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रविवार, 16 अगस्त 2020

Humour : बाइडेन से पीछे चल रहे ट्रम्प ने अब राहुल गांधी से मांगी मदद, क्यों और कैसे? पढ़िए यहां

Trump Rahul Gandhi humor ट्रम्प राहुल गांधी जोक्स

By Jayjeet

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में अब पांच माह से भी कम का वक्त बचा है। हाल ही में हुए कई सर्वे में प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प अपने प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन से पीछे चल रहे हैं। ऐसे में ट्रम्प ने अब राहुल गांधी से मदद लेने की योजना बनाई है। इस बीच, ट्रम्प की इस योजना की भनक लगते ही बाइडेन के खेमे में अफरातफरी का माहौल है।

क्या है ट्रम्प का ट्रम्प कार्ड? 
ट्रम्प की कोर टीम द्वारा बनाए गए प्लान के अनुसार राहुल गांधी अगले तीन माह तक अमेरिका में रहकर बाइडेन के पक्ष में जोरदार चुनावी रैलियां करेंगे। इसके अलावा वे ट्विटर पर एक्टिव रहकर रोजाना ट्रम्प से एक सवाल भी पूछेंगे। ट्रम्प के योजनाकारों के अनुसार इससे एक माह के भीतर ही ट्रम्प के खिलाफ बना माहौल पक्ष में हो जाएगा और चुनाव आते-आते वे क्लीन स्वीप करने की स्थिति में आ जाएंगे।

विरोधी खेमे में अफरातफरी, सदमे में बाइडेन
ट्रम्प की इस योजना की भनक लगते ही बाइडेन के खेमे में सन्नाटा खींच गया है। वहां से आ रही खबरों के अनुसार अगर ट्रम्प अपनी इस योजना में सफल हो गए तो बाइडेन के लिए चुनाव जीतना तो दूर, अपनी जमानत तक बचाना मुश्किल हो जाएगा। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार इससे बाइडेन गहरे सदमे में पहुंच गए हैं।

राहुल ने पूछा, कौन हैं बाइडेन?
इस बीच बाइडेन के लिए एक राहत की खबर भी है। राहुल गांधी के करीबी सूत्रों के अनुसार ट्रम्प के इस प्रस्ताव के जवाब में राहुल ने पूछ लिया कि ये बाइडेन कौन हैं? राहुल के करीबी निजी सचिव कहा, 'राहुल भैया तब तक किसी के पक्ष-विपक्ष में नहीं बोलते, जब तक कि वे खुद उनके बारे में गूगल से पुख्ता जानकारी नहीं ले लेते।' ऐसे में बाइडेन खेमे को उम्मीद है कि पुख्ता जानकारी लेते-लेते अमेरिकी चुनाव ऐसे ही गुजर जाएंगे।

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यह भी पढ़ें :  देवउठनी एकादशी के बाद खत्म हो जाएगी कोरोना की सारी अकड़, एक अदद कोरोनी की तलाश



गुरुवार, 2 जुलाई 2020

जमीन का जवाब जमीन से : सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा को चीन में दिया फ्रीहैंड

चीन जाने की तैयारी करते हुए रॉबर्ट वाड्रा।

By Jayjeet

हिंदी सटायर/ग्लोबल टाइम्स। मोदी सरकार ने ‘जमीन का जवाब जमीन से’ देने की योजना के तहत रॉबर्ट वाड्रा को चीन में फ्रीहैंड देने का निर्णय लिया है। भारत के इस फैसले से चीन के सत्ता के गलियारों में भारी खलबली मच गई है। प्रमुख चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार इससे भयभीत चीन ने प्रस्ताव दिया है कि अगर भारत वाड्रा को हमारी सीमाओ से दूर रखे वह पूरा अक्साई चीन भारत को लौटाने को तैयार है।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय ने अपने एक सीक्रेट कम्युनिकेशन में चीन को धमकाया था कि अगर वह जमीन हड़पने की अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो राबर्ट वाड्रा को चीन भिजवाकर वहां उन्हें फ्रीहैंड दे दिया जाएगा। इस धमकी से भयभीत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आनन-फानन में अपने वरिष्ठ लीडर्स और सेना के आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय मीटिंग की। इस मीटिंग में सहमति बनी कि अक्साई चीन की कुछ हजार वर्ग किमी जमीन के चक्कर में पूरे चीन को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। चीनी सूत्रों के अनुसार चीन ने प्रस्ताव रखा है कि हम भारत को उसके कब्जे वाला पूरा क्षेत्र लौटा देंगे और फिर आइंदा उसकी तरफ तिरछी नजर से भी ना देखेंगे। बस भारत को वाड्रा को चीन की सीमा से एक हजार किमी दूर रखना होगा।

अब चीन को समझ में आएंगे दामादजी के असली मायने :

सरकार के इस निर्णय का वाड्रा ने भी स्वागत किया है। उन्होंने ट्विट करते हुए कहा- “मेरे लिए इससे बड़े गर्व की बात और क्या होगी कि मैं देश के काम आ सकूं। अब चीन को पता चलेगा कि दामादजी का असली मतलब क्या होता है।”

(Disclaimer : यह खबर शुद्ध कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और राजनीतिक कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)

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मंगलवार, 15 जुलाई 2014

स्पीच कोचिंग सेंटर को भारी पड़ा राहुल को पांच साल में भाषण सिखाने का प्रस्ताव

नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार सुबह राजधानी दिल्ली में भाषण सिखाने वाले एक बड़े कोचिंग संस्थान के सामने विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। वे कोचिंग संस्थान के उस प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि संस्थान राहुल गांधी को पांच साल के भीतर भाषण देना सिखा देगा और इसके लिए कोई फीस भी नहीं ली जाएगी।

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शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

साॅफ्ट ड्रिंक महंगा, किसानों के लिए संकट बढ़ा

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट में सॉफ्ट ड्रिंक पर टैक्स बढ़ाने के फैसले को अनेक किसान संगठनों ने किसान विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा है कि इससे खेती की लागत बढ़ जाएगी और पहले से ही कर्ज के जाल में फंसे किसान और भी संकट में आ जाएंगे।
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शनिवार, 5 जुलाई 2014

हर व्यक्ति को मिलेगा पानी, देश भर में बिछाई जाएंगी लीकेज वाली पाइप लाइनें

कांग्रेस ने बताया जनविरोधी कदम, कहा- मिनरल वॉटर वालों का धंधा हो जाएगा चौपट

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha

Water leakage Mission.

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हर तबके तक जल पहुंचाने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना के तहत देशभर में बिछी पानी की पाइप लाइनों को लीक करने का फैसला किया है। जहां पाइप लाइनें नहीं हैं, वहां नई पाइप लाइनें बिछाकर उनमें लीकेज की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी। यह अहम फैसला शनिवार सुबह कैबिनेट की विशेष बैठक में लिया गया। उधर, प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे जनहित विरोधी कदम बताते हुए कहा है कि इससे मिनरल वाॅटर बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों का धंधा चौपट हो जाएगा।
केंद्रीय मंत्री जयशंकर प्रसाद ने पत्रकारों को बताया कि जलधर समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने लीकेज सिस्टम को पूरे देशभर में लागू करने का निर्णय लिया है। इस समिति ने अपनी बारह हजार पेज की रिपोर्ट में कहा है कि देश की आधी आबादी फूटे हुए पाइपों से रिसते पानी से ही अपनी दैनिक आवश्यकता की पूर्ति करती है। रिपोर्ट में 11,998 पेजों पर फूटी पाइप लाइनों की जीवंत तस्वीरें हैं, जिनमें लोगों को पाइपों से लीक हो रहे पानी को बाल्टियाें, मटकों और बोटलों में भरते हुए दिखाया गया है। ये तस्वीरें जम्मू से लेकर कन्याकुमारी और बड़ौदा से लेकर कोलकाता तक के शहरों की है। रिपोर्ट में इस बात पर संतोष व्यक्त किया गया है कि देश के अधिकांश हिस्सों में पाइप लाइनों में लगातार रिसाव होता रहता है, जिससे नागरिकों को पानी की कभी किल्लत महसूस नहीं होती।
प्रसाद ने बताया कि उनकी सरकार ने वर्ष 2018 तक सभी को पानी पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए केंद्र सरकार वॉटर लीकेज मिशन लाने जा रही है। इसके तहत हर राज्य में कम से कम पांच हजार किमी लंबी पाइप लाइनों को टूटा-फूटा बनाया जाएगा, ताकि एक बड़ी आबादी तक पानी की पहुंच हो सके। उन्होंने कहा कि चूंकि पानी राज्यों का विषय है। ऐसे में राज्य सरकारों से भी इस संबंध में आग्रह किया जाएगा कि वे अपने-अपने राज्यों में जितना संभव हो सके, पाइप लाइनाें से हो रहे रिसाव को रोकने की कोशिश न करें। व्यापक चर्चा के लिए राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों की एक बैठक भी जल्दी ही बुलाई जा रही है।
कांग्रेस ने बताया जनविरोधी, केजरीवाल ने भी जुबान खोली : सरकार के इस फैसले का विरोध भी शु्रू हो गया है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को काफी नुकसान होगा, जो मिनरल वॉटर के धंधे में लगी हुई है। जब लोगों को आसानी से पानी उपलब्ध हो सकेगा, तो इन कंपनियाें का पानी कौन खरीदेगा? इधर, काफी दिनों से चुप बैठे अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ऐसा केवल अंबानी को लाभ पहुंचाने के मकसद से किया जा रहा है, ताकि अच्छे पाइपों से गैस की आपूर्ति घरों तक की जा सके।

रविवार, 29 जून 2014

जुगाड़ तकनीक के क्षेत्र में भारत शुरू करेगा अपना नोबेल पुरस्कार

हर साल 100 जुगाड़बाजों को प्रदान किए जाएंगे ये पुरस्कार

 

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha

नई दिल्ली। देश में शोध के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के सूखे को दूर करने के लिए भारत सरकार ने अपना खुद का नोबेल पुरस्कार शुरू करने का फैसला किया है। यह पहल राष्ट्रपति की उस चिंता के बाद की गई है जिसमें उन्हाेंने कहा था कि पिछले आठ दशक में देश को शोध के क्षेत्र में एक भी नोबेल नहीं मिलना  दुर्भाग्यपूर्ण है।
केंद्रीय विज्ञान मंत्रालय के अनुसार 'इंडियन नोबेल प्राइज इन जुगाड़ टेक्नोलॉजी' के नाम से शुरू होने वाले इस पुरस्कार का खाका तैयार कर लिया गया है। इसे संक्षेप में ‘नोबेल प्राइज’ ही कहा जाएगा। यह पुरस्कार हर साल उन 100 लोगों को प्रदान किया जाएगा जिन्होंने मौजूदा उपलब्ध संसाधनों से जुगाड़ कर देसी आविष्कार किए हों। इससे भारत एक झटके में ही नोबेल पुरस्कार का सूखा खत्म कर लेगा। पुरस्कार में ट्रॉफी, शॉल, श्रीफल और रेलवे में द्वितीय श्रेणी की यात्रा का पास प्रदान किया जाएगा।
मंत्रालय की एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि नोबेल प्राइज कमेटी ने पिछले आठ दशकों में शोध के क्षेत्र में एक भी भारतीय को नोबेल पुरस्कार के योग्य नहीं पाया। इससे साफ जाहिर होता है कि कमेटी कितने पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर कार्य करती है। कमेटी ऐसे अपात्र व अक्षम लोगों से भरी पड़ी है जिनमें भारतीयों की जुगाड़ प्रवृत्ति को परखने की क्षमता का अभाव दृष्टिगोचर होता है। हम भविष्य में इस कमेटी द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार को नकारते हुए अपना खुद का नोबेल शुरू करने की पहल कर रहे हैं। अभी इसे भारत भूमि पर होने वाले जुगाड़ तक सीमित रखा जाएगा, लेकिन भविष्य में इसमें सार्क देशों के जुगाड़ को भी शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।

शुक्रवार, 27 जून 2014

प्रधानमंत्री की अपील पर जमाखोरी रोकने आगे आए जमाखोर

- सरकार आग्रह करे तो हम राष्ट्रहित में अपने कुछ हितों की कुर्बानी देने को तैयार : जमाखोर महासंघ

- खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने महासंघ की पहल का स्वागत किया, कहा-जमाखोरों की मदद से थामेंगे महंगाई


जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha
इतनी जमाखोरी अच्छी बात नहीं!

नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमाखोरों के खिलाफ राज्यों से कड़ी कार्रवाई करने की अपील के समर्थन में देश के बड़े जमाखोर भी आगे आए हैं। जमाखोरी पर नियंत्रण रखने के संबंध में उन्हाेंने प्रधानमंत्री को प्रजेंटेशन देने का फैसला किया है। इस बारे में अखिल भारतीय जमाखोर महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री खोरचंद स्टॉक ने पीएमओ को एक चिट‌्ठी लिखकर प्रधानमंत्री से समय मांगा है। उधर, केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने महासंघ की इस पहल का स्वागत किया है।
खोरचंद ने हिंदी सटायर के साथ बातचीत करते हुए कहा कि हम प्रधानमंत्री की इस अपील से गदगद हैं जिसमें उन्होंने राज्यों से जमाखोरों के खिलाफ सख्ती दिखाने की प्रार्थना की है। हालांकि हमें पूरा यकीन है कि राज्य सरकारें जमाखोरी के खिलाफ कुछ नहीं करेंगी। केंद्र भी केवल राज्यों के भरोसे बैठा है। तो ऐसे समय में जबकि मानसून फेल होता नजर आ रहा है, राष्ट्रहित में हमारा भी यह फर्ज बनता है कि हम अपनी ओर से ही कोई पहल करें। अखिल भारतीय जमाखोर महासंघ के विशेषज्ञों की टीम ने एक प्रजेंटेशन तैयार किया है जिसमें हम बता सकते हैं कि इस समस्या से मिलजुलकर किस तरह निपटा जा सकता है। श्री खाेरचंद ने कहा कि देश के राजनीतिक सिस्टम को रन करने में जमाखोर जी-जान से याेगदान देते हैं और इस तरह प्रत्यक्ष रूप से देश में पॉलिटीकल डेमोक्रेसी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में एक बैलेंस्ड एप्रोच की जरूरत है। चूंकि जनता इस समय त्राही-त्राही कर रही है। तो ऐसे में अगर सरकार हमसे आग्रह करे तो हम राष्ट्रहित व जनहित में अपने कुछ हितों की कुर्बानी देने में पीछे नहीं रहेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने खोरचंद स्टॉक की चिट‌्ठी मिलने की पुष्टि की है, लेकिन अभी यह बताने से इनकार कर दिया कि प्रधानमंत्री इनसे कब मुलाकात करेंगे। इस बीच, केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने महासंघ की इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि अब हम जमाखोरों की मदद से आने वाले समय में महंगाई को थामने में जरूर कामयाब होंगे।

गुरुवार, 26 जून 2014

मानसून ने रेलगाड़ी से सफर करने से किया इनकार, बैलगाड़ी की जिद ठानी

- सरकार के हाथ-पैर फूले, तलाशी जा रही है टि्वटर के जरिए आगे बढ़ाने की संभावना

 

जयजीत अकलेचा / Jayjeet Aklecha

यात्रा का सबसे सुरक्षित साधन।
 नई दिल्ली।
मानसून का इंतजार कर रहे आम लोगों के लिए एक और बुरी खबर है। मंगलवार रात को बिहार के छपरा के पास राजधानी एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद मानसून ने भारतीय रेलों में सफर करने से इनकार कर दिया है। अब उसने बैलगाड़ी से ही आगे की यात्रा करने की जिद ठान ली है। इस वजह से उसमें और भी देरी होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे सरकार के हाथ-पैर फूल गए हैं।
माैसम विभाग के सूत्रों के अनुसार विशेष विमानों से मानसून को केरल तट पर उतारने के बाद उसे विभिन्न रेलगाड़ियों से अलग-अलग स्थानोें पर भिजवाया जा रहा था। इसका मकसद यही था कि पहले से ही लेट हो चुके मानसून को रेलगाड़ियों के माध्यम से जल्दी से जल्दी देश भर में पहुंचा दिया जाए। लेकिन यहीं पर गड़बड़ी हो गई। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “सरकार भारतीय रेलवे की कार्यक्षमता का अाकलन करने में विफल रही। भारतीय रेलगाड़ियों की लेटलतीफी जगजाहिर है, लेकिन नई सरकार इसे क्यों नहीं समझ पाई, यह हैरान करने वाला है। शायद अनुभवहीनता के कारण ऐसा हुआ होगा।”
रेलगाड़ियों की इसी लेटलतीफी के कारण मानसून पहले ही लेट हो गया और रही-सही कसर बुधवार को हुए रेल हादसे ने पूरी कर दी। हालांकि इस ट्रेन में मानसून परिवार का कोई सदस्य सवार नहीं था, लेकिन हादसे का मानसून के दिलों-दिमाग पर इतना गहरा असर पड़ा है कि उसने आगे का सफर रेलगाड़ियों से करने से ही इनकार कर दिया है। सूत्रों के अनुसार मानसून का मानना है कि भारत में अब बैलगाड़ियां ही सफर का सबसे सुरक्षित साधन रह गई हैं और इसलिए वह आगे इसी में सफर करेगा।
सांसत में सरकार, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करेगी! : सूत्रों के अनुसार मौसम विभाग ने मानसून के इस फैसले से अपने विभागीय मंत्री जितेंद्र सिंह को अवगत करवा दिया है। सिंह ने भी तुरंत पीएमओ से संपर्क कर उसे मानसून की जिद के बारे में जानकारी दी। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानसून की भावना का सम्मान करते हुए इस संभावना को तलाशने के निर्देश दिए है कि क्या उसे टि्वटर और फेसबुक के माध्यम से एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंचाया जा सकता है? इससे मानसून न केवल जल्दी पहुंचेगा, बल्कि वह सुरक्षित भी रहेगा। चूंकि अब यह दक्षिण के राज्यों से आगे निकल गया है। ऐसे में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, जिनके अंतर्गत ही राजभाषा विभाग आता है, ने मानसून को आगे बढ़ाते समय हिंदी को प्राथमिकता देने का कहा है।

बुधवार, 25 जून 2014

मैंने खुद कभी भगवान होने का दावा नहीं किया : साईं बाबा

नारद मुनि के साप्ताहिक करंट अफेयर्स प्रोग्राम 'एंजल्स एडवोकेट' में बोल रहे थे शिरडी वाले बाबा

देवलोक से विशेष संवाददाता।
शिरडी वाले साईं बाबा ने कहा है कि उन्होंने खुद कभी भी भगवान होने का दावा नहीं किया। यह तो भक्तों की श्रद्धा है जिसने उन्हें भगवान बना दिया। साईं बाबा बुधवार को देवलोक में नारद मुनि के साप्ताहिक वन टु वन करंट अफेयर्स प्रोग्राम 'एंजल्स एडवोकेट' में बोल रहे थे।
धरती पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के इस विवादित बयान कि शिरडी के साईं, भगवान नहीं हैं और उनकी पूजा करना उचित नहीं है, पर टिप्पणी करते हुए साईं बाबा ने कहा, “ यह सच है कि मुझे किसी भी यूनिवर्सिटी ने 'भगवान' की मानद उपाधि नहीं दी और न ही किसी सरकारी विभाग से मुझे 'भगवान' का कोई एक्रेडिएशन ही हासिल हुआ है। मैंने कभी इसका दावा भी नहीं किया। इसलिए अगर शंकराचार्यजी कह रहे हैं कि मैं भगवान नहीं हूं तो उसमें गलत कुछ नहीं है। आखिर वे सदियों पुरानी परंपरा से आते हैं। बड़े-बड़े आश्रमों में रहते हैं। बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमते हैं। मुझसे कहीं ज्यादा पढ़े-लिखे हैं। अगर वे कुछ बोल रहे हैं तो वह सही ही होगा। मैं ठहरा फकीर।”
इस सवाल के जवाब में कि क्या यह आपके दोहरे चरित्र का परिचायक नहीं है कि आप बात तो फकीरी की करते हों, लेकिन धरती पर सोने के सिंहासन पर बैठते हो, साईंबाबा ने कहा,
इसी बात का तो अफसोस है नारदजी। जिंदगी भर मैं पत्थरों पर सोया लेकिन अब मुझे सोने के सिंहासन पर बैठाया जा रहा है। सादगी, गरीबों की सेवा जैसे मेरे उच्च विचारों को स्वर्ण सिंहासन के नीचे खिसका दिया गया है। 
हालांकि बाद में उन्होंने इस मुद्दे पर यह कहकर ज्यादा बातें करने से इनकार कर दिया कि आजकल लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचने में वक्त नहीं लगता है। इसलिए मैं यहां स्वर्ग में जैसा भी हूं, ठीक हूं। कुछ कहकर मामले को और तूल देना मेरी आदत नहीं है।

मंगलवार, 24 जून 2014

इराक संकट से निपटने के लिए अमेरिका ने रजनीकांत से लगाई गुहार

थलाइवा अच्छे दिन लाने की मुहिम में व्यस्त, खुद इराक नहीं जाएंगे, केवल बंधकों की मुक्ति के लिए अपना क्लोन भेजेंगे

जयजीत अकलेचा / Jayjeet Aklecha

बगदाद/चेन्नई। इराक संकट से निपटने के लिए अमेरिका ने रजनीकांत से गुहार लगाई है। अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि अब केवल रजनीकांत ही दुनिया को आतंकवाद के पंजों से बचा सकते हैं। इस पर रजनीकांत की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों के अनुसार वे पहले से ही देश में अच्छे दिन लाने की एक गोपनीय मुहिम में व्यस्त हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि वे इस मामले में कितनी मदद कर पाएंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी सोमवार काे बगदाद पहुंचे और उन्होंने देश के हालात का जायजा लिया। जिस तरह से आतंकी संगठन आईएसआईएस लगातार इराक के शहरों पर कब्जा जमाता जा रहा है, उससे वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अब इराक में अमेरिकी सेना को भेजने से भी कोई हल नहीं निकलेगा। उन्हाेंने इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी से भी मुलाकात की। मलिकी ने भी उन्हें सुझाया कि इस संकट से केवल और केवल रजनी सर ही बाहर निकाल सकते हैं। भारत के साथ अच्छे रिश्तों की दुहाई देते हुए उन्हाेंने जॉन केरी से आग्रह किया कि वे खुद रजनीकांत से बात कर उन्हें इस कार्य के लिए राजी करें।
इसके बाद केरी ने तत्काल टेलीफोन पर रजनीकांत से बात की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि केरी ने उन्हें विश्व शांति का वास्ता देकर तत्काल इराक आने का आग्रह किया। इस पर रजनीकांत ने कहा कि इस छोटी-सी समस्या के लिए उन्हें इराक आने की जरूरत नहीं है। वे यहां चेन्नई से बैठकर ही इसका समाधान कर सकते हैं, लेकिन इस समय वे इससे भी बड़ी मुहिम में जुटे हुए हैं। उससे मुक्त होते ही वे आईएसआईएस को कुचल देंगे। हां, भारतीयों सहित अन्य तमाम बंधकों की रिहाई के लिए वे अपना क्लोन भेजने पर जरूर राजी हो गए हैं।
किस बड़ी मुहिम में जुटे हैं रजनी सर?
इराक संकट को सुलझाने से रजनीकांत के इनकार करने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर वे इतने व्यस्त कहां हैं? अंदरखाने सूत्रों से पता चला है कि वे इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आग्रह पर अच्छे दिन लाने की मुहिम में जुटे हुए हैं। रजनीकांत के बारे में उनके फैंस की धारणा है कि वे कोई भी कार्य चुटकियों में कर सकते हैं, लेकिन इस काम में उन्हें पसीना आ रहा है। उनके एक विरोधी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि अब थलाइवा को पता चलेगा आटे-दाल का भाव।

शुक्रवार, 20 जून 2014

14 सितंबर को मनाया जाएगा ‘इंग्लिश डे’, तमिलनाडु में तमिल दिवस

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha
नई दिल्ली। इस साल से अब देशभर में हर 14 सितंबर को ‘इंग्लिश डे’ मनाया जाएगा। इस आशय का एक सर्कुलर केंद्र सरकार शीघ्र ही जारी करने जा रही है। केंद्र ने यह कदम तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि की उस आपत्ति के मददेनजर उठाया है जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार हिंदी को बढ़ावा देकर अन्य भाषाओं की उपेक्षा कर रही है। 
प्रधानमंत्री कार्यालय में उच्च पदस्थ सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ‘इंग्लिश डे’ मनाने की विधिवत् घोषणा 14 सितंबर को ही नई दिल्ली में अायोजित एक कार्यक्रम में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। वे अपनी जिंदगी में पहली बार लिखा हुआ भाषण पढ़ेंगे क्योंकि यह अंग्रेजी में होगा। इस अवसर पर उन विशिष्ट लोगाें का सम्मान भी किया जाएगा जो अपनी मातृभाषा छोड़कर अंग्रेजी में बोलना पसंद करते हैं। ‘इंग्लिश डे’ के उपलक्ष्य में पूरे देशभर में इंग्लिश एसे कॉम्पीटिशन, इंग्लिश डिबैट कॉम्पीटिशन, इंग्लिश स्पीच कॉम्पीटिशन, इंग्लिश क्वीज जैसी कई प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी। सूत्र ने यह भी साफ कर दिया कि इस दिवस पर संबंधित राज्य चाहें तो अपना-अपना भाषा दिवस मना सकते हैं, जैसे तमिलनाडु में तमिल दिवस, कर्नाटक में कन्नड़ दिवस, महाराष्ट्र में मराठी दिवस इत्यादि। 
गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने गुुरुवार को हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने संबंधी एक निर्देश जारी किया था। इसके बाद से ही हाथ में मुद‌दा आने के कारण करुणानिधि काफी खुश नजर आ रहे थे। बाद में अपनी खुशी दबाते हुए पत्रकारों से बातचीत में केंद्र के इस रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हाेंने कहा था कि यह कदम गैर हिंदी भाषी लोगों को दोयम दर्जे की तरह समझने का है। इस आलोचना से हरकत में आई नरेंद्र मोदी सरकार ने बिजली से भी अधिक तेजी से कार्रवाई करते हुए ‘इंग्लिश डे’ मनाने का फैसला ले लिया। इसका आधिकारिक सर्कुलर एक-दो दिन में जारी हो जाएगा।

गुरुवार, 19 जून 2014

पैसा और समय बचाने फेसबुक पर होंगी कैबिनेट की बैठकें!

प्रयोग सफल रहा तो संसद की बहस भी सोशल मीडिया के माध्यम से हो सकेगी

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha

अब फेसबुक से चलेगी सरकार!
नई दिल्ली। सरकारी खर्चों में कटौती करने, कामकाज में तेजी लाने और सरकार को पेशेवर बनाने के मकसद से केंद्र की मोदी सरकार ने कैबिनेट की बैठकें फेसबुक पर करने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन कैबिनेट मंत्रियों को भी अपने फेसबुक अकाउंट खुलवाने के निर्देश दिए हैं, जिनके अब तक ऐसे अकाउंट नहीं हैं। हालांिक विपक्ष ने इसे केवल आईएसओ 9001 सर्टिफिकेट हासिल करने की सस्ती कवायद करार िदया है।
पीएमओ के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार मोदी कैबिनेट के कई मंत्री पहले से ही टि‌‌वटर और फेसबुक पर अपने फैसलांे की जानकारी देते आ रहे हैं। एेसे में प्रधानमंत्री का मत था कि क्यों न कैबिनेट की बैठकें ही सोशल मीडिया के माध्यम से कर ली जाएं। इसका एक फायदा तो यह होगा िक बैठकों में आने-आने और नाश्ता-पानी पर होने वाला खर्च बचेगा। दूसरा कैबिनेट के फैसलांे के बारे में तत्काल बैठे-बैठे ही आम जनता को अपडेट कर दिया जाएगा। इससे लोगों के बीच संदेश जाएगा कि सरकार काम कर रही है। 
संसदीय कार्यवाही पर ही दोहराएंगे प्रयोग! : सूत्रों का कहना है कि अगर कैबिनेट की बैठकों को लेकर यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे आगे संसद में होने वाली कार्यवाही पर भी दोहराया जा सकता है। इसके लिए सभी सांसद फेसबुक पर चैटिंग जैसे ऑप्शनों का इस्तेमाल कर बहस कर सकेंगे। इसके लिए फेसबुक से भी विशेष प्रावधान करने का आग्रह किया जा सकता है। हालांकि कोई भी फैसला लेने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाकर सर्वसम्मति ली जाएगी। माना जा रहा है िक कांग्रेस से आपत्ति आ सकती है, क्योंकि राहुल गांधी खुद फेसबुक फ्रेंडली नहीं हैं।
केवल आईएसओ 9001 सर्टिफिकेट हासिल करना मकसद : विपक्ष
विपक्षों दलांे ने मोदी सरकार की इस पहल को केवल आईएसओ 9001 सर्टिफिकेट हासिल करने की सस्ती कवायद करार िदया है। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार तेज काम करने का नाटक करना चाहती है और इसका मकसद केवल आईएसओ 9001 सर्टिफिकेट हासिल करना है। यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस इसका विरोध केवल इसलिए कर रही है क्योंकि राहुल गांधी फेसबुक फ्रेंडली नहीं हैं, राजीव ने इसका खंडन करते हुए कहा कि राहुलजी का अपना खुद का फेसबुक अकाउंट है। जैसे ही उन्हें फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट मिलेगी, वे उस पर एक्टिव हो जाएंगे।

बुधवार, 18 जून 2014

महंगाई के लिए मानसून को जिम्मेदार क्या ठहराया, बिफर पड़े इंद्र देव

जयजीत अकलेचा/Jayjeet Aklecha

देवलोक / नई दिल्ली
देवलोक में अपने अफसरों के बीच नाराज इंद्र। सौजन्य : लाइफ ओके
बारिश के देवता इंद्र ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर वित्त मंत्री अरुण जेटली के उस बयान पर गहरी निराशा जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि कमजोर मानसून के कारण देश में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
इंद्र ने अपने पत्र, जिसकी प्रति हमारे पास है, में लिखा है कि धरती पर सदियों से यह एक बहुत ही गलत परंपरा पड़ गई है कि किसी भी काम के लिए देवलोक में बैठे देवताओं को दोषी ठहरा दो। पिछले कुछ सालों से खासकर बारिश बरसाने से संबंधित मेरे कामकाज पर जो टिप्पणियां की गई हैं, वह काफी खेदजनक हैं। उन्होंने पूछा, महंगाई बढ़ने से लेकर केदारनाथ जैसे हादसों के लिए आखिर मैं कैसे जिम्मेदार हो गया? क्या धरती के लोगों का कोई जिम्मा नहीं बनता? सरकार का जिम्मा नहीं है? उन्होंने आगे लिखा,‘पिछली सरकारों से तो मुझे उम्मीद नहीं थी। लेकिन जब आपने सत्ता संभाली तो लगा कि अब कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी। हमें लगा कि अब हमारे भी अच्छे दिन आ जाएंगे, लेकिन आपके मंत्री के बयान ने निराश कर िदया है।’
इंद्र देवता के इस पत्र पर प्रधानमंत्री की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने सभी मंत्रियों से कहा है िक भविष्य में मानसून का उल्लेख करते समय भगवान इंद्र की भावनाअों का ख्याल जरूर रखें। उधर शाम को उन्होंने टेलीफोन पर इंद्र से इस मामले में बात की। बातचीत क्या हुई, इसका खुलासा नहीं हुआ, लेकिन इंद्र भवन के सूत्रों के अनुसार भगवान इंद्र ने भारतीय पीएम के साथ बातचीत पर संतोष जताया है।

मंगलवार, 17 जून 2014

शूमाकर की रिकवरी में भारतीय डॉक्टरों का “योगदान”!

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha


पेरिस। फॉर्मूला वन रेसर माइकल शूमाकर कोमा से बाहर आ गए हैं, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इसका पूरा श्रेय भारतीय डॉक्टरों को जाता है। कैसे, इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है। 
दरअसल, शूमाकर को गत 29 दिसंबर को स्कीइंग करते समय घातक चोट के बाद फ्रांस के ग्रेनोबेल स्थित जिस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, वह भारतीय डॉक्टराें के ही एक समूह का है। शूमाकर को भर्ती करवाते समय ही इन डॉक्टरों को लग गया था कि शूमाकर अब नहीं बचेंगे। एक या दो दिन के ही मेहमान हैं। अगर दूसरे डॉक्टर्स होते तो वे शूमाकर को घर ले जाने की सलाह देते। लेकिन इन भारतीयों डॉक्टरों ने अपनी योग्यतानुसार शूमाकर को कुछ दिन कोमा में बताकर अस्पताल के आईसीयू में रख दिया। डॉक्टरों के दिमाग में तो एक ही बात थी कि आईसीयू का एक दिन का चार्ज 800 डॉलर है। फिर कुछ दिन बाद उन्हें वेंिटलेटर पर रख दिया गया। चार्ज प्रति दिन 1200 डॉलर। हालांकि डॉक्टरों को मालूम था कि शूमाकर को बचाना नामुमकिन है, फिर भी वे उनके परिजनों को आश्वासन देते गए। एक सूत्र ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि चूंकि ये सभी भारतीय डॉक्टर सारे भारत से आए थे और इसलिए उन्हें पता था कि किसी मरीज के परिजनों को किस तरह इमोशनली ब्लैकमेल किया जा सकता है। उन्होंने वही किया। छह माह में सवा दस लाख डॉलर (करीब छह करोड़ रुपए) की वसूली के बाद जब डॉक्टरों से सोचा कि अब शूमाकर के परिजनों को दुखद खबर बताने का वक्त आ गया है तो उसी समय इस खिलाड़ी के शरीर में हरकत हुई और वे कोमा से बाहर आ गए। 
बाद में इन डॉक्टरों ने एक बुलेटिन जारी कर कहा कि हमारी दवा और शूमाकर के प्रशंसकों की दुआओं का ही नतीजा है कि वे आज कोमा से बाहर आ गए हैं। फ्रांसीसी मीडिया ने भी इन भारतीय डॉक्टरों की प्रशंसा करते हुए इन्हें भगवान करार दिया है। इस बीच, ग्रेनोबेल स्थित इस निजी अस्पताल का विस्तार करते हुए इसमें तीन नए आईसीयू बनाए जा रहे हैं। डॉक्टरों के स्टाॅफ में भी सात नए भारतीय डॉक्टरों को शामिल कर लिया गया है।

सोमवार, 16 जून 2014

आशुतोष गोवारिकर बनाएंगे आम आदमी पार्टी पर पीरियड फिल्म!

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha
खांसी ने बदली राजनीति की दिशा

मुंबई। लगान और जोधा-अकबर जैसी सफल पीरियड फिल्मों का निर्देशन करने वाले आशुतोष गोवारिकर जल्द ही आम आदमी पार्टी पर एक पीरियड फिल्म बनाने जा रहे हैं। यह फिल्म बताएगी कि कैसे खांसी और मफलर ने भारत नामक देश में राजनीति की पूरी दिशा ही बदल दी। इसमें जाने-माने समाजसेवी अन्ना हजारे कैमियो करने को राजी हो गए हैं। 

गोवारिकर के करीबी सूत्रों के अनुसार निर्देशक ने इस संबंध में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की और उनसे फिल्म निर्माण की अनुमति मांगी। अरविंद ने आम लोगों की राय के बाद ही इसकी अनुमति देने की बात कही। हालांकि पंद्रह मिनट के बाद ही उन्होंने करीब एक करोड़ लोगों से बातचीत और उनके एसएमएस के आधार पर फिल्म निर्माण की मंजूरी दे दी। यह फिल्म मूलतः अरविंद केजरीवाल की खांसी और उनके मफलर पर केंद्रित रहेगी। 

गोवारिकर की गिनती ऐसे निर्देशकों में होती है, जो अपनी फिल्मों के एक-एक दृश्य को बहुत ही बारीकी से बुनते हैं। इसलिए उन्होंने खांसी के अध्ययन के लिए डाॅक्टरों की एक विशेष टीम हायर की है। यह टीम बताएगी कि फिल्म का मुख्य पात्र किस तरह खांसता था और उसी के अनुरूप फिल्मांकन किया जाएगा। इसी तरह उस मफलर की तलाश के लिए गोवारिकर ने एक टीम विदेशों में भिजवाई है जो अरविंद इस्तेमाल करते थे। अरविंद ने यह कहकर अपना मफलर देने से इनकार कर दिया कि फिलहाल उनके जीवन में इसकी कोई अहमियत नहीं है।   

कौन निभाएगा मुख्य किरदार? मुख्य किरदार निभाने के लिए गोवारिकर शीघ्र ही देश के प्रमुख टीबी हाॅस्पिटलों में जाकर काॅस्टिंग और आॅडिशन करेंगे। उन्हें उम्मीद है कि वहां ऐसा कोई व्यक्ति जरूर मिल जाएगा जिसे ‘आम आदमी पार्टी’ फिल्म में मुख्य किरदार का रोल दिया जा सके। गोवारिकर के एक अनुभवी क्रू मेंबर ने बताया, ‘हमने अरविंद केजरीवाल की खांसी का गहन अध्ययन किया है। वे जब खांसते हैं तो लगता ही नहीं है कि कोई ड्रामा या एक्टिंग कर रहे हैं। बिल्कुल रियल खांसी। हम इस रोल के लिए किसी ऐसे ही शख्स की तलाश में हैं जो आम आदमी जैसा लगे और उसकी खांसी भी नेचुरल हो।’ अन्ना हजारे द्वारा कैमियो रोल करने की संभावना है, हालांकि अन्ना ने इसकी पुष्टि नहीं की है।  




रविवार, 15 जून 2014

फीफा विश्वकप में गेस्ट अपीयरेंस के रूप में जाएगी भारतीय फुटबाॅल टीम

- जाॅन अब्राहम हो सकते हैं कप्तान। धोनी, शाहरुख व आमिर से भी प्रदर्शन करने की उम्मीद

 

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha
जाॅन ने प्रैक्टिस शुरू की।

रियो डी जेनेरियो/नई दिल्ली। भारतीय फुटबाॅल प्रशंसकों के लिए एक अच्छी खबर है। फुटबाॅल वल्र्डकप में भारत गेस्ट अपीयरेंस टीम के रूप में खेलेगा। भारत में फुटबाॅल के प्रति भारी दीवानगी और इससे भी ज्यादा, बड़े बाजार के मद्देनजर फुटबाॅल की शीर्ष संस्था फीफा ने टूर्नामेंट के दौरान भारत की भी उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए भारत से फिल्म स्टार जाॅन अब्राहम के नेतृत्व में एक टीम शीघ्र ही ब्राजील भेजी जा सकती है।
फीफा के सूत्रों के अनुसार जिस तरह से आज भारतीय युवा अपना काम-धंधा छोड़कर रात काली कर रहा है और गैर टीमों के लिए दीवाना हुआ जा रहा है, उसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस संबंध में आॅल इंडिया फुटबाॅल फेडरेशन को सूचित कर दिया गया है।
इधर, फेडरेशन ने इस बात की पुष्टि की है कि उसे फीफा के निर्णय की सूचना मिल चुकी है। लेकिन उसकी समस्या यह है कि इतनी जल्दी खिलाड़ियों को कैसे जुटाया जाए। राष्ट्रीय टीम के कई खिलाड़ी अलग-अलग काम-धंधों में अलग-अलग शहरों में लगे हुए हैं। समर वैकेशन होने के कारण इस समय उन्हें रेलवे रिजर्वेशन भी मिलना मुश्किल होगा। इसलिए दिल्ली में एकत्र होकर एक साथ रियो जाने में दिक्कत आ सकती है। समस्या यह भी है कि फेडरेशन के अधिकारियों के पास कई खिलाड़ियो के कान्टैक्ट नंबर भी नहीं हैं। इसके अलावा पासपोर्ट की भी दिक्कत हो सकती है। फेडरेशन को अभी इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि कितने राष्ट्रीय खिलाड़ियों के पास पासपोर्ट हैं और कितनों के पास नहीं।
जाॅन अब्राहम आगे आए: फेडरेशन की इस दिक्कत को दूर करने के लिए जाॅन अब्राहम ने पहल की है। उन्होंने कहा है कि वे बाॅलीवुड के ऐसे कई लोगों को जानते हैं जिनकी फुटबाॅल में दिलचस्पी है। उनके पास पासपोर्ट भी हैं। उन्हें प्रदर्शन करने का शौक भी है। ये लोग वहां भारतीय फुटबाॅल टीम का प्रतिनिधित्व कर सकते/सकती हैं। अब्राहम ने तो यहां तक कहा कि वे महेंद्र सिंह धोनी को गोलकीपिंग के लिए राजी कर लेंगे। उन्होंने कहा कि ‘चक दे इंडिया’ में शाहरुख खान और ‘लगान’ में आमिर खान ने भी अच्छे खेल का प्रदर्शन किया था। उन्हें उम्मीद है कि देशहित में ये भी खेल प्रदर्शन को तैयार हो जाएंगे और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करेंगे।
इस बीच, वेटरन स्टार अनिल कपूर ने एक ट्वीट करके कहा है कि उन्होंने फिल्म ‘साहेब’ में फुटबाॅलर का रोल निभाया था। इसलिए उन्हें भी भारतीय फुटबाॅल टीम की ओर से प्रदर्शन करने में खुशी होगी।

सेंसर बोर्ड ने ‘मछली जल की रानी है’ को चिल्ड्रन्स फिल्म की कैटेगरी में डाला


जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha

मुंबई। केंद्रीय सेंसर बोर्ड ने अपने एक अहम फैसले में ‘मछली जल की रानी है’ फिल्म के लिए नई कैटेगरी बनाते हुए उसे ‘यू यू’ सर्टिफिकेट दिया है। फिल्म की मीडिया में छपी समीक्षाओं के बाद सेंसर बोर्ड के सदस्यों ने इसे देखा और पाया कि यह फिल्म केवल पांच से दस साल की उम्र तक के छोटे बच्चों को ही डरा सकती है। इसलिए उसे बच्चों की हाॅरर कैटेगरी की फिल्म में रखा जाना चाहिए। इसी वजह से एक नई कैटेगरी भी बनानी पड़ी है।
सेंसर बोर्ड के एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले बोर्ड ने केवल फिल्म के पोस्टर ही देखे थे और उसके आधार पर उसे डरावनी मानकर ‘ए’ (केवल वयस्कों के लिए) सर्टिफिकेट जारी कर दिया। लेकिन बाद में बोर्ड के सदस्यों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने शनिवार रात को इस फिल्म को देखा। बोर्ड के अधिकांश सदस्यों का मानना था कि फिल्म इतनी बच्चों जैसी है कि इससे शायद आजकल के बड़े बच्चे भी नहीं डरेंगे। ये बच्चे इससे ज्यादा भयावह दृश्य वीडियो गेम्स में देख लेते हैं। इसलिए इसे डबल यू कैटेगरी में रखकर पांच से दस साल की उम्र तक के बच्चों के देखने के लिए अनुशंसित किया गया है। बोर्ड के सदस्यों के अनुसार इससे फिल्म निर्माताओं को भी राहत मिलेगी, क्योंकि इससे उन्हें कुछ ऐसे दर्शक मिल जाएंगे जिन्हें फिल्म देखते समय थोड़ा डर लगेे। बोर्ड के एक सदस्य के इस सुझाव को खारिज कर दिया गया कि फिल्म की शुरुआत में ‘मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है’ गाना डालना चाहिए ताकि अभिभावक बच्चों को फिल्म दिखाने के लिए प्रेरित हो सकें। बोर्ड के अनुसार इस गाने को डालने से फिल्म पीरियड कैटेगरी में चली जाएगी।

शनिवार, 14 जून 2014

पाकिस्तान ने सीमा पर की भारी फूलबारी

- रिहाइशी इलाकों में कमल के फूल गिरने से कई नागरिकों के इमोशनली हताहत होने की खबर
- पाकिस्तान सेना ने इस घटना के दिए इंटरनल जांच के आदेश

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha
भारतीय सेना द्वारा बरामद असला।

जम्मू। पाकिस्तान ने शनिवार सुबह एक बार फिर सीजफायर का उल्लंघन किया, लेकिन सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक उस समय आश्चर्यचकित रह गए, जब उन्हें अपनी ओर फूल आते हुए दिखे। कश्मीर के रजौरी, पुंछ और मेंढर सेक्टरों में करीब तीन घंटे तक फूलबारी चलती रही। इस घटना से परेशान पाकिस्तान सेना ने मामले की इंटरनल जांच के आदेश दे दिए हैं।
सुबह सात बजे शुरू हुई यह फूलबारी दस बजे तक चलती रही। दिन में भी छिटपुट फूल इधर-उधर गिरते रहे। कमल के कई फूल रिहाइशी इलाकों मेें भी गिरे हैं, जिनसे कुछ नागरिकों के इमोशनली हताहत होने की खबर है। भारतीय सेना ने भी इस फूलबारी का जमकर जवाब दिया और चमेली व गुलाब के फूल बरसाए।
दोनों देशों के राजनयिक गलियारों में इस बात पर चर्चा है कि आखिर पाकिस्तान की तरफ से दो दिन से चल रही गोलीबारी अचानक फूलबारी में कैसे बदल गई। राजयनिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शुक्रवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना मुख्यालय के वाॅर रूम में जाकर हालात का जायजा लिया था। इसी से पाकिस्तान को डर लगा होगा और उसने अपना पैंतरा बदल डाला। हालांकि आगे भी ऐसा चलेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वहां के अतिवादी तत्व इस फूलबारी पर कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।
नवाज के लोगों ने हथियारों में डाले फूल!
इधर, पाकिस्तान के एक निजी टीवी चैनल ने यह सनसनीखेज खुलासा करके मामले को सियासी तूल दे दिया है कि भारत के साथ संबंध सुधारने की बदनियत से वजीरे-आजम नवाज शरीफ ने ही अपने कुछ खास लोगों की मदद से सीमा पर तैनात पाकिस्तानी सैनिकों की बंदूकों और मोर्टार में गोला-बारूद के स्थान पर फूल भरवा दिए थे। इसमें भी कमल के फूल ज्यादा थे, ताकि वे जहां भी गिरे तो अधिक से अधिक लोगों को इमोशनली हताहत कर सकें। इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए आतंकी सरगना और जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद ने इसे पाकिस्तानी अवाम के साथ गद्दारी करार दिया है। हालांकि वहां के अमन-पसंद तबकों में इसकी अच्छी प्रतिक्रिया आई है। ‘अमन का पैगाम’ नामक संगठन के अध्यक्ष डाॅ जमालउद्दुीन ने कहा, ‘अगर यह काम नवाज शरीफ ने किया है तो हमें इसकी सराहना करनी चाहिए। मुझे तो आश्चर्य इस बात का हो रहा है कि आखिर शरीफ साहब में इतनी हिम्मत कहां से आ गई। जो भी हुआ, अच्छा संकेत है।’ 
इस मामले में शरीफ सरकार के प्रवक्ता ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। उधर, पाकिस्तानी सेना के अधिकारी इस पूरे मामले की इंटरनल जांच में लग गए हैं।

शुक्रवार, 13 जून 2014

एक यूपीएससी रैंकर का बेलाग इंटरव्यू


जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha


संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) के रिजल्ट की घोषणा के तत्काल बाद हमने कुछ टाॅपर्स से बात की। इनमें से उच्च रैंक पाने वाले एक परीक्षार्थी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर दिया बेलाग इंटरव्यू। पेश हैं उसके मुख्य अंश:
सवाल: इस परीक्षा में बेहतरीन रैंक हासिल कर कैसा लग रहा है?
जवाब: बहुत अच्छा लग रहा है। मैं अपने सपने को पूरा करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ गया हूं।
सवाल: कैसा सपना?
जवाब: जी, मेरा सपना है कि जैसे मेरे पूर्वजों ने इस देश को लूटा है, मैं भी उसमें अपना योगदान दे सकूं। भ्रष्टाचार करने में मैं नया कीर्तिमान बनाना चाहता हूं।
सवाल: अपने सपने को पूरा करने के लिए क्या कोई फ्रेमवर्क है?
जवाब: जी, अभी तो शुरुआत है। ट्रेनिंग के बाद पहली पोस्टिंग का इंतजार करूंगा, फिर कोई प्लान बनाउंगा। हां, लेकिन चूंकि मेरे अपने परिवार में कई लोग सरकारी पदों पर रहे हैं। इसलिए उनकी ट्रेनिंग काफी मायने रहेगी और मुझे उम्मीद है कि अपने बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से मैं अपनी आने वाली सात पुश्तों के लिए काफी कुछ जोड़ सकूंगा।
सवाल: आपके इरादे तो काफी नेक हैं। लेकिन हम यहां डरते-डरते एक सवाल करना चाहेंगे। क्या आपको इस बात का डर नहीं लगता है कि अगर आप भ्रष्टाचार करते हुए पकड़े गए तो आपका क्या होगा?
जवाब (हंसते हुए): आप भी कैसी बच्चों जैसी बात करते हैं। इस देश में नेताओं के बाद अधिकांश भ्रष्टाचार बड़े अफसर करते हैं। वे पकड़े तो जाते हैं, लेकिन कुछेक मामलों को छोड़ दे तो उनमें से कितने जेल गए! मैं आज ही अखबार में पढ़ रहा था कि मप्र में भ्रष्टाचार के आरोपी जोशी दंपती जल्दी ही रिटायर हो जाएंगे। फिर क्या होगा? कुछ नहीं ना!
सवाल: जब देश के क्रीम लोग ही भ्रष्टाचार करेंगे तो आम आदमी का क्या होगा?
जवाब: इस सवाल के जवाब में मेरा आपसे ही एक सवाल है। अगर क्रीम लोग भ्रष्टाचार नहीं करेंगे तो कौन करेगा? क्या आम और सामान्य बुद्धि वाले व्यक्ति में इतना कौशल व दम है? फिर देश का क्या होगा?
सवाल: आप जैसे कई चयनित उम्मीदवार पहले ही प्राइवेट सेक्टर में अच्छी नौकरी कर रहे हैं। खूब कमा रहे हैं और ईमानदारी से कमा रहे हैं। तो फिर आईएएस अधिकारी ही क्यों बनना चाहते हैं?
जवाब: अगर आप मेरा नाम छापते तो मैं कहता कि मैं देशसेवा और आम लोगों की सेवा के लिए आईएएस अधिकारी बनना चाहता हूं। देश में बहुत गरीबी हैं, गरीबों का कल्याण इसी सेवा के माध्यम से हो सकता हूं। चूंकि आपने नाम न छापने की गारंटी दी है। इसलिए अपने दिल की बात करता हूं। यह ऐसी सर्विस है, जिसमें रहकर आपको वही सुखद एहसास होता है जैसा कभी दशकों पहले ब्रिटेन के गोरे शासकों को होता होगा। इसमें हमें खुद को राजा होने और आम लोगों के प्रजा होने का एहसास होता है। यह सबसे बड़ा एहसास है। आप जैसे लोग इसे महसूस भी नहीं कर सकते।
सवाल: तो क्या मान लें कि देश में अब कोई भी ईमानदार अफसर नहीं है? देश ईमानदार अफसरों के कलंक से मुक्त हो गया है?
जवाब: यह बेहद दुर्भाग्य की बात है कि अभी भी मुठ्ठीभर ऐसे नालायक ईमानदार अफसर हैं, जो केवल देश की सोचते हैं। मुझे आशंका है कि मेरे साथ की बैच में भी कुछ ऐसे अफसर जरूर होंगे। हमें इनसे जल्दी ही मुक्त होना होगा।

न रहेगा पेड़, न लटकेगी लाश

उप्र सरकार ने राज्य के सभी ग्रामीण अंचलों में पेड़ों को काटने के दिए निर्देश


जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha
वाट अ आइडिया सरजी!

लखनऊ। उत्तरप्रदेश में युवतियों व छात्राओं के साथ दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या कर शव को पेड़ों से लटकाने की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर अखिलेश सरकार ने ग्रामीण अंचलों से सभी पेड़ों का सफाया करने का निर्देश जारी कर दिया है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इससे प्रदेश में हो रही ऐसी नृृशंस घटनाओं में कमी आएगी।
मुख्यमंत्री ने यह फैसला गुरुवार रात को नई दिल्ली से लौटने के बाद तब लिया जब उन्हें बताया गया कि मुरादाबाद जिले के एक गांव में भी एक छात्रा से रेप पर उसका शव पेड़ से लटका दिया गया। पिछले दस दिन में यह ऐसी छठी घटना है, जिसमें किसी युवती का शव पेड़ से लटका मिला है। अभी केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही पेड़ काटे जाएंगे, क्योंकि सभी घटनाएं वहीं हुई हैं। लेकिन अगर ऐसी घटनाओं का विस्तार शहरों में भी होता है तो सरकार वहां भी कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
कवि अफसर की कल्पना: सूत्रों ने बताया कि पेड़ काटने का आइडिया मुख्यमंत्री को राज्य के एक आला अफसर ने दिया। ये अफसर हिंदी के बड़े विद्वान हैं और कवि होने के नाते स्वयं को कोमल हृदय का मानते हैं। इस अफसर ने ‘न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी’ की तर्ज पर मुख्यमंत्री को इस बात के लिए कन्विंस कर लिया कि अगर राज्य में पेड़ ही नहीं रहेंगे तो ऐसी घटनाएं भी नहीं होंगी। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री को पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ कि राज्य में इतने काबिल अफसर भी हैं। उन्होंने इस अफसर को पुरस्कारस्वरूप आउट आॅफ टर्न प्रमोशन देने के साथ-साथ एक हफ्ते के लिए छुट्टियां बिताने ब्राजील भेज दिया है। वे वहां फुटबाॅल मैचों के साथ सांभा डांस का लुत्फ उठा सकेंगे।