो बॉल स्विंग हो और न ही स्पिन। सीधी-सपाट बॉल आएगी तो बल्लेबाजों को खेलने में आसानी होगी।”

यह पूछे जाने पर कि ऐसा करना क्या गेंदबाजों के साथ अन्याय नहीं होगा? उन्होंने प्रश्नकर्ता की नादानी पर हंसते हुए कहा, “जब किसी भी टीम में गेंदबाज ही नहीं होंगे ताे उनके साथ अन्याय कहां से होगा!”

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है।)

रविवार, 29 नवंबर 2020

Humour & Satire : वैक्सीन से नहीं, किसी और चीज से होगा कोरोना का इलाज !


 

Humour Desk. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना की वैक्सीन के विकास की जानकारी हासिल करने के मकसद से तीन लैब्स का दौरा किया, लेकिन वहां वे यह जानकर दंग रह गए कि वैक्सीन तो नहीं बन रही, बल्कि बगैर वैक्सीन के ही कोरोना को ठिकाने लगाने की तैयारी की जा रही है...कैसे, जानने के लिए देखें यह फनी वीडियो। 

(Disclaimer : This video is work of fiction and fun. Viewers are advised not to confuse about the content in the video as being true.)



बुधवार, 25 नवंबर 2020

Satire & Humour : कोरोना को नाकारा करने की प्लानिंग, लैब में तैयार हो रही है सुशील-सुंदर कोरोनी

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By Jayjeet

Humour Desk . नई दिल्ली/पुणे। देवउठनी एकादशी का इंतजार खत्म होने के साथ ही कोरोना की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है। किसी शुभ मुहूर्त में कोराना को 'नाकारा' करने की प्लानिंग की जा रही है। इसके लिए निपुण, सुंदर व सुशील कोरोनी के विकास का काम लैब में जारी है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय में पदस्थ एक सूत्र ने बताया कि पिछले कई दिनों से हमें वैक्सीन से भी ज्यादा देवउठनी एकादशी का इंतजार था। उन्होंने यह खुलासा भी किया कि किसी भी लैब में कोई वैक्सीन वगैरह नहीं बन रही है। ये केवल कोरोना को भरमाने के लिए अफवाह भर हैं। बल्कि हर लैब अपने-अपने स्तर पर सुंदर व सुशील कोरोनी का विकास कर रही है। इसमें सबसे आगे भारत का सीरम इंस्टीट्यूम ऑफ इंडिया है।

तीसरे चरण की टेस्टिंग जारी : 

सीरम इंस्टीट्यूम ऑफ इंडिया के CEO अदार जूनावाला ने बताया कि उनके यहां जिस कोरोनी का विकास किया जा रहा है, उसके तीसरे चरण में रसोईघर की टेस्टिंग चल रही है। इस चरण में इस बात का परीक्षण किया जा रहा है कि कोरोनी कितनी खूबी से अपने होने वाले पति से बर्तन मंजवाने से लेकर सुबह की चाय-नाश्ता वगैरह तैयार करवा सकती है। अब तक के नतीजे उत्साहवर्धक रहे हैं। इससे पूर्व पहले चरण में कोरोनी का इस बात के लिए टेस्ट किया गया था कि वह कोरोना से फोन पर मिमियाने वाली आवाज में जी-जी निकलवा पाती है या नहीं। दूसरे चरण में इस बात की टेस्टिंग की गई थी कि साड़ी वगैरह की सेल की खबर से वह कोरोना का बीपी कितना बढ़ा पाती है। दोनों चरण में सफलता मिलने के बाद तीसरे चरण की टेस्टिंग जारी है। शुभ मुहूर्त खत्म होने से पहले ही हम भारतीय परिवेश के अनुकूल सुंदर व सुशील कोरोनी भारत सरकार को सौंप देंगे। उम्मीद है कि कोरोना की शादी के बाद उसकी बची-खुची ताकत भी खत्म हो जाएगी। इस तरह corona पूरी तरह से नाकारा हो जाएगा।

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रविवार, 22 नवंबर 2020

Satire : गायों के हित में मप्र की गो-कैबिनेट का बड़ा फैसला, पॉलिथीन पर से बैन हटेगा

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मजा आ गया! पॉलिथीन पर से बैन हटने के बाद...!

Humour Desk, भोपाल। मप्र में पॉलिथीन बैन होने के बाद गायों को हो रहीं दिक्कतों को देखते हुए राज्य सरकार ने गाय-हित में इसके उपयोग में छूट दे दी है। यह फैसला यहां रविवार को मप्र सरकार की पहली गो-कैबिनेट में लिया गया। गो कैबिनेट में इस बात पर चिंता जताई गई कि अगर पॉलिथीन पूरी तरह बैन हो गई तो गायें खाएंगी क्या? उन्हें भूखों मरने से बचाने के लिए यह संशोधन किया गया है।

मप्र की गोभक्त सरकार ने 24 मई 2017 को पॉलिथीन पर बैन (Polythene ban) लगाने के संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। सरकार ने इसके लिए पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ गायों को बचाने की दलील दी थी। नोटिफिकेशन जारी होते ही लोगों ने इसका मतलब यह निकाल लिया कि अब प्रदेश में न तो पॉलिथीन बनेगी और न ही बिकेगी। कई भोले दुकानदारों ने दुकानों पर नोटिस भी चिपका दिए थे कि – “सरकार ने पॉलिथीन पर बैन लगा दिया है। कृपया मांगकर शर्मिंदा न करें।” आम लोगों ने पतले कपड़े की बनी पॉलिथीन के लिए सहर्ष तीन से लेकर पांच रुपए तक खर्च करने भी शुरू कर दिए। कई लोग घर से ही थैले लेकर जाने लगे।

फिर मरने लगी गायें…

मप्र सरकार का यह फैसला भी नोटबंदी की तरह उलटा साबित हो गया। राज्य सरकार को मिली एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार पॉलिथीन बैन होते ही सड़कों पर से ये गायब होने लगी। चूंकि मप्र की सड़कों पर विचरने वाली गायें सालों से पॉलिथीन खाकर ही अपना पेट भर रही थीं। ऐसे में पॉलिथीन की आदी ये गायें भूखी मरने लगी। कई सड़कों पर गायों के मरने की खबरें भी आईं। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए गो कैबिनेट की पहली ही बैठक में सरकार ने पॉलिथीन बैन पर आंशिक छूट दे दी।

कौन कर सकेगा यूज, कौन नहीं?

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पॉलिथीन पर बैन से छूट किसे दी जाएगी, लेकिन गोधन सेवा से जुड़े वरिष्ठ अफसरों के अनुसार गायों के हित में कोई भी हिंदू नागरिक पॉलिथीन में सामान लाकर उसे कहीं भी फेंक सकेगा। मुस्लिम और ऐसे ही उन समाजों के लिए यह प्रतिबंध जारी रहेगा जो गोधन को मां नहीं मानते हैं।

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं। )

शनिवार, 21 नवंबर 2020

Satire : बीवियों ने NGT से कहा, फटकार लगाना बंद करें, पहले हमसे ट्रेनिंग तो ले लीजिए…

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(Disclaimer : इस खबर का मकसद केवल हल्का-फुल्का मजाक करना है, किसी जज या किसी बीवी पर कटाक्ष करना नहीं …)

Humour Desk, नई दिल्ली। पराली जलाने पर उप्र सरकार और अब खुले में कचरा जलाने पर दिल्ली सरकार व आरओ वॉटर सिस्टम पर पर्यावरण मंत्रालय को NGT यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ताजा फटकारों से बीवियों का धैर्य चूक गया है। उन्होंने कहा है कि बात-बेबात में NGT को सरकारों को फटकार लगाना बंद कर देना चाहिए। यह केवल बीवियों का अधिकार है। बात-बात में ऐसी फटकार लगाने का कोई मतलब भी नहीं है जिसे कोई सुनता तक नहीं। इससे तो फटकार की तौहीन ही हो रही है।

अखिल भारतीय बीवी कमेटी की प्रवक्ता श्रीमती अलंकार मुंहपेमारेगी ने यहां गुरुवार सुबह एक प्रेस कांफ्रेंस में नाराजगी जताते हुए कहा, “NGT के जज तो सरकारों को आए दिन ऐसे फटकारते हैं जैसे वे उनके निजी पति हो। पूरी दुनियाभर में फटकारने का अधिकार केवल और केवल बीवियों को है, चाहे वह आम आदमी हो या अमेरिका का राष्ट्रपति ही क्यों न हो। यह बातें जजेस को न पता हो, आश्चर्य है, जबकि उनमें से कई जज स्वयं पति भी हैं।”

फटकार लगानी ही हो तो हमसे सीखें …

यह पूछे जाने पर कि अगर उनकी धमकी के बावजूद NGT के जज (और अन्य अदालतों के भी जज) फटकार लगाने पर अड़े रहते हैं तो वे क्या करेंगी? इस पर श्रीमती मुंहपेमारेगी ने अपने स्वर को नीचे करते हुए कहा, तब हम रोंकेंगी नहीं। हम जजों की अवमानना करना नहीं चाहतीं। लेकिन हमारा उनसे यही विनम्र आग्रह रहेगा कि अगर फटकार लगानी ही है तो जरा तमीज से लगाएं। अगर फटकार लगाए और कोई सुने भी नहीं, तो इससे तो फटकार का ही अपमान होगा। अगर नहीं आता तो हमसे ट्रेनिंग ले लें। ट्रेनिंग के बाद मजाल है कि कोई सरकार उनको सुनने से मना कर दें। एक ही फटकार में सरकारें उल्टे पैर आएंगी और मिमियाते हुए कहेंगी – जी जी, सॉरी, सॉरी, मैं कर रहा हूं ना…।

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शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

Satire & Humour : साइबेरियाई पक्षियों ने केजरीवाल को लिखी चिट्ठी, जानिए क्यों?

 

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By Jayjeet

Humour Desk. नई दिल्ली। ठंड के मौसम में रूस और कजाकिस्तान के इलाकों से भारत आने वाले साइबेरियाई पक्षियों ने अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर मफलर को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है। पिछले साल केजरीवाल ने अपना लोकप्रिय मफलर नहीं पहना था। इस वजह से पक्षी सर्दी को लेकर लंबे समय तक कंफ्यूज होते रहे और आधी ठंड निकल गई थी।

साइबेरियाई पक्षियों के आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा मुख्यमंत्री सचिवालय को लिखे पत्र की प्रति humourworld के भी हाथ लगी है। इस पत्र में लिखा गया है : “माननीय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी, हमारे साथी रूस और कजाकिस्तान से भारत देश की सीमा पर पहुंच गए हैं। वे भारत में ठंड की दस्तक का इंतजार कर रहे हैं। दो साल पहले तक आपका मफलर ही हमारे लिए संकेत होता था कि इंडिया में ठंड शुरू हो गई है। लेकिन पिछले साल आप कतिपय कारणों से मफलर नहीं पहन पाए। इस वजह से हमारी साथियों को ठंड का संकेत मिलने में काफी विलंब हो गया था जिससे वे कंफ्यूजिया गए थे और हमारा पूरा सिस्टम बिगड़ गया था।”

पत्र में आगे लिखा गया – मफलर पहनना या न पहचाना आपका लोकतांत्रिक अधिकार है। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे। लेकिन समय से पूर्व ही हमें यह बताना भी आपका दायित्व है कि आप मफलर पहनेंगे या नहीं, ताकि हम ठंड के संकेतों के लिए आपके मफलर पर डिपेंड नहीं रहे और कुछ अन्य तरीकों को एक्सप्लोर कर सके।’

इस बारे में विस्तार से जानकारी के लिए humourworld ने प्रवक्ता से फोन पर बातचीत की। प्रवक्ता ने हमें बताया कि वे रूस और कजाकिस्तान से ईरान और अफगानिस्तान को पार कर गए हैं। इस समय पाकिस्तान की स्वात घाटी के पास आराम फरमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार की तरह इस साल भी उनका टाइम खोटी न हो, इससे बचने के लिए उन्होंने समय रहते ही केजरीवालजी को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह कर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दो-चार दिन में उन्हें स्थिति क्लियर कर दी जाएगी।

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मंगलवार, 10 नवंबर 2020

Satire : कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से की ‘कांग्रेस आरक्षित सीटों’ की मांग

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निवार्चन आयोग के दफ्तर जाते राहुल गांधी।
By Jayjeet

नई दिल्ली। कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनावों में हुई हार से बड़ा सबक लेते हुए आने वाले तमाम चुनावों में अपने लिए सीटें आरक्षित करने की मांग की है। इस संबंध में मंगलवार रात को ही पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलकर अपना मांग-पत्र सौंपा।

बिहार विधानसभा चुनावों में बमुश्किल डेढ़ दर्जन सीटें जीतने के बाद यहां मंगलवार की रात को कांग्रेस कोर कमेटी की एक आपातकालीन बैठक हुई। बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं का मानना था कि अगर लोकसभा चुनाव सहित सभी राज्यों की विधानसभा सीटों के लिए कांग्रेस पार्टी के लिए कुछ सीटें आरक्षित कर दी जाएं तो इससे भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक विरासत को बचाना संभव हो सकेगा। अगर निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस की यह मांग मान ली तो जिस तरह एससी/एसटी सीटों पर केवल इन्हीं वर्गों के लोग चुनाव लड़ सकते हैं, उसी तरह कांग्रेस आरक्षित सीटों पर भी कांग्रेसियों को ही चुनाव लड़ने की अनुमति होगी।

पार्टी को उम्मीद है कि अगले साल बंगाल विधानसभा चुनावों से यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। सूत्र ने बताया कि अगर निर्वाचन आयोग इस संबंध में कोई फैसला नहीं लेता है तो कांग्रेस व्यापक जनांदोलन छेड़ देगी। 

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बुधवार, 4 नवंबर 2020

गब्बर का करवा चौथ!!!

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अगर शोले में गब्बर सिंह शादीशुदा होता तो?

होली कब है, कब है होली? का डायलॉग कुछ यूं होता...

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करवा चौथ कब है, कब है करवा चौथ....?

और पीछे से सुनाई देता ....
आवाज नीचे... दो-चार डाके मारके कोई तीर नहीं मार लिया...
और हां, मेरे लिए नेकलेस लूट के लाए ...?

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मंगलवार, 3 नवंबर 2020

अंतिम उपाय के तौर पर सरकार ने चला ‘प्याज के आधार’ पर आरक्षण का दांव

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नई दिल्ली। प्याज के लगातार बढ़ते दामों को रोकने के लिए सरकार ने अंतत: अंतिम उपाय के तौर पर ‘प्याज के आधार पर आरक्षण’ का दांव चल दिया है। उसने घोषणा की है कि प्याज न खाने वाले देश के तमाम वर्गों को नौकरियों में आरक्षण मुहैया करवाया जाएगा। इस घोषणा के बाद प्याज के दामों में गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में सोमवार की रात को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में यह योजना बनाई गई। इसमें तय किया गया कि जो भी परिवार यह हलफनामा देगा कि वह भविष्य में न तो अपने घर में प्याज खाएगा और न ही ढाबे या होटल में प्याज मांगकर ढाबे/होटल वालों को शर्मिंदा करेगा, वह ‘प्याज आधार’पर आरक्षण का पात्र समझा जाएगा। इस प्रावधान को लागू करने के लिए सरकार कल ही अध्यादेश ला सकती है।

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। )


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सोमवार, 14 सितंबर 2020

#Hindi_Diwas : कमजोर हिंदी दिलवाले इसे ना पढ़ें, सुसाइड जैसी फीलिंग आ सकती है…!!


By Jayjeet


हिंदी सटायर डेस्क।
आज हिंदी दिवस है। आइए आज केंद्र सरकार के कुछ विभागों की वेबसाइट पर लिखी हिंदी को पढ़ने की कोशिश करते हैं। यकीन मानिए, आप वैसे ही बाल नोंचने की कोशिश करेंगे, जैसा कि चित्र में बताया गया है। कृपया कमजोर हिंदी दिल वाले न पढ़ें।

(मंत्रालयों/विभागों की साइट्स से हमने हूबहू कॉपी उठाई है।ये केवल कुछ उदाहरण हैं। अधिक के लिए खुद ट्राय कीजिए…)

सबसे पहले देश के शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से…(क्योंकि यहीं से हमें ज्ञान मिलता है)

मौजूदा क्षमताओं के आधार पर तथा बात को मान्यकता प्रदान करते हुए कि स्वंतंत्रता प्राप्ति के बाद शिक्षा संस्थापओं के वृहत नेटवर्क ने राष्ट्रे निर्माण में अत्यकधिक योगदान दिया है; राष्ट्रक उच्च्तर शिक्षा में उत्कृशष्टंता केन्द्रों के विस्ता्र एवं स्थामपना का दूसरा चरण प्रारंभ करने जा रहा है। यह अभिकल्प्ना की गई है कि इस वर्णक्रम के दोनों सिरों नामत: प्रारंभिक शिक्षा एवं उच्च‍तर/तकनीकी शिक्षा के सुदृढ़ीकरण से शिक्षा में विस्ता र, समावेशन एवं उत्कृरष्टसता के लक्ष्यों् को प्राप्तव किया जा सकता है।

(अरे बाप रे… बोल्ड करते-करते थक गए। बोल्ड ही समझ में आया, बाकी तो पल्ले ही नहीं पड़ा। )

पासपोर्ट कार्यालय की वेबसाइट से … :

ऑनलाइन नियुक्ति प्रणाली पीएसके या पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) में भीड़ से बचने और आवेदकों के लिए इंतज़ार न करना सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है। नियुक्ति एक पीएसके या पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) की हैंडलिंग क्षमता के अनुसार आवंटित कर रहे हैं और एक इलेक्ट्रॉनिक कतार प्रबंधन प्रणाली पर आधारित हैं। पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में ऑनलाइन पंजीकरण भरने और ऑनलाइन आवेदन पत्र (वैकल्पिक रूप से, ई फार्म डाउनलोड भरने और ऑनलाइन पोर्टल पर ही अपलोड) प्रस्तुत करने, एक मुलाकात समयबद्धन और अंत में, पीएसके या पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) जाने के लिए ये सभी कदम शामिल हैं|

अधिक जानकारी के लिए ऑनलाइन पोर्टल के मुख पृष्ठ पर ‘त्वरित गाइड’ के तहत ‘मुलाकात के लिए नयी प्रक्रिया’ लिंक पर क्लिक करके अनुभाग को देखें।

(जिस इंग्लिश सेक्शन से अनुवाद किया गया है, हमने उसका अनुवाद गूगल ट्रांसलेट पर डालकर देखा तो इससे कुछ बेहतर सामने आया। तो इसके लिए गूगल ट्रांसलेटर को भी दोष नहीं दिया जा सकता। )

दूरसंचार विभाग की वेबसाइट से…

हम विश्व स्तर की दूरसंचार बुनियादी ढांचे और जुड़े नेशन “कभी भी, कहीं भी” देश के तेजी से सामाजिक – आर्थिक विकास को सक्षम बनाने सेवाओं के प्रावधान की सुविधा के माध्यम से दृष्टि को पूरा.

(अब इस पर क्या कमेंट करें? कमेंट करने लायक भी ना छोड़ा…। इसलिए हम इस मुद्दे को यही छोड़ रहे हैं, क्योंकि कुछ अनहोनी होने की फीलिंग आ रही है…)

(Disclaimer : इस हिंदी को पढ़कर अगर कोई सुसाइड करने की कोशिश करता है तो इसके लिए हम जिम्मेदार नहीं रहेंगे। हमारा मकसद किसी को सुसाइड के लिए प्रेरित करना नहीं है।)


बुधवार, 2 सितंबर 2020

श्राद्ध पर क्यों गायब हो गए कौव्वे? खुद कौव्वे ने किया ऐसा खुलासा

कौवा , crow

हिंदी सटायर। मौका श्राद्ध का है। लेकिन इसके बावजूद कौव्वे कहीं नजर नहीं आ रहे। हाल ही में एक स्टडी में भी कहा गया है कि कौव्वे तेजी से लुप्त हो रहे हैं। लेकिन हमारे संवाददाता किसी तरह एक कौव्वे से टेलीफोनिक इंटरव्यू करने में सफल रहे। पेश हैं उसके मुख्य अंश :

हिंदी सटायर : आजकल कहां गायब हो गए हों?

कौव्वा: हम गायब नहीं हुए हैं, बल्कि श्राद्ध पक्ष में हमें छिपना पड़ रहा है। सेहत का जो सवाल है।

हिंदी सटायर : ऐसा क्यों?

कौव्वा:  पता नहीं कौन हमें पकड़कर खाना-वाना खिला दें?

हिंदी सटायर : अरे, कौव्वा भाई, वो तो सम्मान के रूप में आपको भोजन करवाते हैं? इसमें इतना क्यों अकड़ते हो?

कौव्वा:  हमारा भी पेट, दिल और किडनियां हैं। इंसान को अपनी फिकर नहीं है, हमें तो है। वे मिलावटी खाकर हार्ट और डायबिटीज के पेशेंट बन रहे हैं। हमें नहीं बनना। कोरोना काल अलग चल रहा है।

हिंदी सटायर : लेकिन इंसान तो आपको पितरों की तरह पूजकर भोजन करवाता है?

कौव्वा:  छोटा मुंह बड़ी बात। पर श्राद्ध का इंतजार क्यों करते हैं? जीते-जी जो असली पितर हैं, उन्हें भी थोड़ा अटेंशन दे दो भाई। फिर हमें भोजन करवाएं। तब हम भोजन ही नहीं करेंगे, आशीर्वाद भी देंगे, वादा रहा।



सोमवार, 31 अगस्त 2020

छह घंटे में राहुल गांधी के वीडियो पर एक भी लाइक नहीं, जानिए क्या है वजह?

rahul gandhi video jokes राहुल गांधी जोक्स

modi video unlike मोदी का वीडियो अनलाइक
30 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कही थी। भाजपा के ऑफिशियल यू ट्यूब चैनल पर डले इस वीडियो पर लाइक्स से छह गुना ज्यादा अनलाइक्स आए हैं ( देखें तस्वीर, लाइक्स करीब 100 K, डिसलाइक्स 625 K)। लनलाइक की वजह से यह वीडियो जबरदस्त चर्चा में आ गया है।

लेकिन इतनी ही आश्चर्य की बात और भी है। 31 अगस्त को सुबह करीब 10 बजे राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था की बदहाली पर एक वीडियो डाला। उसे दोपहर में 12 बजे कांग्रेस के ऑफिशियल यू ट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया। शाम को 6 बजे तक यानी करीब 6 घंटे में उस पर न तो एक भी लाइक था और न ही डिसलाइक (देखें राहुल के वीडियो का स्क्रीन शॉट)

आखिर राहुल गांधी के वीडियो पर कोई भी प्रतिक्रिया क्यों नहीं है? इसकी वजह क्या है? humourworld की पड़ताल में पता चला है कि इसकी सीधी सी वजह यही है  कि कांग्रेस के जिन लोगों को चैनल पर जाकर राहुल का वीडियो लाइक करना था, वे सभी तो भाजपा के चैनल पर जाकर मोदी के वीडियो को अनलाइक करने में लगे थे।

#modi video #rahul gandhi

(Modi youtube video disliked my many, but rahul gandhi's video on economy also not liked even by a single people )


Joke : न्यूज चैनल के सामने दो घंटे रहने का खामियाजा!

पक्के केले, सड़े हुए केले, न्यूज चैनल पर जोक्स, pucce banana

केले काफी कच्चे थे। तो जुगाड़ लगाई और उन्हें न्यूज चैनल के सामने रख दिया। मैं खुद दूसरे कमरे में क्वारंटीन हो गया। दो घंटे बाद देखा तो बेचारों की यह स्थिति हो गई थी...

😀😅🤓

रविवार, 30 अगस्त 2020

Humor : बेताल ने सुनाई सुशांत-रिया की कहानी, जानिए विक्रम ने क्या दिया जवाब!

 # vikram aur betaal  # Baital Pachchisi # Baital Pachisi # बेताल पच्चीसी  विक्रम और बेताल

By Jayjeet

बेताल आज विक्रम की बाइक पर कूदा तो कुछ परेशान था। विक्रम हौले-हौले बाइक चलाते रहा। उसे मालूम था कि भूत आया है तो कोई ऊटपटांग कहानी सुनाएगा ही, साथ में यह गीदड़ भभकी भी देगा ही कि अगर मैंने जवाब जानते हुए भी न दिया तो मेरी बाइक के टायर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे ...

लेकिन 15 मिनट हो गए, बेताल चुप की चुप। विक्रम ने बाइक की स्पीड थोड़ी बढ़ा दी, शायद हवा चलने से बेताल का कुछ दिमाग खुले। बेताल धीरे से बुदबुदाया- टीवी चैनल वालों से पचा मारा। स्साले मुझसे भी बड़ेवाले स्टोरीटेलर हो गए। फिर थोड़ी ऊंची आवाज में विक्रम से बोला - विक्रम सुन, आज तुझे बहुत इंटरेस्टिंग कहानी सुनाता हूं, एक एक्टर, उसकी प्रेमिका और सुसाइड की कहानी। ऐसी कहानी जो तुने आज तक ना सुनी होगी।

विक्रम मुस्कुराया, पर बोला कुछ नहीं, क्योंकि बोलते ही हूं हूं करते हुए बेताल उड़ जाता और कहानी धरी की धरी रह जाती।

बेताल ने बोलना शुरू किया - कुछ माह पुरानी बात है। एक अभिनेता हुआ करता था, नाम था सुशांत सिंह राजपूत। रिया नाम की उसकी एक प्रेमिका थी .... और इसके बाद बेताल ने लाग-लपेटकर वह पूरी कहानी सुना दी जो उसने पिछले कुछ दिनों से न्यूज चैनलों पर सुन रखी थी, यह मानते हुए कि विक्रम तो कभी न्यूज चैनल देखता नहीं।

कहानी सुनाने के बाद बेताल ने अपनी चिर-परिचित शैली में पूछा - विक्रम बता कि उस अभिनेता ने वाकई सुसाइड किया था? अगर नहीं किया तो उसका मर्डर किसने किया होगा? इसमें उसकी प्रेमिका रिया का क्या हाथ है? अगर तू जानकर भी चुप रहा तो तेरी बाइक के टायर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे...

विक्रम एक मिनट के लिए चुप रहा और फिर बोला - सुन बेताल, मुझे सब मालूम है कि इस कहानी में क्या-क्या हुआ होगा। लेकिन अगर मैं आज बता दूं तो फिर उन न्यूज चैनलों का क्या होगा, जहां से तुने ये कहानी चुराई है। मैं एक राजा की आत्मा हूं और विक्रम का रिकॉर्ड रहा है कि उसने किसी के साथ अन्याय नहीं किया। इसलिए जब तक न्यूज चैनलों के पास कोई और कहानी नहीं आ जाती या तैमूर का कोई भाई-बहन नहीं आ जाता, मैं उनके पेट पर लात नहीं मार सकता।

बेताल - वाह विक्रम, क्या राजा वाली बात कही। टीवी चैनलों ने तो पका मारा था, पर तुने मन प्रसन्न कर दिया। पर तू बोला और मैं चला ....

विक्रम (उड़ते हुए बेताल से चिल्लाकर बोला) - बेताल, अब किसी ऐसे घर की छत पर मत टंगना जहां दिनभर न्यूज चैनल चलता है... फिर मिलेंगे...।

# vikram aur betaal  #Baital Pachchisi # Baital Pachisi #बेताल पच्चीसी


विक्रम बेताल पार्ट 1 : बेताल ने विक्रम को सुनाई ट्रम्प के रहस्यमयी प्लान की कहानी

सोमवार, 24 अगस्त 2020

Funny Interview : कांग्रेस में कौन बन सकता है नया अध्यक्ष, राहुल के डॉगी PIDI ने किया खुलासा

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By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क, दिल्ली। जैसे ही सोनिया गांधी ने कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की और राहुल गांधी ने चिट्‌ठी लिखने वाले कांग्रेसियों को आढ़े हाथ लिया, किसी ब्रेकिंग न्यूज के चक्कर में रिपोर्टर लपककर पहुंच गया 10 जनपथ पर सीधे पीडी के पास। पीडी राहुल भैया का प्रिय डॉगी है। वह दो साल पहले उस समय सुर्खियों में आया था, जब राहुल ने कहा था कि उनके ट्वीटस पीडी ही करता है।

रिपोर्टर : पीडी भैया, उधर कांग्रेस में अफरातफरी मची है और इधर आप बड़े खुश नजर आ रहे हो?

पीडी: हां, राहुल भैया ने हमको तैयार रहने को कहा है।

रिपोर्टर : किस बात के लिए?

पीडी : शायद कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनने के लिए।

रिपोर्टर (जानबूझकर अनजान बनने का नाटक करते हुए) : क्यों भाई, ऐसा क्या हो गया?

पीडी : अरे आपको ना पता? किसने रिपोर्टर बना दिया! अभी कुछ देर पहले सोनिया मम्मा ने इस्तीफा देने की पेशकश की है। और राहुल भैया और प्रियंका दीदी ने भी कह दिया है कि अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का बनेगा। तो बताओ, अब अध्यक्ष कौन बनेगा? है कोई?

रिपोर्टर : पर आप भी तो परिवार में ही रहते हो? यानी प्रैक्टिकली तो आप भी गांधी परिवार का ही हिस्सा हो। तो आप भी ऐलिजिबल कैसे हो जाआगे?

पीडी : आप भी क्या बात करते हों...  हम परिवार में जरूर रहते हैं, पर गांधी-नेहरू खानदान के थोड़े हुए।

रिपोर्टर : अच्छा, राहुल भैया ने आपको ही अध्यक्ष बनने के लिए तैयार रहने को क्यों कहा? आपमें ऐसी क्या योग्यता है?

पीडी : वफादारी, सबसे बड़ी योग्यता तो यही है। फिर मैं मम्मा, भैया और दीदी की ऑन डिमांड पर कभी भी दुम हिला सकता हूं। उनके तलवे भी मैं ही बड़े अच्छे से चाट सकता हूं।

रिपोर्टर : माफ करना पीडी भैया, अभी आपने मुझ पर ताना मारा था, लेकिन पता आपको भी कुछ नहीं है।

पीडी : ऐसा क्या पता नहीं है?

रिपोर्टर : आप जिस वफादारी की बात कर रहे हो ना, वह तो कांग्रेस में कई लोगों के पास है। दुम हिलाने वाले भी बहुत मिल जाएंगे और तलवे चाटने वाले भी।

पीडी : पर भैया, दो पैर वाले तो दो पैर के ही होते हैं। दो पैर वालों की वफा का भरोसा नहीं। देखा नहीं, अभी कैसे फटाक से चिट्ठी लिख मारी। ये कोई वफादारी है !! भला राहुल भैया को नाराज कर दिया। वफादारी में चार पैर वालों से टक्कर नहीं ले सकते आपके दो पैर वाले वफादार।

रिपोर्टर : पर दूसरे कांग्रेसी नेता आपको पार्टी का अध्यक्ष क्यों स्वीकार करेंगे?

पीडी : अरे, थोड़ी देर पहले आपने ही तो कहा था कि प्रैक्टिकली हम गांधी परिवार का हिस्सा है... इसलिए, समझें...

रिपार्टर कुछ और पूछें, इतने में पीडी के पास जमीन पर रखा मोबाइल बज उठा। स्क्रिन पर राहुल भैया नाम चमक रहा था। और पीडी भी जी भैया, जी भैया में बिजी हो गया... और यह रिपोर्टर भी अपनी दुम को समेटकर वापस आ गया, ब्रेकिंग न्यूज के साथ...

#congress new president  #political satire #congress #rahul #humor

रविवार, 23 अगस्त 2020

Joke : क्यों कांग्रेस छोड़ने की जल्दी में हैं कांग्रेसी?

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Funny Interview : सुशांत सिंह मामले से फुर्सत मिलते ही रिपोर्टर ने कर ली बादल के टुकड़े से खास बातचीत

#Floods #heavy_rains  #satire #humor शहरों में बाढ़



By Jayjeet

जैसे ही बादल का टुकड़ा छत के ऊपर से गुजरा, रिपोर्टर ने हाथ के इशारे से उसे रोक लिया।

बादल : कौन हो भाई? क्यों रोक लिया हमें?

रिपोर्टर : अरे, मुझे ना पहचाना, मैं वही, जाना-माना रिपोर्टर?

बादल : अरे वाह, रिपोर्टर ना हुए, मोदी हो गए कि तुम्हें हर कोई पहचान जाएकाम बताओ, पर ये मत बताना कि तुम्हारे साले साहब की गली में बरसना है।

रिपोर्टर : अरे मुझे क्या टुच्चा पत्रकार समझा जो टुच्चे-मुच्चे काम बताऊगा। मुझे तो आपका इंटरव्यू करना है।

बादल : अच्छा, बड़े रिपोर्टर हैं तो आपको सुशांत सिंह मामले की जांच-पड़ताल से फुर्सत मिल गई क्या?

रिपोर्टर : हां, हमने अब यह केस सीबीआई को सौंप दिया है।

बादल : वैसे मुझे सीबीआई पर भरोसा नहीं है। आप लोग सही तो जा रहे थे..

रिपोर्टर : बादल महोदय, मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि मेरा ऐसे मामलों में कोई खास इंटरेस्ट नहीं है। मैं तो डेवलपमेंटल रिपोर्टर हूं, डेवलपमेंटल रिपोर्टर, हां

बादल : दो बार डेवलपमेंटल रिपोर्टर बोलने भर से कोई विकास टाइप की पत्रकारिता करने वाला पत्रकार नहीं बन जाता, जैसे बार-बार विकास विकास बोलने भर से विकास ना हो जाता। खैर मुद्दे पर आइए और पूछिए क्या पूछना है? पर जरा जल्दी, सीजन चल रहा है।

रिपोर्टर : पहला सवाल, या कह सकते हैं कि पहला आरोप है कि आप बरसने में इतनी असमानता क्यों रखते हैं? कहीं घटाघोप तो कहीं एक बूंद भी नहीं।

बादल : यह सवाल कभी आपने अपने नेताओं और अफसरों से पूछा, उन जिम्मेदारों से जिनके ऊपर विकास की जिम्मेदारी रही है?

रिपोर्टर : समझा नहीं।

बादल : अब इतने भी नासमझिये ना बनो। भई, सालों से आपके नेता समाजवाद की बात करते आए हैं, लेकिन हुआ क्या? समानता आई?

रिपोर्टरअब तो समाजवाद की बात ही बंद हो गईतो हम इस फालतू शब्द पर चर्चा क्यों करें?

बादल (बीच में बात काटते हुए) : सही कह रहे हैं। समाजवाद की बात करना पहले भी केवल फैशन था, अब ओल्ड फैशन्ड हो गया है। ठीक है। ऐसे कठिन सवाल छोड़ देते हैं।

रिपोर्टर : आपने मेरी बात बीच में काट दी थी..  मेरा तो केवल इतना सवाल था कि ऐसा भी क्या बरसना कि शहरों में बाढ़ जाए...

बादल : पत्रकार महोदय, बरसते तो हम सदियों से आए हैं, लेकिन पहले नदियों में बाढ़ आती थी। अब नदियां तो वैसी रही नहीं तो शहरों में रही है। बाढ़ कहीं तो आएगी ना! और यह सिटी प्लानर्स से पूछिए कि अरबों-खरबों खर्च करके भी वे बाढ़मुक्त शहर क्यों नहीं बना पा रहे?

रिपोर्टर : फिर भी थोड़ी सी बारिश में बेइज्जती हो जाती है लोगों की। हम रिपोर्टर्स को भी मजबूरी में लिखना पड़ता है कि पटना में या जयपुर में बाढ़ आई.... मुंबई-इंदौर में बाढ़ जैसे हालात हुए...कुछ तो उपाय बताइए...

बादल : तो सिंपल सा उपाय सुन लीजिए और मुझे चलने की अनुमति दीजिए। उपाय यह है कि कुछ ही दिनों में संसद का मानसून सत्र होने वाला है। सरकार एक कानून बनाकर मानसून में हर शहर को नदी घोषित कर दें। न रहेंगे शहर, न आएगी बाढ़। चलता हूं, किसान मेरा इंतजार कर रहा है...आप शहरियों को हम न बरसे तो दिक्कत और बरसे तो दिक्कत ...।

#Floods #heavy_rains  #satire #humor

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गुरुवार, 20 अगस्त 2020

देखिए नई टाइप की स्मार्ट रोड : ग्राउंड वाॅटर रिचार्ज करेगी, आसान होंगे कई काम

 smart city and roads बारिश में सड़क


By Jayjeet

1. जैसा कि चित्र से स्पष्ट है, यह बारिश के दिनों में ग्राउंड वाॅटर को रिचार्ज करने का काम करेगी। इसके पीछ सोच यह है कि चूंकि अब जगह-जगह कांक्रटीकरण के कारण पानी को जमीन के भीतर जाने का मौका नहीं मिलता है। तो ऐसे में इस तरह की सड़कों के निर्माण को प्रोत्साहन दिया जाएं।

2. इस सड़क में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का यूज किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि अफसरों, इंजीनियरों और ठेकेदारों को सामग्री में मिलावट की मात्रा को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं होगी। यह काम सड़क खुद ही बहुत ही साइंटिफिक ढंग से कर लेगी।

3. AI के जरिए सड़क बादलों की डेंसिटी को देखकर पहले से ही उचित आकार के गड्‌ढों में तब्दील हो सकेगी, ताकि पानी की एक भी बूंद खराब न हो और वह सीधे जमीन में नीचे उतर सकें। सामान्य सड़क में पहली-दूसरी बारिश का पानी गड्‌ढे करने में ही व्यर्थ हो जाता है।

4. सड़क से जुड़े सभी नेताओं, इंजीनियरों, ठेकेदारों और अफसरों के बीच कमीशन का बंटवारा भी सड़क अपने आप डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम (DBT) के जरिए खुद ही कर देगी। इससे विभिन्न पक्षों के बीच किसी तरह का विवाद नहीं होगा।

5. जमीन के भीतर पर्याप्त पानी पहुंचाने के बाद बचे हुए पानी का इस्तेमाल यह सड़क बिजली बनाने में करेगी। अनुमान है कि ऐसी एक सड़क बारिश के हर सीजन में दस हजार वॉट तक अतिरिक्त बिजली का निर्माण कर सकेगी जो मुफ्त बांटने के काम आएगी।

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