शनिवार, 25 जुलाई 2020

Jokes : लॉकडाउन पर दिल को गुदगुदाने वाले मजेदार जोक्स

lockdown jokes memes , लॉकडाउन जोक्स मीम्स

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#lockdown_jokes #lockdown

Special Interview : पौधे की मुंहफट, इंसान को दिखाया आईना


interview-with-plant-satire

By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। कोने में कई पौधे पड़े-पड़े मुस्करा रहे थे। हमने इंटरव्यू के लिए ऐसे ही एक पौधे से रिक्वेस्ट की। पहले तो बिजी होने का बहाना मारा, पर फिर राजी हो गया। पेश है बातचीत के खास अंश :

रिपोर्टर : बड़े मुस्कुरा रहे हों? कोई अच्छी वजह?

पौधा : आप लोगों के अच्छे दिन आए या न आए, हमारे तो आ गए महाराज। मानसून जो आ गया। अब हर जगह हमारी पूछ-परख बढ़ गई है। हमारे नाम पर तो कई कैम्पेन भी शुरू गए हैं। क्या नेता, क्या अफसर, सब हमारा ही नाम जप रहे हैं।

रिपोर्टर : कौन-सी प्रजाति के पौधे हैं आप?

पौधा : अरे यार, ये जाति-वाति का रोग तो हमारे यहां मत फैलाओ। हम किसी भी जाति के हो, धर्म एक है वातावरण को खुशगवार बनाना, न कि तनाव पैदा करना, जैसे धर्म के नाम पर तुम्हारे यहां होता है।


रिपोर्टर : चलिए, प्रजाति छोड़ते हैं। फल तो लगेंगे ना आपमें?

पौधा : फिर इंसानों टाइप की ओछी बात कर दी ना आपने। हम फलों की चिंता भी नहीं करते। आप ही लोग करते हों। देख लो ना, कैसे मप्र, राजस्थान में आपके नेता लोग ‘फल’ की इच्छा में इधर से उधर हो रहे हैं।


रिपोर्टर : अच्छा, इस समय तो आपको लोग खूब हाथों-हाथ ले रहे हैं।

पौधा (एटिट्यूड में) : ये तो है। पर कभी-कभी क्या होता है कि हमारे सामने इतने लोग आ जाते हैं कि जब अगले दिन अखबार में तस्वीर छपती है तो उसमें बस मैं ही नहीं होता। पीछे छिप जाता हूं।


रिपोर्टर : आप अपना भविष्य कैसे देखते हैं?

पौधा : वैसे तो हम वर्तमान में ही खुश रहने वाले सजीव हैं। पर अपने पुरखों के साथ जिस तरह से हादसे हुए, उनसे भविष्य को लेकर जरूर थोड़ा-थोड़ा डर भी लगता है।


रिपोर्टर : क्यों, पुरखों के साथ क्या हुआ?

पौधा : अब आप बनने की कोशिश तो मत कीजिए। आप लोग ही तो हो जिम्मेदार हों। रोप भर देते हों। फोटो-वोटो, सेल्फी-वेल्फी के बाद फिर भगवान भरोसे छोड़ देते हों। पनप भी गए तो आठ-दस साल बाद कभी सड़क के लिए, कभी मेट्रो के लिए तो कभी किसी भवन के लिए हमारी बलि ले लेते हों।


रिपोर्टर : तो हम इंसानों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

पौधा : यही कि भैया, हमारी चिंता भले मत करो। अपनी ही कर लो। इंसान तो बड़ा स्वार्थी है। तो अपना स्वार्थ समझकर ही कर लो। हम न रहेंगे, तो आप भी न रहोंगे, समझ लेना।


रिपोर्टर : बस आखिरी सवाल।

पौधा : अब भैया बस करो। उधर नेताजी और उनके छर्रे आ गए हैं। फोटोग्राफर इशारा कर रहा है। मैं चलता हूं। नमस्कार।

सोमवार, 20 जुलाई 2020

Corona Jokes : जब KBC में वायरस पर आएगा ऐसा मजेदार सवाल

कोरोना जोक्स corona jokes
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#corona #lockdown #jokes #humor

Funny Interview : पौधे की पीड़ा...पौधरोपण की तस्वीर में बस हम ही ना होते!


plant पौधरोपण पौधा

By Jayjeet

कोने में रखी काली थैलियों में पौधे पड़े-पड़े मुस्करा रहे थे। रिपोर्टर भी मुस्कुराया। शिकार मिल गया था। तुरंत इंटरव्यू के लिए एक पौधे से रिक्वेस्ट की। पहले तो बिजी होने का बहाना मारा, फिर राजी हो गया। पेश है बातचीत के खास अंश :

रिपोर्टर : बड़े मुस्कुरा रहे हों? कोई अच्छी वजह?
पौधा : आप लोगों के अच्छे दिन आए या न आए, हमारे तो आ गए महाराज। मानसून जो आ गया। अब हर जगह हमारी पूछ-परख बढ़ गई है। रोज अखबार में तस्वीर छपती है।

रिपोर्टर : अच्छा, इस समय तो आपको लोग खूब हाथों-हाथ ले रहे हैं।
पौधा : हां, बताया तो सही कि खूब अखबार में छप रहे हैं। पर कभी-कभी क्या होता है कि हमारे सामने इतने लोग आ जाते हैं कि जब अगले दिन अखबार में तस्वीर छपती है तो उसमें बस मैं ही नहीं होता।

रिपोर्टर : कौन-सी प्रजाति के हैं आप?
पौधा : ये जाति-वाति का रोग तो हमारे यहां मत फैलाओ। हम किसी भी जाति के हो, धर्म एक है वातावरण को खुशगवार बनाना, न कि तनाव पैदा करना, जैसे धर्म के नाम पर तुम्हारे यहां होता है।

रिपोर्टर : चलिए, प्रजाति-वजाति छोड़ते हैं। फल तो लगेंगे ना आपमें?
पौधा : फिर इंसानों टाइप की ओछी बात कर दी ना आपने। हम फलों की चिंता भी नहीं करते। आप ही लोग करते हों। देख लो ना, कैसे राजस्थान में आपके नेता लोग ‘फल’ की जुगाड़ में इधर से उधर हो रहे हैं।

रिपोर्टर : बस आखिरी सवाल।
पौधा : अब भैया बस करो। उधर नेताजी और उनके छर्रे आ गए हैं। फोटोग्राफर इशारा कर रहा है। मैं चलता हूं। नमस्कार
#satire #Humor

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मंगलवार, 14 जुलाई 2020

Humor : राहुल गांधी ने बीजेपी अध्यक्ष नड्‌डा को चिट्‌ठी लिखकर उनसे क्या मांगा?

rahul gandhi jokes satire on congress

By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। राजस्थान में बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच राहुल गांधी ने जेपी नड्‌डा को एक चिट्‌ठी लिखकर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस की ओर से कुछ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का आग्रह किया है। राहुल ने लिखा - आप लोग तो पुराने अनुभवी हैं, बल्कि यह आपका लोकतांत्रिक दायित्व भी है... (पढ़ें पूरी चिट्‌ठी नीचे...)

प्रति
श्री जेपी नड्‌डा जी
अध्यक्ष, बीजेपी और वरिष्ठ कार्यकर्ता, पूर्व विपक्षी पार्टी

विषय : पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस की ओर से प्रदर्शन करने बाबत।

महोदय,
सेवा में नम्र निवेदन है कि इस समय देश में दो घटनाएं बड़ी तेजी से घटित हुई हैं। एक, पेट्रोल-डीजल के दामों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो रही है। वहीं दूसरी ओर राजस्थान में हमारी सरकार के खिलाफ बगावत हो गई है। हमारी प्राथमिकता सरकार बचाना है, लेकिन पेट्रोल-डीजल जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे की भी अनदेखी नहीं कर सकते। ऐसे में महोदय से निवेदन है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ हमारे लिए कुछ प्रदर्शन आउटसोर्स करने का कष्ट करें।आप जो भी प्रदर्शन या विरोध करेंगे, उसे हमारा भरपूर नैतिक समर्थन रहेगा। अगर वक्त मिला, राजस्थान के हालात में कुछ सुधार नजर आया और साथ ही कुछ बैलगाड़ियों की व्यवस्था हो गई तो हम कांग्रेसी भी एक दो विरोध मार्च निकालने का प्रयास जरूर करेंगे।

उम्मीद है देश के लोकतंत्र को बचाने की खातिर आप अपने इस प्रमुख लोकतांत्रिक दायित्व से मुंह नहीं मोड़ेंगे।

आपका ही प्रिय
राहुल


क्या रहा बीजेपी का रिएक्शन?
नड्डा ने पत्र की यह बात अमित शाह को बताई है। सूत्रों के अनुसार शाह ने कहा है कि बीजेपी हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों की पक्षधर पार्टी रही है। लोकतंत्र की खातिर हमें संकट की इस घड़ी में कांग्रेस की मदद करनी चाहिए।

#rahul_gandhi #rajasthan_political_crisis #petrol_diesel_price #Nadda  #humor #satire

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सोमवार, 13 जुलाई 2020

#CbseResults2020 : स्टूडेंट के 500 में से आए केवल 500 नंबर, सदमे में पूरी फैमिली

depressed student cbse results jokes satire


By Jayjeet

नई दिल्ली। CBSE की बारहवीं परीक्षा के गुरुवार को घोषित नतीजों के बाद से ही अलकापुरी स्थित एक घर में मातम पसरा हुआ है। यह घर एक निजी कंपनी में मैनेजर आरके शर्मा का है। इनके बच्चे सौरभ ने शर्मा परिवार को कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं छोड़ा है। साइंस स्ट्रीम के छात्र सौरभ के 500 में से केवल 500 नंबर आए हैं। शर्माजी को उम्मीद थी कि सौरभ 500 में से 501 नंबर आकर रिकाॅर्ड रचेगा, लेकिन वह इसमें असफल रहा। स्कूल की प्राचार्य ने भी कहा, “हमारी सारी उम्मीदें चूर-चूर हो गईं।”

हमारे इस संवाददाता ने आरके शर्मा से इस मामले में चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों ने बताया कि शर्माजी इस घटना के बाद से ही सदमे में हैं और बात करने की स्थिति में नहीं हैं। सौरभ के चाचा श्यामलाल शर्मा ने कहा, “हमें इस लड़के से बहुत उम्मीद थी, लेकिन इसने पूरे मोहल्ले और पूरे कुटुंब में हमारी नाक कटा दी।” इस बीच सौरभ की चाची ने कहा कि जो हो गया सो हो गया, लेकिन हमें सौरभ को भी संभालना चाहिए। कहीं वह कुछ उलटा-सीधा न कर लें। इसके बाद से श्यामलाल अपने भतीजे पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

शर्माजी के पड़ोसी वैभव खन्ना ने बताया, “शर्माजी हमारी कॉलोनी की शान रहे हैं। मैं तो उन्हें शुरू से जानता हूं। उन्होंने केजी-1 से ही सौरभ का विशेष ख्याल रखा। इसके लिए उन्होंने तीन-तीन टीचरों को ट्यूशन पर रखा। मुझे याद है, जब बच्चे के 99 फीसदी अंक आए तो उन्होंने उसे दो दिन तक खाना तक नहीं दिया था। इसी का नतीजा रहा कि इसके बाद उसके हमेशा सौ फीसदी नंबर आए। ऐसे में अगर इस बार उन्होंने 500 में से 501 नंबर लाने की उम्मीद रखी थी तो यह सौरभ की जिम्मेदारी बनती थी कि वह अपने पिता के सपने को पूरा करता।” उन्होंने गहरी सांस भरते हुए कहा, “पता नहीं, ऐसे बच्चे इस देश को कहां ले जाएंगे!”

#CBSE_Results #Satire #CBSE_12ThResults #Humor

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रविवार, 12 जुलाई 2020

Satire : पिस्तौल का दुख, हीरोइन के बजाय दुनिया अब भी चरित्र अभिनेत्री ही मानती है

Vikas-Dubey encounter memes and jokes मीम्स जोक्स

By Jayjeet
वह पिस्तौल सैनेटाइजेशन के बाद कोने में पड़ी सुस्ता रही थी, जिसे छीनकर गैंगस्टर विकास दुबे भागा था। इतना बड़ा कांड हो जाने के बाद भी पिस्तौल की सुरक्षा में एक भी सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था। तो मौका देखकर यह जांबाज रिपोर्टर भी तुरंत पिस्तौल के पास पहुंच गया।
रिपोर्टर : राम राम पिस्तौल जी।
पिस्तौल : राम राम भैया, यहां क्या करने आए हो?
रिपोर्टर : आपका खास इंटरव्यू करने आए हैं।
पिस्तौल : क्यों? हमने ऐसा क्या तीर मार दिया, जो इंटरव्यू करने आ धमके?
रिपोर्टर : अरे, आपकी वजह से तो वह दुर्दांत गैंगस्टर मारा गया?
पिस्तौल : कौन? हमें ना याद आ रहा।
रिपोर्टर : अरे, वही विकासवा... भूल गई इतनी जल्दी?
(पिस्तौल को शायद याद आया कि उसे भी तो कहानी में चरित्र अभिनेत्री का रोल करने को कहा गया था। पर वह भूल गई थी। तो सपकपाकर बोली, हां हां याद आया। )
रिपोर्टर : भूल कैसे गई थी आप?
पिस्तौल : अब क्या है कि इतनी कहानियों में हम भाग ले चुकी हैं कि कई बार भूल जाती हैं कि हमसे किस कहानी के बारे में पूछा जा रहा है।
रिपोर्टर : तो कैसा लग रहा है आपको?
पिस्तौल : बहुत अच्छा लग रहा है। हम भी इस देश-दुनिया के काम आई,अच्छा क्यों ना लगेगा?
रिपोर्टर : नहीं, मतलब जब वह विकासवा आपको लेकर भाग रहा था तो उस समय क्या फील हो रहा था? थोड़ा डिटेल में बताइए ना।
पिस्तौल : तुम तो ऐसे पूछ रहे हो जैसे हम कोई छोकरिया है। तुम यह जानना चाहते हों कि जब वह हमें भगाकर ले जा रहा तो उस समय हम कैसा फील कर रही थी? तुम पत्रकार लोग कभी सुधरगो?
रिपोर्टर : हम तो बस अपने रीडर्स के हिसाब से पूछ रहे थे। नहीं तो हमको क्या मतलब। फिर भी थोड़ा सिक्वेंस तो बताइए कि कैसे छीना और क्या-क्या हुआ?
पिस्तौल : भई, हमसे मुंह मत खुलवाओ। बाकी का तो कुछ नहीं होगा, पर अगर पता चल गया कि कोई हमारे साथ जबरदस्ती कर रहा है, मतलब जबरन में हमारा मुंह खुलवाने का प्रयास कर रहा है तो कहीं तुम्हारा एनकाउंटर ना हो जाए।
रिपोर्टर : हमारा क्यों होगा? हम क्या कोई गैंगस्टर है?
पिस्तौल : तो तुम्हें क्या लगता है, सब एनकाउंटर गैंगस्टर के ही होते हैं?
रिपोर्टर : तुम हमें डरा रही हो। पर चलने से पहले एक आखिरी सवाल - हर बार कहानी में तुम्हारा ही अपहरण क्यों करवाया जाता है?
पिस्तौल : भई, यह तो स्क्रिप्ट राइटर्स से पूछो। हमारा काम एक्टिंग करना होता है तो हम वही करती है। बस, दुख इसी बात का होता है कि अब भी ये लोग हमें हीरोइन का दर्जा ये नहीं दे पाए हैं। बस, चरित्र अभिनेत्री ही मानकर चलते हैं। अच्छा भैया आप खिसक लो, फिर समझा रही हूं।

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Joke & Meme : अमिताभ बच्चन ने कोरोना से क्या कहा?

रविवार, 5 जुलाई 2020

शिक्षा विभाग का गुरु वशिष्ठ को नोटिस- हासिल करो बी-एड डिग्री अन्यथा .....



guru vashitha , guru purnima

By Jayjeet

नई दिल्ली/देवलोक। सरकार ने गुरु वशिष्ठ, गुरु द्रोणाचार्य और ऋषि सांदीपनी को एक नोटिस जारी कर अगले दो साल के भीतर बी-एड (या समकक्ष डिग्री) करने को कहा है। नोटिस में कहा गया है कि बी-एड न करने की दशा में पाठ्यपुस्तकों में से आप तीनों के नाम विलोपित कर दिए जाएंगे।

इस नोटिस की एक काॅपी hindisatire ने हासिल की है। इस नोटिस में कहा गया है कि देश में शिक्षा का अधिकार कानून को लागू हुए 10 साल बीत चुके हैं। इस कानून में क्वालिटी एजुकेशन के वास्ते शिक्षकों के लिए बी-एड (या समकक्ष डिग्री) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। नोटिस में लिखा गया, “बहुत ही खेद के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि आपको इतने मौके दिए जाने के बाद भी आप अब तक शिक्षण-प्रशिक्षण में कोई औपचारिक डिग्री हासिल नहीं कर सके। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आपकी क्वालिटी एजुकेशन में कोई आस्था नहीं है। फिर भी आपकी पूर्व प्रतिष्ठा के मद्देनजर सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 4 (बी) के प्रावधान को शिथिल कर आपको एक और मौका देने का फैसला किया है। आप तीनों को अप्रैल 2022 तक डिग्री हासिल करनी होगी। ऐसा न किए जाने पर आपके गुरु के दर्जे को खत्म कर दिया जाएगा। तदनुसार समस्त पाठ्यपुस्तको में से आपको विलोपित कर दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी आपकी होगी।”

फालोअप स्टोरी 1
नई दिल्ली/देवलोक। शिक्षा विभाग द्वारा अगले दो साल के भीतर बी-एड या समकक्ष डिग्री अनिवार्य रूप से हासिल करने की सूचना मिलते ही ऋषि वशिष्ठ सक्रिय हो गए। उन्होंने तत्काल शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर अपनी बढ़ती उम्र का हवाला देकर बी-एड डिग्री हासिल करने में असमर्थता जताई थी। सूत्रों के अनुसार केंद्र में अनुकूल सरकार होने के कारण वशिष्ठ को बी-एड या समकक्ष डिग्री हासिल करने की अनिवार्यता से मुक्त कर दिया गया है, लेकिन उन्हें इस संबंध में ऐसा प्रमाण-पत्र पेश करने को कहा गया है जिसमें स्वयं राम इस बात की पुष्टि करते हो कि गुरु वशिष्ठ ने उन्हें क्वालिटी एजुकेशन मुहैया करवाया था। इस प्रमाण-पत्र की तीन सत्यापित प्रतियां पेश करने को कहा गया है। प्रमाण-पत्र सत्यापन नियम- 22 की कंडिका 2 (ए) की उपकंडिका 4 (बी) के तदनुसार सत्यापन संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा अथवा कलेक्टर द्वारा प्राधिकृत अधिकारी के द्वारा ही जारी किया जाना चाहिए। इस प्रमाण पत्र के संदर्भ क्रमांक, जारी करने की तिथि व कार्यालय की सील तथा जारी करने वाले अधिकारी के नाम व पद का स्पष्ट उल्लेख होना आवश्यक है।

फालोअप स्टोरी 2 (लाइव रिपोर्ट)
फैजाबाद (उप्र)। शिक्षा विभाग द्वारा बी-एड या समकक्ष डिग्री की अनिवार्यता से मुक्ति के बाद ऋषि वशिष्ठ अपने शिष्य राम द्वारा प्रस्तुत प्रमाण-पत्र के सत्यापन के लिए फैजाबाद कलेक्टोरेट पहुंचे (अयोध्या का जिला मुख्यालय फैजाबाद है।)
ऋषि वशिष्ठ (एक बाबू से) : भैया, ये राम का प्रमाण-पत्र है। इसे सत्यापित करवाना है।
बाबू : क्या लिखा है।
ऋषि वशिष्ठ : यही कि मैंने उन्हें पढ़ाया, इसे सत्यापित करवाना है एडीएम साहेब से।
बाबू (अपने साथी कर्मचारी से) : देखो, कैसे-कैसे लोग आ जाते हैं। (फिर ऋषि वशिष्ठ से) : राम को साथ लाए क्या?
ऋषि वशिष्ठ : अरे वो कैसे आ सकते हैं? उन पर तो पूरे संसार का भार है। उसे छोड़कर यहां आना तो संभव नहीं है।
बाबू : बाबा, एडीएम साहेब ऐसे तो सत्यापित करेंगे नहीं। नियमानुसार फिजिकल प्रजेंटेशन होना जरूरी है।
ऋषि वशिष्ठ : और कोई रास्ता?
बाबू : पीछे बड़े बाबू बैठे हैं, उनसे मिल लो।
ऋषि वशिष्ठ बड़े बाबू के पास पहुंचे। अपनी पूरी कहानी सुनाई।
बड़े बाबू (कुछ सोचते हुए) : चलो, आप बुजुर्ग हैं और आपकी कहानी पर भरोसा भी कर लेते हैं, लेकिन हमें तो नियम से चलना होगा ना। राम का कोई प्रूफ तो चाहिए ना। कोई आईडी प्रूफ है क्या?
ऋषि वशिष्ठ : ये क्या होता है?
बड़े बाबू : यही कोई आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड। ड्राइविंग लाइसेंस तो होगा ही?
ऋषि वशिष्ठ : इसमें से कुछ नहीं है।
बड़े बाबू : कमाल है! अच्छा, एक काम करो, बाहर बबलू बैठा है, उससे मिल लो, काम हो जाएगा।
ऋषि वशिष्ठ : ये बबलू कौन है? कहां मिलेगा?
बड़े बाबू : कोई भी बता देगा, पूछ लो। अब मेरा टाइम वेस्ट मत करो, जाओ।

फालोअप स्टोरी 3 
फैजाबाद का सबसे फेमस दलाल है बबलू। बाबू से लेकर बड़े बाबू और तमाम अफसराें से बड़े मधुर संबंध हैं।
ऋषि वशिष्ठ : बबलू भैया, हमें राम का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है।
बबलू : कहां है राम?
ऋषि वशिष्ठ : वो नहीं है, तभी तो आपके पास भेजा गया है।
बबलू : वो हाेता तो भी मेरे पास ही आना पड़ता। अब नहीं है तो इसके एक्स्ट्रा लगेंगे।
ऋषि वशिष्ठ : क्या एक्स्ट्रा?
बबलू (गुस्से में): अरे बाबा, पैसा और क्या?
ऋषि वशिष्ठ : क्या? सरकारी काम के भी यहां पैसे लगते हैं?
बबलू (हंसते हुए) : अरे बाबा, क्या दूसरी दुनिया से आए हों? यहां हर चीज के पैसे लगते हैं।
ऋषि वशिष्ठ : ठीक है, पर काम तो हो जाएगा ना!! मेरे पास कोई और दस्तावेज-वस्तावेज नहीं है।
बबलू : पैसा तो है ना, हो जाएगा।

फालोअप स्टोरी 4
नई दिल्ली/देवलोक। गुरु वशिष्ठ द्वारा वांछित दस्तावेज पेश करने के बाद शिक्षा विभाग ने यह मान लिया है कि वे उतने ही समर्थ शिक्षक हैं, जितने कि बीएड या समकक्ष डिग्री धारक होते हैं। इसलिए अब पाठ्यपुस्तकों से उनका नाम विलोपित करने की जरूरत नहीं है। इस संबंध में जल्दी ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इस बीच, शिक्षा विभाग ने गुरु द्रोणाचार्य और ऋषि सांदीपनी को रिमाइंडर भेजकर दो सप्ताह के भीतर संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने को कहा है।

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Jokes : गुरु पूर्णिमा गुरुजी और वाट्सएपिया शिष्य

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गुरुवार, 2 जुलाई 2020

जमीन का जवाब जमीन से : सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा को चीन में दिया फ्रीहैंड

चीन जाने की तैयारी करते हुए रॉबर्ट वाड्रा।

By Jayjeet

हिंदी सटायर/ग्लोबल टाइम्स। मोदी सरकार ने ‘जमीन का जवाब जमीन से’ देने की योजना के तहत रॉबर्ट वाड्रा को चीन में फ्रीहैंड देने का निर्णय लिया है। भारत के इस फैसले से चीन के सत्ता के गलियारों में भारी खलबली मच गई है। प्रमुख चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार इससे भयभीत चीन ने प्रस्ताव दिया है कि अगर भारत वाड्रा को हमारी सीमाओ से दूर रखे वह पूरा अक्साई चीन भारत को लौटाने को तैयार है।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय ने अपने एक सीक्रेट कम्युनिकेशन में चीन को धमकाया था कि अगर वह जमीन हड़पने की अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो राबर्ट वाड्रा को चीन भिजवाकर वहां उन्हें फ्रीहैंड दे दिया जाएगा। इस धमकी से भयभीत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आनन-फानन में अपने वरिष्ठ लीडर्स और सेना के आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय मीटिंग की। इस मीटिंग में सहमति बनी कि अक्साई चीन की कुछ हजार वर्ग किमी जमीन के चक्कर में पूरे चीन को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। चीनी सूत्रों के अनुसार चीन ने प्रस्ताव रखा है कि हम भारत को उसके कब्जे वाला पूरा क्षेत्र लौटा देंगे और फिर आइंदा उसकी तरफ तिरछी नजर से भी ना देखेंगे। बस भारत को वाड्रा को चीन की सीमा से एक हजार किमी दूर रखना होगा।

अब चीन को समझ में आएंगे दामादजी के असली मायने :

सरकार के इस निर्णय का वाड्रा ने भी स्वागत किया है। उन्होंने ट्विट करते हुए कहा- “मेरे लिए इससे बड़े गर्व की बात और क्या होगी कि मैं देश के काम आ सकूं। अब चीन को पता चलेगा कि दामादजी का असली मतलब क्या होता है।”

(Disclaimer : यह खबर शुद्ध कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और राजनीतिक कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)

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Satire & Humour : जब बाबा रामदेव को नोबेल पुरस्कार मिलते-मिलते रह गया! क्यों और कैसे? एक सच्ची कहानी!



By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। पतंजलि द्वारा कोराना की दवा ‘कोरोनिल’ बनाने के दावे के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उन्हें नोबेल पुरस्कार देने की वकालत कर रहे हैं, कुछ मजाक में तो कुछ सच्ची में। हिंदी सटायर को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार बाबा रामदेव तो पिछली बार ही इस अवार्ड के लिए प्रबल दावेदार थे। लेकिन उन्हें अवार्ड मिलते-मिलते रह गया। दरअसल, इसका खुलासा तब हुआ, जब हमारा उत्साही रिपोर्टर इस संबंध में बात करने के लिए नोबेल कमेटी के पास पहुंच गया। वहां बैठे एक सूत्र से बात की तो उसने तफ्सील से पूरी जानकारी दी।

रिपोर्टर : बाबाजी ने कोरोना की दवा ‘कोरोनिल’ बना ली है। अब तो चिकित्सा का नोबेल उन्हें मिल ही जाना चाहिए।

नोबेल कमेटी का सूत्र :  अरे आपको नहीं मालूम, नोबेल तो उन्हें पिछले साल ही मिल जाता, पर एक लोचा हो लिया।

रिपोर्टर : ऐसा कौन-सा लोचा हो लिया?

सूत्र : अब क्या बताएं। बाबा रामदेव जी ने खुद को चार-चार कैटेगरी में नॉमिनेट करवा लिया था।

रिपोर्टर : अरे, कैसे? और ये चार कौन-सी कैटेगरी हैं?

सूत्र : एक, चिकित्सा के लिए।

रिपोर्टर : हां, इसमें तो बहुत टॉप का काम कर रहे हैं अपने बाबाजह। इसमें तो मिलना ही था। पर दूसरी कैटेगरी में और कहां टांग घुसा ली इन्होंने?

सूत्र : यही तो प्रॉब्लम हो गई। उन्हें मुगालता हो गया कि 5 रुपए से कारोबार को बढ़ाकर 5 हजार करोड़ का कर लिया तो इकोनॉमी के लिए अवार्ड मिलना चाहिए।

रिपोर्टर : अच्छा! इसके अलावा?

सूत्र : आपको याद होगा कि बाबाजी ने एक बार ‘ओम शांति ओम’ शो में भी काम किया था। तो उन्होंने पीस के लिए भी अप्लाई कर दिया। इतना ही नहीं, किसी ने बाबा को कह दिया कि आप तो केमिस्ट्री में भी माहिर हैं- योग एंड पॉलिटिक्स की केमिस्ट्री। बस, बाबाजी ने यहां भी टांग घुसेड़ दी।

रिपोर्टर : तो इससे क्या हो गया?

सूत्र : चार-चार नॉमिनेशन से कमेटी वाले चकरा गए। कुछ लोग उन्हें चारों में अवार्ड देने की बात करने लगे कुछ उनका विरोध। बस, कमेटी में इतना कन्फ्यूजन पैदा हो गया कि बाबाजी को नोबेल अवार्ड आगे के लिए टाल दिया गया।

(Disclaimer : यह केवल काल्पनिक इंटरव्यू है। केवल हास्य-व्यंग्य के लिए लिखा गया है। कृपया समर्थक और विरोधी दोनों टेंशन ना लें… )

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China-Issue : हम मानें या ना मानें, लेकिन हममें से कोई भी इतना राष्ट्रभक्त नहीं हैं...🤔🤔

(क्योंकि राष्ट्रभक्ति केवल नारों से तय नहीं होती... )
By Jayjeet

चाइनीज एप्स पर बैन को लेकर हर जगह माहौल उतना ही खुशगवार है जितना मानसून के आगमन पर होता है। लेकिन क्या हम एप्स पर बैन करने मात्र से चीन को मात दे सकते हैं? और क्या इसे छोटी-सी शुरुआत भी मान सकते हैं?
माफ कीजिएगा। अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो यह निरी मासूमियत है, क्योंकि ऐसा तो सरकार भी नहीं सोच रही। सरकार, भले ही वह मोदी सरकार भी क्यों न हो, को चलाने के लिए कई ब्रेन काम करते हैं और सभी जानते हैं कि ब्रेन कभी भी भावनाओं के वशीभूत नहीं होते। वे व्यावहारिक राजनीति और कूटनीति से ड्राइव होते हैं। इस कूटनीति और राजनीति को समझना हम जैसों के लिए इतना आसान नहीं है। इसलिए इस कठिन चीज को छोड़कर किसी सरल चीज पर बात करते हैं।
मुझे चीन से व्यक्तिगत तौर पर कोई प्रेम नहीं है। हममें से अधिकांश को नहीं है। पर हां, हममें से अधिकांश को चाइनीज सामान से आज भी बेपनाह मोहब्बत है। सबूत चाहिए? आज भी हमारे देश में जो मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बिक रहे हैं, उनमें 80 फीसदी से अधिक चाइनीज हैं। जितने समय में ( करीब 3 मिनट में) आप मेरी यह पोस्ट पढ़ेंगे, उतनी देर में हम 500 से अधिक चाइनीज फोन खरीद चुके होंगे। इकोनॉमिक टाइम्स के एक लेटेस्ट सर्वे की मानें तो चाइनीज फोन की ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों की बिक्री में धैले भर का भी फर्क नहीं पड़ा है, चीनी उत्पादों के बहिष्कार के आह्वान के बावजूद।
और जो लोग चाइनीज स्मार्टफोन या गैजेट्स खरीद रहे हैं, वे कोई देशद्रोही नहीं हैं। क्योंकि इस पोस्ट को हममें से अधिकांश लोग चाइनीज गैजेट्स पर ही पढ़ रहे हैं और हम इस बहाने की आढ़ भी नहीं ले सकते कि अभी खरीद लिया, पर आगे से ना खरीदेंगे। सच तो यह है कि आगे भी हम चाइनीज फोन ही खरीदेंगे....दिवाली पर चाइनीज सीरीज ही खरीदेंगे... होली पर चाइनीज पिचकारियां ही खरीदेंगे...!!! बशर्ते....
बशर्ते ... अगर हमारे हिंदुस्तानी मैन्युफैक्चरर अब भी ऊंचे दामों पर घटिया माल ही हमें बेचते रहे, अब भी अगर हमारे मैन्युफैक्चरर Value for Money का मंत्र ना समझ पाए...। क्योंकि लोहियाजी के शब्दों में कहें तो भले ही हम हिंदुस्तानी दुनिया की सबसे ढोंगी कौम हो, जो एप्स के बैन होने पर तालियां ठोंक सकती है, लेकिन इतनी मूर्ख भी नहीं है कि इंडियन मैन्युफैक्चरर्स कुछ भी बनाकर हमें कितने भी दामों पर टिकाते रहें...।
तो इसका रास्ता क्या है? 'Boycott चाइनीज प्रोडक्ट्स' तो बिल्कुल भी नहीं। यह नारा न हमारी मदद कर पाएगा, न हमारे देश की। यह नेगेटिव नेरेटिव है। इसके बजाय केवल एक ही नारा होना चाहिए - 'Buy इंडियन प्रोडक्ट्स।' इसमें कहीं नेगेटिव नेरेटिव नहीं है। यानी मेरे देश का मैन्युफैक्चरर चीन के नाम पर डराकर मुझे प्रोडक्ट नहीं बेच रहा, बल्कि वह मुझे प्रोडक्ट इसलिए बेचेगा क्योंकि उसका प्रोडक्ट Value for Money है। इस Value for Money को समझना जरूरी है क्योंकि यही चीनी सफलता का मंत्र है। चीन के प्रोडक्ट कोई बहुत महान नहीं होते, लेकिन वे पैसा वसूल होते हैं। अगर कोई चीनी गैजेट 10 हजार रुपए में मुझे जो कुछ दे रहा है, वह अगर मुझे ग्यारह हजार में भी मिलेगा तो मैं खरीद लूंगा, क्योंकि मैं इतना भी देशद्रोही नहीं हूं। लेकिन यह नहीं हो सकता कि उसके लिए मुझे 20 हजार खर्च करने पड़े। इतना राष्ट्रभक्त भी मैं नहीं हूं। और आप मानें या ना मानें, आप भी नहीं हैं, ग्लोबलाइजेशन के दौर में कोई नहीं है, कम से कम वह तो कतई नहीं है तो ईमानदारी से चार पैसे कमा रहा है। उसे चाहिए ही चाहिए - Value for Money...
रास्ता वही है जो जापानियों ने दिखाया है - 80 सालों में बगैर हल्ला-गुल्ला किए उसने मैन्युफैक्चरिंग के कई क्षेत्रो में उसी अमेरिका पर बढ़त हासिल की है, जिसने कभी उसके दो शहरों को नेस्तनाबूद कर दिया था। वहां के लोगों ने कभी बैन का हल्ला नहीं किया। हमारे पास भी यही रास्ता है, बैन नहीं क्योंकि नारे कभी टिकाऊ नहीं हो सकते।
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