शनिवार, 27 मई 2023

यहां कोई हेडिंग नहीं... फोटोज में दी गईं हेडिंग्स काफी हैं...



(हां, 'सबका साथ, सबका विकास' योजना के अंतर्गत अब कोई बेरोजगार नहीं है। सरकार को लख-लख बधाइयां!!)
By Jayjeet
इंदौर में कथित तौर पर एक हिंदू लड़के के साथ एक मुस्लिम लड़की के घूमने पर मुस्लिम युवकों ने उसे रोका और मारपीट वगैरह की। हमारे राज्य के कर्णधार ने भी भयंकर सक्रियता दिखाते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए।
हमारे कर्णधार जी हमेशा सजग और सतर्क रहते हैं। अब कुछ नामाकुल किस्म के लोग पूछ रहे हैं कि अगर लड़का मुस्लिम और लड़की हिंदू होती तो क्या वे कुछ कार्रवाई करते? उनका आरोप है कि कोई कार्रवाई नहीं होती।
क्यों नहीं करते जी? जरूर करते। वे नहीं करते तो उनके नंबर दो मिनिस्टर करते। वे ऐसे मामलों में उनसे भी तेज हैं। हां, तब कार्रवाई हिंदू लड़की के साथ घूमने वाले मुस्लिम लड़के के खिलाफ होती। पर, होती तो सही ना? ऐसे कैसे कह दिया कि कार्रवाई नहीं होती! कार्रवाई तो कार्रवाई है। इस 'कार्रवाई' और उस 'कार्रवाई' को देखिए। मुझे तो कोई अंतर नजर नहीं आता। इस ‘कार्रवाई’ में भी चार शब्द है और उस ‘कार्रवाई’ में भी चार शब्द।
हां, इस पूरी घटना का एक सकारात्मक पक्ष और है। मुस्लिम समाज अब आरोप ना लगाएं कि उसके युवाओं के पास कोई काम नहीं है। है, जरूर है। ये कोई कम काम है? अपनी बेटियों को काफिरों से बचाना कोई छोटा काम नहीं है। हिंदुओं से पूछिए जरा, केरल स्टोरी के बाद उनकी जिम्मेदारी कितनी बढ़ गई है।
इसकी साजिश का भांडाफोड़, उसकी साजिश का भांडाफोड़... इसको मारो, उसको पीटो... कौन लड़की किस गैर धर्मी लड़के के साथ है... उफ्फ! कितना काम भरा है दुनिया में। इसके बाद भी अगर कोई कहें कि मैं बेरोजगार हूं तो हिंदू और मुस्लिम धर्मों के ठेकेदारों से मेरा विनम्र आग्रह है कि उसे दो चपत जरूर लगाएं।
…. और हां, हम सभी को उस कबाइली युग की वापसी की
बधाई
जिसमें एक कबीले के लोग अपने कबीले की महिलाओं को बचाने के लिए जी-जान लगा देते थे। महिलाएं तब उनके लिए वस्तु थी और वे खुद अपनी महिलाओं का इस्तेमाल कैसे भी कर सकते थे!! इसमें तब किसी को आपत्ति नहीं थी। आज भी शायद नहीं होगी!!!
लेकिन ठहरिए, जरा दोनों कबीलों की महिलाओं से पूछ लेते हैं...!

मंगलवार, 23 मई 2023

महाराणा प्रताप के वंशज का तमाचा… आवाज न आई, पर शायद चाेट तो लगी होगी!!!

 


 By Jayjeet

एक छोटी-सी खबर जिस पर शायद ही किसी का ध्यान गया होगा, आज के परिप्रेक्ष्य में काफी महत्वपूर्ण है। यह खबर उन लोगों को आईना दिखाती है, जिनके लिए पुराने महान नायकों के नाम पर राजनीति करना शौक बन गया है।

महाराणा प्रताप के वंशज डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कल महाराणा प्रताप की जयंती पर एक अखबार को दिए इंटरव्यू में एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही है। उनके अनुसार महाराणा प्रताप एक जननायक थे, केवल हिंदू नायक नहीं। उन्होंने यह भी जोड़ा- हकीम खां सूर (शेर शाह सूरी के वंशज) उनके सेनापति थे। 

इस महत्वपूर्ण बात के साथ एक ऐतिहासिक तथ्य और जोड़ते चलते हैं। महाराणा प्रताप के मुख्य प्रतिद्वंद्वी यानी अकबर की सेना के प्रधान सेनापति थे राजा मानसिंह प्रथम। कल्पना कीजिए कि कितना दिलचस्प होगा वह नजारा- हल्दीघाटी की प्रसिद्ध जंग का मैदान। एक तरफ महाराणा प्रताप की सेना, जिसकी अगुवाई कर रहे हैं हकीम खां सूर और दूसरी तरफ अकबर की सेना जिसकी अगुवाई कर रहे हैं राजा मानसिंह।

लक्ष्यराज सिंह का यह कहना जितना उचित है कि प्रताप केवल हिंदू नायक नहीं थे, उतना ही उचित यह मानना भी है कि अकबर केवल मुस्लिमों के नायक नहीं थे। ये वे राजा थे, जिन्होंने कोई धर्मयुद्ध नहीं लड़े थे। ये किसी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे, बल्कि ये सच्चे राजा का कर्त्तव्य निभा रहे थे, जिनके लिए अपनी धरती की रक्षा करना या अपने साम्राज्य का विस्तार करना ही सबसे महत्वपूर्ण था।

उपरोक्त तथ्य यह भी बताता है कि 400 साल में हम कहां से कहां आ पहुंचे। आज इक्कीसवीं सदी के नेता हमारे वीर प्रताप को हिंदुओं तक सीमित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं और अकबर को तो इतिहास से निकालकर कूड़ेदान में पटक दिया गया है। अकबर के साथ-साथ राजा मानसिंह सहित उन नवरत्नों को भी जिनमें तानसेन, बीरबल और राजा टोडरमल भी शामिल हैं।

डॉ. लक्ष्यराज की बात शायद उन लोगों को 'धोखा' लग सकती है, जिन्होंने उन्हें अपने एजेंडे को और आगे बढ़ाने के लिए बुलाया था। लेकिन डॉ. लक्ष्यराज ने बहुत ही साफगोई से यह बात कहकर साबित कर दिया कि वे वीर महाराणा प्रताप के वंशज यूं ही नहीं हैं। हो सकता है आपको अकबर पसंद ना हो, लेकिन सोचिए, क्या महाराणा प्रताप को हकीम खां सूर, अकबर और राजा मानसिंह के बगैर याद किया जा सकता है?

(पुनश्च... यह भी हो सकता है कि आने वाले वर्षों में ‘इतिहास पुनर्लेखन के नाम पर सेनापति अदल-बदल दिए जाएं...! तब शायद यह धर्मसंकट भी खत्म जाएगा, जो आज उपरोक्त ऐतिहासिक तथ्य से कुछ लोगों के सामने खड़ा हो गया होगा। या कोई नया 'ऐतिहासिक तथ्य' यह भी आ सकता है कि मानसिंह की मां या बहनों को तो अकबर ने बंदी बनाकर रखा था और वह उसे लड़ने के लिए ब्लैकमेल कर रहा था, बिल्कुल बॉलीवुडी कहानी के खलनायक अजित की तरह... आजकल ऐतिहासिक तथ्यों को जिस तरह कहानियों जैसा ट्रीट किया जा रहा है तो यह असंभव भी नहीं है...!)