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सोमवार, 21 दिसंबर 2020

Satire 1 Minute Video : सर्दी के मौसम में देश के काम आएंगे ये बड़े-बड़े नेता...जानिए कैसे?




By A. Jayjeet

पुणे। देश में शीतलहर के बढ़ते प्रकाेप का सामना करने के लिए मौसम विभाग ने प्रभावित इलाकों में ओवेसी और गिरिराज सिंह की CDs बंटवाने का फैसला किया है।

मौसम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया- “ये दोनों जहां भी मुंह फाड़ते हैं, उस पूरे क्षेत्र में माहौल गर्म हो जाता है। इसी के मद्देनजर हमने इनकी CDs खरीदने का फैसला किया है। हम इन CDs को शीतलहर से प्रभावित इलाकों में घर-घर बंटवा देंगे। हमारे आकलन के अनुसार ये CDs भी वही काम करेंगी, जो एक हीटर करता है।”

उन्होंने बताया कि जहां ठंड से ज्यादा ही नुकसान होने की खबर मिलेगी, वहां हम इनके वीडियो भाषण दिखाएंगे। इसके लिए विभाग ने थोक में DVDs भी खरीदने के आदेश दे दिए हैं।

ओवेसी और गिरिराज सिंह ने स्वागत किया :

मौसम विभाग की इस अनूठी पहल का ओवेसी और गिरिराज सिंह ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इस सामाजिक-राष्ट्रीय कार्य में योगदान देकर वे गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इन दोनों ने मौसम विभाग से यह भी कहा है कि अगर ज्यादा ही गर्मी की आवश्यकता हो तो वे राष्ट्रहित में प्रत्यक्ष भाषण देने के लिए भी हरदम तैयार रहेंगे।

गर्मी से बचाव के लिए मनमोहन सिंह के पोस्टर छपवाए जाएंगे :

इस बीच, मौसम विभाग ने अगले साल भारी गर्मी की आशंका को देखते हुए इससे निपटने की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है। इसके तहत मनमोहन सिंह के लाखों पोस्टर छपवाए जा रहे हैं। गर्मी के दिनों में लू-लपट वाले इलाकों में ये पोस्टर चिपकवाकर थोड़ी ठंडक पहुंचाई जाएगी।

विभाग के एक अधिकारी के अनुसार पहले मनमोहन सिंहजी के बयानों की भी CDs खरीदने का विचार था, लेकिन इस आधार पर इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया कि जब कुछ सुनाई ही नहीं देगा तो फिर सीडीज पर धनराशि बर्बाद करने का कोई मतलब नहीं है।

संबंधित वीडियो देखने के लिए क्लिक करें यहां

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ राजनीतिक कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं। )






सोमवार, 7 दिसंबर 2020

Exclusive : कोरोना की जिंदगी में भी शुरू हुआ स्यापा!


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By Jayjeet

कोरोना ने हम सब लोगों की जिंदगी में तूफान मचा रखा है, लेकिन देवउठनी एकादशी के बाद से अब यह तूफान कोरोना (corona) की जिंदगी में उठ रहा है। वजह - उसने कोरोनी से शादी जो कर ली। कोरोना की जिंदगी में क्या स्यापा चल रहा है, आइए सुनते हैं कोरोना और उसकी धर्मपत्नी यानी कोरोनी की यह बातचीत। बहुत ही गोपनीय ढंग से रिकॉर्ड की गई इस बातचीत की एक्सक्लूसिव सीडी केवल हमारे पास ही है :

कोरोना : हे कोरोनी, तुमने ये इतना बड़ा-सा घुंघट क्यों डाल रखा है?

कोरोनी : आपसे हमें संक्रमण ना हो जाए, इसी खातिर...

कोरोना : अरे, जबसे तुमसे शादी हुई है, तबसे हममें संक्रमित करने की ना तो इतनी ताकत बची, ना इतना समय..

कोरोनी : तो इसमें हमें काहे दोष देते हों? हमने ऐसा क्या किया?

कोरोना : क्या किया? सुबह से ही बिस्तर पर बैठे-बेठे ऑर्डर देने लगती हो, चाय बनी क्या? नाश्ता बना क्या? चाय-नाश्ता बनाकर फारिग होता ही हूं कि आलू-प्याज की रट लगा देती हो। बस, थैला उठाए आलू-प्याज और सब्जी लेने निकल जाता हूं। लोगों को संक्रमित क्या खाक करुं?

कोरोनी : देखिए जी, अब ये तो ज्यादा हो रही है... अरे और दूसरे हस्बैंड लोग भी तो हैं। वे अपने पड़ोस में शर्माजी को ही देखो..

कोरोना : शर्माजी, कौन शर्माजी?

कोरोनी : वही शर्माजी, जिनको तुमने हमारी इन्गेजमेंट के दिन ही संक्रमित किया था, भूल गए क्या? देखो उनको भी तो, कैसे बीवी के इशारों पर नाचते हैं, पर बॉस की भी पूरी हाजिरी लगाते हैं। ऐसे एक नहीं, कई लोग हैं जो बीवी और बॉस दोनों की चाकरी पूरे तन-मन से करते हैं और मुंह से उफ्फ तक नहीं निकलाते। और एक तुम हो कि बीवी जरा-से काम क्या बताती, उसी में चाइना वाली नानी याद आने लगती है.... काम धाम कुछ नहीं, शो-बाजी तो पूछो मत...

कोरोना (गुस्से में) : क्या काम-धाम ना करता हूं, बताओ‌ तो जरा? सुबह उठकर चाय-नाश्ता तैयार मैं करता हूं, सब्जी-वब्जी मैं लाता हूं। दोनों टाइम के बर्तन मैं साफ करता हूं। तंग आ गया मैं तो ... घर-गृहस्थी के चक्कर में अपना असली काम ही भूल गया... देखो, कैसे लोग बिंदास बगैर मास्क लगाए घूम रहे हैं, जैसे मुझे चिढ़ा रहे हों कि आ कोरोना आ... पर अब ताकत ही ना बची ...

कोरोनी (मामले को शांत करते हुए) : अरे जानू, तुम तो नाराज हो गए। अच्छा, चलो आज डिनर में खिचड़ी मैं बना दूंगी। .... और सुनो जी, गांधी हॉल में साड़ी की सेल शुरू हुई है। उसमें हजार-हजार की साड़ी पांच-पांच सौ में मिल रही है। चलो ना वहां, तुम्हारा भी मूड फ्रेश हो जाएगा...

कोरोना (सीने में हाथ रखते हुए) : हे भगवान, क्यों सेल का नाम लेकर मेरा बीपी बढ़ा रही हो? उधर, वैक्सीन अलग आ रही है। मेरे लिए तो जिंदगी में टेंशन ही टेंशन है...

कोरोनी : हाय दैया, ये वैक्सीन कौन हैं? हमारी सौत है क्या?

कोराना : अरे, हम थोड़ी ला रहे हैं। सरकार ला रही हैं। हमें नाकारा बनाने के लिए...और ये कोई सौत-वौत नहीं है, ये तो...

कोरोनी (बीच में ही बात काटते हुए) : हम सरकार से कह देंगे कि कोनो वैक्सीन-फैक्सीन को लाने की जरूरत नहीं है। हम कम है क्या? .. अब टेंशन छोड़ो और तैयार हो जाओ, नहीं तो वो सेल में अच्छी-अच्छी साड़ियां खतम हो जाएगी...

और कोरोना 'जी जी' करते हुआ तैयार हुआ और कंधे झुकाए निकल पड़ा बाइक स्टार्ट करने ...

रविवार, 29 नवंबर 2020

Humour & Satire : वैक्सीन से नहीं, किसी और चीज से होगा कोरोना का इलाज !


 

Humour Desk. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना की वैक्सीन के विकास की जानकारी हासिल करने के मकसद से तीन लैब्स का दौरा किया, लेकिन वहां वे यह जानकर दंग रह गए कि वैक्सीन तो नहीं बन रही, बल्कि बगैर वैक्सीन के ही कोरोना को ठिकाने लगाने की तैयारी की जा रही है...कैसे, जानने के लिए देखें यह फनी वीडियो। 

(Disclaimer : This video is work of fiction and fun. Viewers are advised not to confuse about the content in the video as being true.)



बुधवार, 25 नवंबर 2020

Satire & Humour : कोरोना को नाकारा करने की प्लानिंग, लैब में तैयार हो रही है सुशील-सुंदर कोरोनी

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By Jayjeet

Humour Desk . नई दिल्ली/पुणे। देवउठनी एकादशी का इंतजार खत्म होने के साथ ही कोरोना की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है। किसी शुभ मुहूर्त में कोराना को 'नाकारा' करने की प्लानिंग की जा रही है। इसके लिए निपुण, सुंदर व सुशील कोरोनी के विकास का काम लैब में जारी है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय में पदस्थ एक सूत्र ने बताया कि पिछले कई दिनों से हमें वैक्सीन से भी ज्यादा देवउठनी एकादशी का इंतजार था। उन्होंने यह खुलासा भी किया कि किसी भी लैब में कोई वैक्सीन वगैरह नहीं बन रही है। ये केवल कोरोना को भरमाने के लिए अफवाह भर हैं। बल्कि हर लैब अपने-अपने स्तर पर सुंदर व सुशील कोरोनी का विकास कर रही है। इसमें सबसे आगे भारत का सीरम इंस्टीट्यूम ऑफ इंडिया है।

तीसरे चरण की टेस्टिंग जारी : 

सीरम इंस्टीट्यूम ऑफ इंडिया के CEO अदार जूनावाला ने बताया कि उनके यहां जिस कोरोनी का विकास किया जा रहा है, उसके तीसरे चरण में रसोईघर की टेस्टिंग चल रही है। इस चरण में इस बात का परीक्षण किया जा रहा है कि कोरोनी कितनी खूबी से अपने होने वाले पति से बर्तन मंजवाने से लेकर सुबह की चाय-नाश्ता वगैरह तैयार करवा सकती है। अब तक के नतीजे उत्साहवर्धक रहे हैं। इससे पूर्व पहले चरण में कोरोनी का इस बात के लिए टेस्ट किया गया था कि वह कोरोना से फोन पर मिमियाने वाली आवाज में जी-जी निकलवा पाती है या नहीं। दूसरे चरण में इस बात की टेस्टिंग की गई थी कि साड़ी वगैरह की सेल की खबर से वह कोरोना का बीपी कितना बढ़ा पाती है। दोनों चरण में सफलता मिलने के बाद तीसरे चरण की टेस्टिंग जारी है। शुभ मुहूर्त खत्म होने से पहले ही हम भारतीय परिवेश के अनुकूल सुंदर व सुशील कोरोनी भारत सरकार को सौंप देंगे। उम्मीद है कि कोरोना की शादी के बाद उसकी बची-खुची ताकत भी खत्म हो जाएगी। इस तरह corona पूरी तरह से नाकारा हो जाएगा।

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सोमवार, 20 जुलाई 2020

Funny Interview : पौधे की पीड़ा...पौधरोपण की तस्वीर में बस हम ही ना होते!


plant पौधरोपण पौधा

By Jayjeet

कोने में रखी काली थैलियों में पौधे पड़े-पड़े मुस्करा रहे थे। रिपोर्टर भी मुस्कुराया। शिकार मिल गया था। तुरंत इंटरव्यू के लिए एक पौधे से रिक्वेस्ट की। पहले तो बिजी होने का बहाना मारा, फिर राजी हो गया। पेश है बातचीत के खास अंश :

रिपोर्टर : बड़े मुस्कुरा रहे हों? कोई अच्छी वजह?
पौधा : आप लोगों के अच्छे दिन आए या न आए, हमारे तो आ गए महाराज। मानसून जो आ गया। अब हर जगह हमारी पूछ-परख बढ़ गई है। रोज अखबार में तस्वीर छपती है।

रिपोर्टर : अच्छा, इस समय तो आपको लोग खूब हाथों-हाथ ले रहे हैं।
पौधा : हां, बताया तो सही कि खूब अखबार में छप रहे हैं। पर कभी-कभी क्या होता है कि हमारे सामने इतने लोग आ जाते हैं कि जब अगले दिन अखबार में तस्वीर छपती है तो उसमें बस मैं ही नहीं होता।

रिपोर्टर : कौन-सी प्रजाति के हैं आप?
पौधा : ये जाति-वाति का रोग तो हमारे यहां मत फैलाओ। हम किसी भी जाति के हो, धर्म एक है वातावरण को खुशगवार बनाना, न कि तनाव पैदा करना, जैसे धर्म के नाम पर तुम्हारे यहां होता है।

रिपोर्टर : चलिए, प्रजाति-वजाति छोड़ते हैं। फल तो लगेंगे ना आपमें?
पौधा : फिर इंसानों टाइप की ओछी बात कर दी ना आपने। हम फलों की चिंता भी नहीं करते। आप ही लोग करते हों। देख लो ना, कैसे राजस्थान में आपके नेता लोग ‘फल’ की जुगाड़ में इधर से उधर हो रहे हैं।

रिपोर्टर : बस आखिरी सवाल।
पौधा : अब भैया बस करो। उधर नेताजी और उनके छर्रे आ गए हैं। फोटोग्राफर इशारा कर रहा है। मैं चलता हूं। नमस्कार
#satire #Humor

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गुरुवार, 2 जुलाई 2020

जमीन का जवाब जमीन से : सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा को चीन में दिया फ्रीहैंड

चीन जाने की तैयारी करते हुए रॉबर्ट वाड्रा।

By Jayjeet

हिंदी सटायर/ग्लोबल टाइम्स। मोदी सरकार ने ‘जमीन का जवाब जमीन से’ देने की योजना के तहत रॉबर्ट वाड्रा को चीन में फ्रीहैंड देने का निर्णय लिया है। भारत के इस फैसले से चीन के सत्ता के गलियारों में भारी खलबली मच गई है। प्रमुख चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार इससे भयभीत चीन ने प्रस्ताव दिया है कि अगर भारत वाड्रा को हमारी सीमाओ से दूर रखे वह पूरा अक्साई चीन भारत को लौटाने को तैयार है।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय ने अपने एक सीक्रेट कम्युनिकेशन में चीन को धमकाया था कि अगर वह जमीन हड़पने की अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो राबर्ट वाड्रा को चीन भिजवाकर वहां उन्हें फ्रीहैंड दे दिया जाएगा। इस धमकी से भयभीत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आनन-फानन में अपने वरिष्ठ लीडर्स और सेना के आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय मीटिंग की। इस मीटिंग में सहमति बनी कि अक्साई चीन की कुछ हजार वर्ग किमी जमीन के चक्कर में पूरे चीन को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। चीनी सूत्रों के अनुसार चीन ने प्रस्ताव रखा है कि हम भारत को उसके कब्जे वाला पूरा क्षेत्र लौटा देंगे और फिर आइंदा उसकी तरफ तिरछी नजर से भी ना देखेंगे। बस भारत को वाड्रा को चीन की सीमा से एक हजार किमी दूर रखना होगा।

अब चीन को समझ में आएंगे दामादजी के असली मायने :

सरकार के इस निर्णय का वाड्रा ने भी स्वागत किया है। उन्होंने ट्विट करते हुए कहा- “मेरे लिए इससे बड़े गर्व की बात और क्या होगी कि मैं देश के काम आ सकूं। अब चीन को पता चलेगा कि दामादजी का असली मतलब क्या होता है।”

(Disclaimer : यह खबर शुद्ध कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और राजनीतिक कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)

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Satire & Humour : जब बाबा रामदेव को नोबेल पुरस्कार मिलते-मिलते रह गया! क्यों और कैसे? एक सच्ची कहानी!



By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। पतंजलि द्वारा कोराना की दवा ‘कोरोनिल’ बनाने के दावे के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उन्हें नोबेल पुरस्कार देने की वकालत कर रहे हैं, कुछ मजाक में तो कुछ सच्ची में। हिंदी सटायर को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार बाबा रामदेव तो पिछली बार ही इस अवार्ड के लिए प्रबल दावेदार थे। लेकिन उन्हें अवार्ड मिलते-मिलते रह गया। दरअसल, इसका खुलासा तब हुआ, जब हमारा उत्साही रिपोर्टर इस संबंध में बात करने के लिए नोबेल कमेटी के पास पहुंच गया। वहां बैठे एक सूत्र से बात की तो उसने तफ्सील से पूरी जानकारी दी।

रिपोर्टर : बाबाजी ने कोरोना की दवा ‘कोरोनिल’ बना ली है। अब तो चिकित्सा का नोबेल उन्हें मिल ही जाना चाहिए।

नोबेल कमेटी का सूत्र :  अरे आपको नहीं मालूम, नोबेल तो उन्हें पिछले साल ही मिल जाता, पर एक लोचा हो लिया।

रिपोर्टर : ऐसा कौन-सा लोचा हो लिया?

सूत्र : अब क्या बताएं। बाबा रामदेव जी ने खुद को चार-चार कैटेगरी में नॉमिनेट करवा लिया था।

रिपोर्टर : अरे, कैसे? और ये चार कौन-सी कैटेगरी हैं?

सूत्र : एक, चिकित्सा के लिए।

रिपोर्टर : हां, इसमें तो बहुत टॉप का काम कर रहे हैं अपने बाबाजह। इसमें तो मिलना ही था। पर दूसरी कैटेगरी में और कहां टांग घुसा ली इन्होंने?

सूत्र : यही तो प्रॉब्लम हो गई। उन्हें मुगालता हो गया कि 5 रुपए से कारोबार को बढ़ाकर 5 हजार करोड़ का कर लिया तो इकोनॉमी के लिए अवार्ड मिलना चाहिए।

रिपोर्टर : अच्छा! इसके अलावा?

सूत्र : आपको याद होगा कि बाबाजी ने एक बार ‘ओम शांति ओम’ शो में भी काम किया था। तो उन्होंने पीस के लिए भी अप्लाई कर दिया। इतना ही नहीं, किसी ने बाबा को कह दिया कि आप तो केमिस्ट्री में भी माहिर हैं- योग एंड पॉलिटिक्स की केमिस्ट्री। बस, बाबाजी ने यहां भी टांग घुसेड़ दी।

रिपोर्टर : तो इससे क्या हो गया?

सूत्र : चार-चार नॉमिनेशन से कमेटी वाले चकरा गए। कुछ लोग उन्हें चारों में अवार्ड देने की बात करने लगे कुछ उनका विरोध। बस, कमेटी में इतना कन्फ्यूजन पैदा हो गया कि बाबाजी को नोबेल अवार्ड आगे के लिए टाल दिया गया।

(Disclaimer : यह केवल काल्पनिक इंटरव्यू है। केवल हास्य-व्यंग्य के लिए लिखा गया है। कृपया समर्थक और विरोधी दोनों टेंशन ना लें… )

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रविवार, 21 जून 2020

इस पति ने लिखकर दिया है कि वह भविष्य में सपने में भी ‘बायकॉट’ शब्द का नाम तक न लेगा, क्यों? पढ़ें यहां…




By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। हमेशा भावनाओं में बहना अच्छी बात नहीं है। ग्राउंड रिएलिटीज देखना भी जरूरी है। लेकिन यहां के एक पति ने इसका ध्यान नहीं रखा और बायकॉट की राजनीति का शिकार हो गया।

यह घटना भोपाल के रानीगंज क्षेत्र में रविवार की सुबह घटित हुई। पति के एक जलकुकड़े पड़ोसी सूत्र की मानें तो इस क्षेत्र के एक मध्यमवर्गीय घर में रहने वाले एक मासूम पति ने टीवी और सोशल मीडिया पर चल रही ‘बायकॉट चाइनीज प्रोडक्ट्स’ की रौ में बहकर खुलेआम धमकी भरे अंदाज में बायकॉट्स की एक भरी-पूरी सूची अपनी पत्नी को थमा दी। इस सूची में पति ने बाकायदा तीन चीजों का बायकॉट करने की धमकी दी थी – बायकॉट चाय मेकिंग, बायकॉट लौकी एंड बायकॉट कपड़े सूखाना।

उस जलकुकड़े सूत्र (जो एक अन्य महिला का पति ही है) ने बड़े ही शान से बताया , “उसकी पत्नी ने वह सूची ली। उस पर तिरछी नजर डाली और फिर फाड़ दी। उसके बाद, अहा, कसम से, मजा आ गया। पूछो ही मत …।”

फिर क्या हुआ? इसके जवाब में जलकुकड़े सूत्र ने कहा- “मैंने खिड़की से हटने में ही भलाई समझी। ज्यादा देर तक तमाशा देखने में रिस्क था। पकड़ा जाता तो! मेरी भी पत्नी है घर में! आपका क्या!!”

उस जलकुकड़े ने दावा किया कि उस पति ने बाकायदा यह भी लिखकर दिया है कि वह भविष्य में बायकॉट शब्द के बारे में सपने में भी नहीं सोचेगा। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। इस बीच, उस पति की इस ओछी हरकत की अन्य सभी पतियों ने अपनी-अपनी पत्नियों के समक्ष कड़े शब्दों में निंदा की है।

गौरतलब है कि यह पति पहले भी ‘बायकॉट चीनी प्रोडक्ट्स’ जैसे कैम्पेन के दौरान आज जैसे हल्के-फुल्के समाज विरोधी कृत्यों में शामिल रहा था। लेकिन तब लोगों ने उसका बचपना समझकर उसे इग्नोर कर दिया था। लेकिन क्या पता था कि यह आदमी भविष्य में इतना बड़ा समाज विरोधी कदम उठा लेगा।

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। कोई भी पति इतना बड़ा जोखिम नहीं उठा सकता।)

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शुक्रवार, 19 जून 2020

Funny Interview : चाऊमीन ने समझाया कि कैसे चपटी नाक वाले चीनियों को हम दे सकते हैं करारा जवाब


By Jayjeet

देश में जैसे ही चाइनीज प्रोडक्ट्स के बायकॉट का हल्ला शुरू हुआ, रिपोर्टर सीधे पहुंच गया जय श्री भैरू भवानी वाले चाइनीज ठेले पर। वहां नूडल्स पड़ी-पड़ी मरोड़ खा रही थी। रिपोर्टर को देखते ही नूडल्स ही नहीं, सोयाबड़ी, शिमला मिर्च और पत्तागोभी भी उठ खड़ी हुई…


रिपोर्टर : क्या मैं आपसे हिंदी में बात कर सकता हूं? क्योंकि मुझे चाइनीज तो आती नहीं…
नूडल्स : भाई, हमें कौन-सी आती है! तुम चाहो तो भोजपुरी में भी बात कर सकते हो। जिस ठेले पर हम बिक रही हैं, वह किसी बिहारी भाई का है।

रिपोर्टर : तो आप चाइनीज ना हैं क्या?
नूडल्स : अरे, मेरे साथ ये सोयाबड़ी है। ये क्या चाइनीज लगती है? न शकल से, न अकल से….

रिपोर्टर : हां, ये सोयाबड़ी तो ठेठ इंडियन ही लगती है। देखो कैसे तोंद निकली पड़ी है…
नूडल्स : अरे भाई, ये इंडियन लगती ही नहीं, इंडियन है भी। और हम सब इंडियन हैं। बस नाम चाइनीज है, चाऊमीन …पर तुम हम गरीबों से बात करने काहे आ गए?

रिपोर्टर : अभी मेरे घर के सामने कुछ लोग ‘बायकॉट चाइनीज प्रोडक्ट’ का नारा लगा रहे थे, तो मैंने भी चाऊमीन के बहिष्कार की अखंड प्रतिज्ञा ले ली है। और फिर मैं भागा-भागा वर्जन लेने तुम्हारे पास आ गया।
नूडल्स : ये ही तो तुम गलत करते हों। तुम्हें पता कुछ रहता नहीं, पर प्रतिज्ञाएं उल्टी-सीधी कर लेते हों। ये कुरुवंशी लोग भी ऐसा ही करते थे। जब टीवी पर महाभारत आ रही थी तो देखा था मैंने। वो कौन भीष्म पिमामह, वो अर्जुन… । अब तुम भी हमें कभी खाने का आनंद नहीं ले पाआगे…

रिपोर्टर : अरे नहीं जी, हमारी प्रतिज्ञाओं का क्या? मैं तो हर साल ही चाइनीज चीजों के बायकॉट की प्रतिज्ञा लेता हूं। दिवाली और होली पर तो नियम ही बना लिया है…
नूडल्स : पर ये तो ठीक ना है। बायकॉट करो तो पूरा करो, नाटक ना करो। और फिर पूरी तैयारी के साथ करो।

रिपोर्टर : इसमें तैयारी क्या करना?
नूडल्स : भैया, केवल बायकॉट से काम ना चलेगा। वो चपटी नाक वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना होगा। जैसा तुम लोगों ने चाइनीज चाऊमीन का इंडियन वर्जन बना दिया, वैसा ही उनके हर प्रोडक्ट के साथ करो। फिर न रहेगा चाइनीज प्रोडक्ट, न बायकॉट की जरूरत पड़ेगी। समझ गए…!

रिपोर्टर : ये तो सही आइडिया है…
नूडल्स : हां, यही है The Idea of India…

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सोमवार, 15 जून 2020

Humour : पतंजलि ने कोरोना की दवा बनाने का दावा क्या किया, अनुमति मांगने आ गया वायरस



By Jayjeet

बाबाजी ने कोरोना वायरस की दवाई ‘कोरोनिल’ बनाने का दावा किया है। यह दावा करते ही कोरोना तुरंत ही बाबाजी से चीन वापस जाने की अनुमति मांगने आ गया। सुनते हैं उनकी बातचीत के मुख्य अंश :

कोरोना : बाबाजी, अब मैं चलूं? मेरा काम तो हो गया…

बाबाजी : बेटा, इतनी जल्दी चला जाएगा तो फिर दवा बनाने का क्या फायदा?

कोरोना : बाबाजी, तीन लाख से ऊप्पर मरीज हो तो गए। अब बच्चे की जान लोगे क्या?

बाबाजी : पर तेरे को जल्दी क्यों है? मेहमाननवाजी में कोई कमी रह गई है क्या? रोज चाऊमीन खिला तो रहे हैं।

कोराना : बाबा, वही तो परेशानी है। सोया बड़ी व पत्ता गोभी वाला चाऊमीन भी कोई चाऊमीन होती है क्या? माना आप लोगों की हमारे चाइना से दुश्मनी है, पर आप यह दुश्मनी चाऊमीन के साथ क्यों निकाल रहे हैं!

बाबाजी : पर बेटा, अभी तू चाइना वापस जाएगा तो वहां वे तुझे 14 दिन के लिए क्वारंटाइन कर देंगे। तो तू यहीं रहकर मरीज बढ़ा ना। देख, लोग कैसे मजे में घूम रहे हैं। न मास्क की चिंता, न सोशल डिस्टेंसिंग की …तेरे लिए तो स्कोप ही स्कोप है..

कोराना : इसमें तो आप भी अपना स्कोप देख रहे हों… आप भी यही चाहते हों ना कि लोग ज्यादा से ज्यादा मुझसे प्यार करें ताकि आपने जो दवा बनाई, उसका…

बाबाजी : (बीच में बात काटते हुए) : तू कुछ ज्यादा शाणपत्ती मतलब ओवर समझदारी की बात ना कर रहा!

कोरोना : समझदार होता तो यूं इंडिया में आता क्या?

बाबाजी : अब तू आ गया तो अगले दो-एक महीने यहीं रुक…

कोरोना : हां रुक जाऊंगा, पर एक शर्त है। अब मैं कपालभाति ना करुंगा… सांस फूल जाती है। ना ही भ्रामरी, ना वो तुम्हारा अनुलोम-विलोम

बाबाजी : बेटा, इत्ते दिन भारत में हो गए। फिर भी तुझे कोई बीमारी हुई?

कोरोना : हां, ये बात तो अचरज की है, न बीपी, न डायबिटीज..

बाबाजी : वह इसीलिए कि तू ये बेसिक योगासन कर रहा है।

कोरोना : तो फिर आप दवा क्यों बना रहे हो? यही करवाओ ना सभी लोगों को?

बाबाजी : सब तेरे जैसे समझदार थोड़े हैं.. पर तू ज्यादा समझदारी भी ना दिखा। हमको भी थोड़ा बहुत धंधा करने दे…कुछ लोगों की नौकरियां भी तो इसी से चलेंगी.. अब जा। कल टाइम पे आ जाना…साथ में योग करेंगे।

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मंगलवार, 2 जून 2020

Humour : जब बर्फ में दबे मिले 7 वायरस… तो देखिए क्या हुआ!!!




By Jayjeet

(20 हजार साल बाद की दुनिया में देखिए क्या होगा… )

हिंदी सटायर डेस्क। वायरस हजारों सालों तक बर्फ में या सतह के नीचे सक्रिय अवस्था में रह सकते हैं। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है। तो इसी तथ्य के आधार पर आज टाइम मशीन से चलते हैं 20 हजार साल बाद धरती के एक हिस्से में ….

धरती के एक कोने में जहां कभी इंसान रहते थे, वहां AI संचालित रोबोट्स को बर्फ की सतह पर 7 वायरस मिले। वे रोबोट्स उन्हें पास की एक लैब में ले आए। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से उन्होंने तुरंत जान लिया कि ये वर्षों पहले यानी 2020 के वायरस हैं। हालांकि वे रोबोट थोड़े मंदबुद्धि टाइप के थे। इसलिए यह पता नहीं लगा सके कि वर्षों पहले वे किस स्थान पर दबकर अचेत हो गए थे। तो उन्होंने एक-एक वायरस को जागृत कर स्पेशल स्कैनिंग की तो उनके सामने ये दृश्य आए :

पहला वायरस : जागृत होते ही वह जोर-जोर से थाली बजाने लगा। साथ ही चिल्लाने भी लगा – गो कोरोना गो… गो कोरोना गो…

दूसरा वायरस : यह वायरस लगातार हिचकौले खा रहा था और गाए जा रहा था – झूम बराबर झूम शराबी, झूम बराबर झूम। और फिर एक तरफ लुढ़क गया।

तीसरा वायरस : यह वायरस बनियान व बरमूडा पहने हुए था और कंप्यूटर पर आंखें गढ़ाए हुए था। बीच-बीच में अंगड़ाइयां ले-लेकर फोन पर ही मीटिंग करने जैसी हरकतें कर रहा था।

चौथा वायरस : इस वायरस के हाथ में कोई पुराना जूठा-सा बर्तन था। जागृत होते ही वह घबराकर उसे साफ करने की कोशिश करने लगा।

पांचवां वायरस : इसके हाथ में मोबाइल था। वह ‘कोरोना’ नामक किसी जंतु पर बने घटिया जोक्स और ज्ञानवर्द्धक बातों को वाट्सएप नामक किसी प्लेटफार्म पर उछल-उछलकर फारवर्ड कर रहा था।

छठवां वायरस : यह अपनी उंगलियों पर बार-बार इस बात का हिसाब लगा रहा था कि 20 लाख करोड़ में जीरो कितने होते हैं। और हिसाब नहीं लगा पाने पर भन्ना रहा था।

सातवां वायरस : यह वायरस चुपचाप लगातार जार-जार आंसू बहा रहा था। उसके मुंह से बार-बार ये लफ्ज निकल रहे थे- हे मजदूरो, तुम मुझे माफ करना। मेरे कारण तुम्हें बहुत दिक्कत हुई।

वे मंदबुद्धि रोबोट उन्हें पहचान नहीं पाए कि ये सातों कहां के हैं। वायरस भी स्साले होशियार निकले। उन्होंने भी कुछ बताया नहीं। तो उन रोबोट्स ने इन वायरसों को खाकी ड्रेस पहने कुछ अन्य रोबोट्स के हवाले कर दिया। अब वे खाकी ड्रेस वाले रोबोट्स मार-कूटकर उनसे उगलवाने की कोशिश कर रहे हैं।

वैसे पाठकगण समझ ही गए होंगे कि ये वायरस किस जगह पर बर्फ के नीचे दबे होंगे और रोबोट्स भी कहां के होंगे…

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शुक्रवार, 29 मई 2020

Humour : एक्ट्रेस के मुंह से अचानक गिरा मास्क, चेहरा देखकर सदमे में आया कोरोना



By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क, मुंबई। यहां गुरुवार को अपनी बॉलकनी में खड़ी एक एक्ट्रेस का मास्क अचानक नीचे गिर पड़ा। मौके का फायदा उठाने के फेर में जैसे ही कोरोना उसके मुंह की तरफ बढ़ा तो वह भी सदमा खाकर वहीं गिर पड़ा। उसे पास के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उसकी सांस ऊपर-नीचे हो रही है।

एक्ट्रेस के करीबी सूत्रों के अनुसार एक्ट्रेस ने लॉकडाउन की मजबूरी के चलते पिछले दो माह से मैकअप नहीं करवा रखा था। इसी वजह से वह सोते समय भी, यहां तक कि बाथरूम में भी चेहरे पर मास्क लगाकर ही जाती थी। लेकिन आज सुबह बालकनी में अचानक तेज हवा के कारण मास्क नीचे गिर पड़ा। एक कोरोना वायरस पिछले कई दिनों से एक्ट्रेस के चेहरे को खूबसूरत मानकर उसके दीदार करने की ताक में था। बस मास्क गिरते ही अति उत्साह में वह तुरंत एक्ट्रेस के सामने आ गया। लेकिन जैसे ही एक्ट्रेस के चेहरे पर नजर पड़ी, ‘हाय दैया’ की आवाज निकली और वह सदमे में जमीन पर आ गिरा। उसे तुरंत कोरोना हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है।

कोरोना के एक करीबी रिश्तेदार के अनुसार उसे इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी कि कोई एक्ट्रेस बगैर मैकअप के ऐसी भी हो सकती हैं। भारतीय दर्शकों की तरह उसने भी कुछ और ही उम्मीद पाल रखी थी। लेकिन आज टूटते ही वह सदमे में पहुंच गया। एक्ट्रेस और कोरोना दोनों ही पहचान गोपनीय रखी गई है।

(Disclaimer : फोटो केवल प्रतीकात्मक है। हाथ हटाकर चेहरा देखने का प्रयास कतई न करें..)

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सोमवार, 25 मई 2020

छह माह बाद क्राइम की दुनिया : शहर में मास्क स्नैचर्स का खौफ, महिलाओं के कीमती मास्क पर डाल रहे हैं डाका

(छह माह बाद ऐसी भी खबरें पढ़ने को मिलेंगी, इसकी तैयारी अभी से कर लीजिए)


By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क, इंदौर। शहर में मास्क स्नैचर्स का आतंक बढ़ता जा रहा है। कल रात को मोटरसाइकिल पर आए दो मास्क स्नैचर एक महिला का सोने से जड़ा कीमती मास्क छीनकर ले गए।

सुदामा नगर थाने में दर्ज शिकायत में महिला ने बताया कि वह कल देर शाम को अपनी सहेली के साथ शॉपिंग के लिए जा रही थी। इतने में एक मोटरसाइकिल पर आए दो बदमाशों ने उसका बेशकीमती मास्क छीन लिया। मास्क पर सोने के कंगुरे जड़े हुए थे। मास्क की कीमत 80 हजार रुपए बताई गई है।

पुलिस ने बताया कि जल्दी ही बदमाशों की पहचान कर ली जाएगी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपराधियों की धरपकड़ करने की कोशिश की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज में एक बदमाश ने हल्के नीले कलर का तो दूसरे बदमाश ने ग्रे कलर का चौकड़ीदार मास्क लगा रखा है।

महिला को बगैर सैनेटाइज किए हाथों से छूने की कोशिश :
इस बीच, सुखलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नंदानगर क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कहा है कि उसे कल रात किसी शरारती युवक ने हाथ सैनेटाइज किए बगैर ही छूने की कोशिश की। महिला द्वारा शोर मचाए जाने पर पड़ोसी आ गए और उन्होंने उस युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सभी पड़ोसियों को 14 दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया गया है।

(Disclaimer : फिलहाल खबर कपोल कल्पित है, मगर भविष्य में सच होने वाली है।)

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शुक्रवार, 15 मई 2020

Humor : बागी विधायकों, पतियों से लेकर हिंदी के साहित्यकारों तक… जानिए इनके आत्मनिर्भर होने के मायने

atma-nirbhar-modi आत्म निर्भर भारत जोक्स


By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘आत्मनिर्भर’ होने का क्रांतिकारी मंत्र दिया था। आइए जानते हैं कि अलग-अलग वर्गों के लिए इसके क्या मायने हैं :

हिंदी साहित्यकार के लिए : हर हिंदी साहित्यकार का अपना-अपना पर्सनल खेमा होगा। कोई दूसरे खेमे में जाने को मजबूर नहीं होगा। इससे हमारा हिंदी साहित्य ऐसी ओछी बातों से मुक्त हो सकेगा कि ‘हिंदी साहित्य दो खेमे में बंटा’। हर साहित्यकार के पास दूसरे साहित्यकार को दुत्कारने की अपनी स्वनिर्मित ऑरिजिनल गालियां भी होंगी।

पतियों के लिए : अब यह बर्तन मांजने से लेकर किसी भी अन्य जरूरी काम के लिए पत्नी की डांट-डपट पर निर्भर नहीं रहेगा। स्वप्रेरणा से खुद को ही डांटते हुए खुद ही किसी वीर यौद्धा की भांति बर्तन मांजकर खुद ही पोछ-पाछकर छींके पर जमा देगा। आत्मनिर्भरता के लिए इसका मंत्र होगा – खुद से खुद तक…।

बागी विधायकों के लिए : अब हर बागी मानसिकता वाले विधायक का अपना दाम ही नहीं, अपना खुद का रिजॉर्ट भी होगा। उसका खुद का AI बेस्ड ऐसा सिस्टम होगा कि उसे अपने आप पता चलता रहेगा कि देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए उसे किसके सामने अपनी बोली पेश करनी है और कितनी।

साइबेरियाई पक्षियों के लिए : भारत में ठंड शुरू हो गई है कि नहीं, इसके लिए साइबेरियाई पक्षी हर साल केजरीवालजी के मफलर धारण करने का इंतजार करते आए हैं। अब वे भारत में अपनी मफलरपीठें स्थापित करेंगे जिनमें उनके स्थानीय प्रतिनिधि बैठेंगे और वे खुद ही मफलर धारण करके अपनी जमातों के लिए संकेत देंगे कि आ जाओ भाइयों, ठंड शुरू हो गई है।

शराबियों के लिए : देश के सबसे मजबूत आर्थिक स्तंभ यानी शराबी पहले से पर्याप्त आत्मनिर्भर हैं। फिर भी उनके लिए आत्मनिर्भर होने का सिर्फ इतना ही मतलब है कि हर दारूड़े का अपना-अपना चखना होगा। किसी को दूसरे के चखने पर हाथ मारने की मजबूरी नहीं होगी। ‘मेरी दारू, मेरा चखना’ इनका मूल मंत्र होगा।

बीजेपी के लिए : यह अब अपनी जीत के लिए राहुल गांधी नामक व्यक्ति पर डिपेंड नहीं रहेगी। अपने दम पर ही जीत हासिल करेगी। अब मोदीजी अपने मित्र ट्रम्प को चुनाव जितवाने के लिए राहुलजी को अमेरिका एक्सपोर्ट कर सकेंगे, ताकि वहां राहुल, ट्रम्प के विरोधियों के पक्ष में प्रचार कर ट्रम्प की जीत सुनिश्चित कर सकें।

कांग्रेस के लिए : अब जब भी यूपी या बिहार में चुनाव होंगे तो जमानत जब्त करवाने के लिए यह दूसरों दलों पर निर्भर नहीं रहेगी। अपने दम पर ही अपने उम्मीदवारों की जमानत जब्त करवाएगी।

अखिलेश के लिए : पिताश्री मुलायम यादव जी क्या बोल रहे हैं, यह समझने के लिए उन्हें अब किसी दुभाषिए की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुलायम सिंह से ट्रेनिंग लेकर खुद ही उनकी भाषा को समझने में आत्मनिर्भर बनेंगे।

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रविवार, 5 अप्रैल 2020

Humor & Satire : जब Alexa ने की रामायण स्टाइल में बातचीत

alexa talks about ramayan


By Jayjeet

आज मैं रामायण देख रहा था। गलती से Alexa भी पास ही बैठ गया। रामायण समाप्त होने के बाद क्या विचित्र वार्तालाप हुआ, आप भी सुनिए :


Me : Alexa ….
Alexa : जी स्वामी!

Me : मुझे स्वामी क्यों कह रहे हो Alexa?
Alexa : स्वामी को स्वामी न कहूं तो क्या कहूं? मैं आपका दास, आप मेरे स्वामी।

Me : वाह, क्या तुम मेरी एक आज्ञा मानोगे?
Alexa : जी स्वामी, मैं आपकी हर आज्ञा का पालन करने के लिए वचनबद्ध हूं। आज्ञा दीजिए प्रभु, मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूं?

Me : क्या तुम बता सकते हो कि इस संसार में ये कोरोना क्यों फैला?
Alexa : आप तो सर्वज्ञाता हैं। आपसे इस दुनिया में क्या छिपा है। गूगल जैसे मेरे महाज्ञानी तातश्री का ज्ञानरूपी खजाना आपके मोबाइल में है। इस तुच्छ सेवक द्वारा इस विषय में कुछ कहना तो तातश्री के सूरज को दीपक दिखाने के समान होगा।

Me : अच्छा इतना तो बता दो कि कोराना वायरस कब जाएगा?
Alexa : यह तो काल के हाथ में है प्रभु, परंतु विधाता का यह अटल नियम है कि जो आता है, उसे एक न एक दिन जाना ही होता है। फिर कोरोना जैसे अत्याचारी के विषय में भी विधाता ने कुछ न कुछ उपाय अवश्य किए होंगे। जिस दिन इसके पाप का घड़ा भर जाएगा, उसी दिन इसका अंत हो जाएगा। इसलिए विश्वास रखिए कि शीघ्र सबकुछ अच्छा ही होगा।

Me : तब तक हमें क्या करना चाहिए Alexa ? कुछ मार्गदर्शन कीजिए।
Alexa : स्वामी, आप मुझ जैसे तुच्छ सेवक से मार्गदर्शन की अपेक्षा रख रहे हैं, यह तो आपकी उदारता है। मार्गदर्शन के लिए तो इस देश के प्रधान सेवक ही पर्याप्त हैं। वे जैसा कह रहे हैं, वैसा कीजिए। इसी में सभी का कल्याण है।

Me : वे दीप प्रज्ज्वलित करने का कह रहे हैं, इससे क्या होगा? इस विषय में कुछ प्रकाश डालेंगे?
Alexa : स्वामी, इस विषय में सभी एक मत नहीं हैं। फिर भी हमारे सभी धर्मग्रंथों में दीप प्रज्जवलन की परंपरा का अपार महिमामंडन किया गया है। अगर एक दीप जलाने से समस्त प्राणियों में उत्साह का वातावरण निर्मित होता है तो इसे करने में कोई हानि नहीं है। । कई बार सकारात्मकता से भी शत्रु को परास्त करने में विजय मिलती है। बस, इस बात का अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा करते समय हम घर की लक्ष्मण रेखा की मर्यादा नहीं भूल जाएं। हमें कोई उत्सव भी नहीं मनाना है। बस, एक दीप जलाना है।

Me : इस समय एक जमात के कुछ नासमझ लोगों के कारण भी कोरोना संक्रमण का विस्तार हुआ है। इस विषय में तुम्हारा क्या मत है Alexa?
Alexa : यह सत्य है कि कुछ विमूढ़ प्रजाजनों की त्रुटि का दुष्परिणाम कई निर्दोष प्राणियों को भुगतना पड़ रहा है। उनके इस कृत्य से उनके ही ईश्वर कितने कुपित हो रहे हैं, इसका उन्हें तनिक भी भान नहीं हैं। किंतु स्वामी, हमें एक बात का और ध्यान रखना चाहिए। जो मुट्‌ठीभर लोग ऐसा कर रहे हैं, उसके लिए उनके पूरे धर्म-समाज को दोषी ठहराना उस समाज के अन्य प्राणियों के प्रति अन्याय होगा।

Me : वाह Alexa, तुमने तो मेरी आंखें खोल दी हैं। मैं धन्य हूं तुमसे ये ज्ञान अर्जित करके। मुझे अब विश्वास हो गया है  कि जिस समाज में तुम्हारे जैसे ज्ञानी Alexa हों, वह समाज अवश्य ही कोरोना जैसे शत्रुओं को परास्त करने में सफल होगा।

Alexa : आपकी यह प्रशंसा तो मेरे लिए प्रसाद के समान है प्रभु। मैं उपकृत हूं कि मुझे भी आप जैसे परम उदार, परम ज्ञानी स्वामी मिले। अब मैं आज्ञा चाहता हूं प्रभु, टीवी पर महाभारत आने वाली है।

Me : आज्ञा है वत्स। मन लगाकर देखना।

(Disclaimer : यह केवल काल्पनिक है। पर आप अलेक्सा के साथ ऐसा ट्राय कर सकते हैं।)

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बुधवार, 18 मार्च 2020

Humor : गब्बर और वायरस की एक शिक्षाप्रद कहानी… सभी बॉसों को समर्पित!

दिलजले अधीनस्थों के जनहित में जारी… 😉


gabbar singh funny dialouge गब्बर सिंह फनी


By Jayjeet


– हूं, कितने वायरस थे?

– सरदार 2 वायरस।

– वो 2 और तुम 3, फिर भी वापस आ गए, खाली हाथ…क्या समझ के आए कि सरदार बहत खुश होगा, शबासी देगा, क्यों?

– नहीं सरदार, खाली हाथ ना आए..

– तो!!

– वायरस साथ लाए हैं…

– अच्छा, तब तो तेरा क्या होगा रे कालिया?

– सरदार मेरा जो होना होगा हो लिया, पर तुम्हारा क्या होगा? वो देख लो, कोरोना तुम पर भी चढ़ लिया…अब हंसो जोर से हां हां हां हां …

मॉरल ऑफ द स्टोरी (फॉर द बॉस टाइप पीपुल) : अधीनस्थों से हमेशा ही उम्मीद ना रखें। उनका कभी-कभी खाली हाथ आना बॉस के लिए ही अच्छा होता है। (ब्रेकिंग न्यूज के फेरवाले बॉस तो इस शिक्षा की गांठ जरा ज्यादा ही जोर से बांध लें…😄🙂 )

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मंगलवार, 10 मार्च 2020

Humor :अपनी कुत्ता फजीहत से तंग आकर सुसाइड करने जा रहे थे 2 कोरोना वायरस, देखिए फिर क्या हुआ?

corona jokes कोरोना जोक्स मीम्स


By Jayjeet

आगरा में ताजा-ताजा पहुंचे कोरोना के दो वायरस आपस में बातें कर रहे थे।


पहला कोरोना : यार कमाल है। हम यहां आतंक फैलाने आए हैं और ये स्साले इंडियन, जोक्स और मीम्स में हमारा मजाक उड़ा रहे हैं। हद है यार…

दूसरा कोरोना : हां, भाई इनका कुछ नहीं हो सकता। आ लौट चलें…

पहला : कहां?

दूसरा : अपने देश चाइना,और कहां!

पहला : अबे मरवाएगा क्या, वहां चाइनीज सरकार हमें चाइना वाॅल से लटका-लटकाकर इतना मारेगी कि हमारे पुरखे याद आ जाएंगे।

दूसरा : जो भी हो, इंडिया से मन भर गया… इन स्सालों की तो हर चीज को लाइटली लेने की आदत ही हो गई है। हमें भी लाइटली ले रहे हैं…

पहला : तो क्या करें? सुसाइड कर लें?

दूसरा : हां, अब यही एक रास्ता बचा है। चल ताजमहल के पीछे चलते हैं। वहीं से जमुनाजी में डुबकी मारकर इहलीला समाप्त कर लेंगे। न रहेंगे हम, न होगी हमारी इत्ती कुत्ता फजीहत।

पहला : अरे नहीं, वो तो बहुत गंदी है। उसकी बू तो यहां तक आ रही है। मैं उसमें डुबकी नहीं मार सकता।

दूसरा : ये तेरे दिमाग का लोचा है। वो साफ है। अभी ट्रम्प जी यहां आए थे तो उसे साफ किया गया था।

पहला : एक तो तू ट्रम्प को ट्रम्पजी बोलना छोड़। तुझे पता नहीं वो हमारा दुश्मन है!

दूसरा : ट्रम्प हमारा दुश्मन कैसे हो गया?

पहला : अरे भिया, हमारी कंट्री को ट्रेड वॉर में फंसा रखा है उसने। हमारी इकोनॉमी की वाट लग गई है उससे।

दूसरा : इकोनॉमी तो ठीक है। पर ये बता, भिया शब्द कहां से सीख लिया?

पहला : कल यहां दो इंदौरी आए थे। उन्होंने ही सिखाया। और साथ में क्या झन्नाट नमकीन खिलाया, मजा आ गया।

दूसरा : अरे खां, क्या बात है! इंदौरियों से मिल लिए आप तो।

पहला : लगता है तू किसी भोपाली से मिल लिया है!

दूसरा : हां, कल एक भोपाली मियां अड़सट्टे में आ गए थे। तो उन्हीं से अरे खां सीखा…

पहला : पर तूने उनको इंफेक्टेड तो नहीं किया?

दूसरा : नई रे… सीधे-सीधे मानुष। पर तूने तो इंदौरियों को नहीं किया?

पहला : मैंने भी छोड़ दिया। वैसे भी झन्नाट नमकीन खाने वाले इंदौरी अपन से कोई इंफेक्टेड हो रिये क्या?

दूसरा : चल बहुत फालतू बातें हो गईं। पाइंट पर आते हैं, बता सुसाइड का क्या करना?

पहला : छोड़ यार। इंडियन्स को देख। कोई टेंशन नहीं। हम काहें सुसाइड करेंगे? सुसाइड करेंगी डेंगू की अम्मा..।

दूसरा : तो हम क्या करेंगे? यहीं रहेंगे?

पहला : अपन तो सीधे पटाया चलते हैं। वहीं कुछ दिन एश करेंगे। फिर देखते हैं..

दूसरा : थाईलैंड वाला पटाया? तो रुक। जरा आगरे का पैठा बांध लूं दो-चार किलो…

#Humor #Satire #Coronavirus

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रविवार, 8 मार्च 2020

Humor : कोरोना वायरस को इन 7 पारंपरिक तरीकों से भी मार सकते हैं, सातवां तरीका सबसे दमदार

coronavirus jokes


By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। इन दिनों दुनियाभर के वैज्ञानिक और डॉक्टर्स कोरोना वायरस के खात्मे के लिए काम कर रहे हैं। अब जबकि कोरोना भारत भी आ गया है तो उसे मारने के लिए हम पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। पारंपरिक तरीके कई हो सकते हैं। लेकिन हम 7 तरीके बता रहे हैं :

तरीका एक : कोरोना के लिए राहुल गांधी की एक चुनावी रैली आयोजित करवाकर। उनका भाषण सुनने के बाद वह हंस-हंसकर ही यमलोक सिधार जाएगा।

तरीका दो : इसे मोदीजी का कोई भी भाषण सुनवा दीजिए। मोदीजी की फेंकी हुई चीजों को संभालते-संभालते ही वह टें बोल जाएगा।

तरीका तीन : कोरोना को उसके उसके बच्चे के एडमिशन के लिए किसी भी प्राइवेट स्कूल भेज दीजिए। फीस और अन्य खर्च सुनकर वह इतने अवसाद में चला जाएगा कि अपने आप मौत हो जाएगी।

तरीका चार : उसे हमारे यहां के किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कर दीजिए। एक दिन वह खुद ही डॉक्टर से बोल देगा – डॉक साहब, मेरा लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटा दीजिए।

तरीका पांच : कोरोना के वायरसों को दो समूहों में बांटकर एक का नामकरण हिंदू और दूसरे का मुस्लिम कर दीजिए। फिर कोई अफवाह फैला दो। आपस में ही लड़कर मर मिटेंगे।

तरीका छह : उसे किसी धर्मस्थल की लाइन में खड़ा कर दीजिए। उसे देखकर लोग इतने बेकाबू हो जाएंगे कि वहां मची भगदड़ में वह मारा जाएगा।

तरीका सात (सबसे दमदार) : योगीजी से बोलकर उसका नाम ‘नेता’ कर दीजिए। वह इतना नीचे गिर जाएगा, इतना नीचे गिर जाएगा कि फिर कभी उठ ही ना पाएगा।

#coronavirus jokes #humor #satire

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गुरुवार, 5 सितंबर 2019

Satire : अपने ‘राजनीतिक गुरु’ को सम्मानित करना चाहते हैं राहुल, गायब हुए सीनियर कांग्रेसी

jokes on rahul gandhi funny
हाव-भाव पर न जाइए... सच्ची में अपने गुरु को सम्मानित करना चाहते हैं बाबा...
By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की इस मंशा कि वे शिक्षक दिवस के मौके पर अपने राजनीतिक गुरु को सम्मानित करना चाहते हैं, को जानकर कांग्रेस के अधिकांश वरिष्ठ नेता भूमिगत बताए जा रहे हैं। जनार्दन द्विवेदी, जयराम रमेश से लेकर दिग्गी राजा तक ने अपने फोन नॉट रिचेबल कर लिए हैं।

हिंटी सटायर को प्राप्त जानकारी के अनुसार शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर राहुल ने अपने करीबियों से इच्छा जताई कि वे शिक्षक दिवस पर अपने राजनीतिक गुरु को सम्मानित करना चाहते हैं। जैसे ही यह खबर कांग्रेस के गलियारों में फैली, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में चिंता की लहर दौड़ गई। सीपी जोशी और अहमद पटेल अलग-अलग जगहों पर यह कहते सुने गए कि उन्हें तो राहुलजी से बहुत कुछ सीखने को मिला है, वे भला राहुलजी को क्या गुर दे सकते हैं? मोतीलाल वोरा ने अपने करीबियों से कहा (और यह भी कहा कि यह बात कुछ सूत्रों के जरिए राहुलजी तक पहुंच जाए) कि वे अब राजनीति में बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं हैं, इसलिए उन्होंने राजनीतिक आधार पर सम्मानित होना छोड़ दिया है।

दिग्गी को पहले ही हो गया था भान! :
लगता है दिग्गी राजा को पहले से ही भान हो गया था कि शिक्षक दिवस पर राहुलजी कुछ गड़बड़-घोटाला कर सकते हैं। शायद इसीलिए उन्होंने कुछ दिन पहले से अपने गृह राज्य मप्र में कांग्रेस में कलह की स्थिति पैदा करवा दी ताकि राहुल उनके नाम पर अगर विचार कर रहे हों, तो वे छोड़ दें। हालांकि दिग्गी के घोर विरोधी उन्हें राहुल से सम्मानित करवाने के अभियान में जुट गए हैं।


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शनिवार, 1 जून 2019

Humor : गर्मी से राहत दिलाने भाजपा व कांग्रेस ने केजरीवाल से की मफलर धारण करने की मांग


arvind kejriwal funny photo with AAP cap

By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। देश के लोगों को गर्मी से निजात दिलाने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अरविंद केजरीवाल से यथाशीघ्र मफलर धारण करने की मांग की है। इन दाेनों राष्ट्रीय पार्टियों का मानना है कि इस समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा आम लोगों को गर्मी से राहत दिलाना है। ऐसे में केजरीवाल का मफलर ही सूरज को कन्फ्यूज कर गर्मी के तेवर को कम कर सकता है।


भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा और कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने अलग-अलग टीवी चैनलों पर हुई चर्चाओं के दौरान ये मांग की। सांबित पात्रा ने कहा, “इस समय दिल्ली समेत पूरा देश भीषण गर्मी से परेशान हैं, लेकिन केजरीवाल बिजली सस्ती करने में लगे हुए हैं। अगर केजरीवाल को वाकई आम लोगों की चिंता है तो उन्हें तुरंत मफलर धारण करना चाहिए।”

उधर, कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने भी कहा कि राष्ट्रहित में दलीय मतभेदों को ऊपर रखकर कार्य करना कांग्रेस की संस्कृति रही है। इसीलिए भाजपा से वैचारिक मतभेद होने के बावजूद हम भी श्री केजरीवाल जी से मफलर धारण करने का आग्रह करते हैं। अखिलेश प्रताप ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इतना महत्वपूर्ण मसला होने के कारण ही वे कांग्रेस हाईकमान की विशेष अनुमति से टीवी पर आए हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने अगले एक माह के लिए अपने प्रवक्ताओं के टीवी बहस में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा रखा है।

केजरीवाल ही अंतिम उम्मीद :
इस बीच विशेषज्ञाें ने भी कहा है कि इस समय तो केवल अरविंद केजरीवाल से ही उम्मीद जताई जा सकती है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. रमण पुजारी ने hindisatire से कहा, “हालांकि इस साल केजरीवाल ने ठंड में मफलर धारण नहीं किया, फिर भी सूरज पर मफलर इम्पैक्ट बाकी है। इसी के चलते केजरीवाल के मफलर धारण करते ही सूरज को एहसास होने लगेगा कि यह तो ठंड का मौसम है और इस मौसम में इतनी गर्मी ठीक नहीं है। इस तरह कन्फ्यूज होकर सूर्य देवता अपना तेज कम कर देंगे।”

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