बुधवार, 12 जून 2019

Satiire : हिंदी के भक्तिकाल की तर्ज पर सिलेबस में जुड़ेगा नया अध्याय – राजनीति का भक्तिकाल

modi bhakti satire


By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क, नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की दोबारा सत्ता में वापसी के बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक नई पहल की है। इसके तहत हिंदी के भक्तिकाल की तर्ज पर पाठ्यक्रमों में ‘राजनीति का भक्तिकाल’ नाम से एक नया अध्याय जोड़ा जा रहा है। इस अध्याय की एक कॉपी hindisatire के भी हाथ लगी है। इसके मुख्य अंश हम अपने रीडर्स के लिए पेश कर रहे हैं :

‘राजनीति का भक्तिकाल’ पाठ के मुख्य अंश : 


भारतीय राजनीति में भक्तिकाल का आरंभ ईस्वी 2014 (संवत् 2071) से माना जाता है। मोदी भक्त इतिहासकार (जो साेशल मीडिया की देन रहे हैं) इसे भारतीय राजनीतिक शासन व्यवस्था का श्रेष्ठ काल मानते हैं। वैसे भक्तिकाल की धारा का उद्गम सन् 2001 से होता है जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात की बागडोर संभाली थी। लेकिन साल 2012 में चौथी बार मुख्यमंत्री बनने और 2013 में पीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने के बाद से भक्तिकाल की यह धारा फूट-फूटकर बहने लगी। 2014 के बाद से तो सोशल मीडिया पर भक्तों ने ऐसी भक्ति पेली कि कृष्ण के सूरदास, राम के तुलसीदास जैसे दासों की भक्ति तक फीकी पड़ गई। भक्ति की पिलाई करते समय न जात का फर्क रखा, न पांत का :

जाति-पांति पूछे नहिं कोई।
मोदी को भजै सो मोदी का होई।

इस काल में मोदी भक्ति की कई रचनाएं रची गई हैं जो अविस्मरणीय है :

भक्ति जो सीढ़ी मुक्ति की, चढ़ै मोदी भक्त हरषाय।
और न कोई चढ़ि सकै, लात दे गिराय।।

यानी कवि कहता है कि मोदी का जो भक्त मोदी भक्ति नामक सीढ़ी चल लेता है, वह हमेशा प्रसन्नचित्त रहता है। लेकिन जो चढ़ने में हिचक करता है, तो सीढ़ी के ऊपरी पायदान पर बैठे मोदी भक्त उसे लात मारकर और भी नीचे गिरा देते हैं।)

मोदी की भक्ति बिन, अधिक जीवन संसार।
धुवाँ का सा धौरहरा, बिनसत लगै न बार।।

यानी कवि कहता है कि मोदी की भक्ति के बिना संसार में जीना धिक्कार है। यह माया (वती) तो धुएं के महल के समान है। इसके खतम होने में समय नहीं लगता।

दो तरह की होती है भक्ति : 

इतिहासकारों ने मोदी के प्रति भक्ति को सगुण भक्ति माना है। यानी वह भक्ति जो गुणों की वजह से की जाती है। लेकिन इसी दौरान निर्गुण भक्ति का भी एक दौर चला है। राजनीति में एक खास परिवार के प्रति भक्ति को इतिहासकार निर्गुण भक्ति मानते हैं। यानी वह भक्ति, जो गुणों की वजह से नहीं, परिवार के कारण की गई।

(और भी मजेदार खबरी व्यंग्य पढ़ने के लिए हिंदी खबरी व्यंग्यों पर भारत के पहले पोर्टल hindisatire.com पर क्लिक करें ...)



शनिवार, 1 जून 2019

Humor : गर्मी से राहत दिलाने भाजपा व कांग्रेस ने केजरीवाल से की मफलर धारण करने की मांग


arvind kejriwal funny photo with AAP cap

By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। देश के लोगों को गर्मी से निजात दिलाने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अरविंद केजरीवाल से यथाशीघ्र मफलर धारण करने की मांग की है। इन दाेनों राष्ट्रीय पार्टियों का मानना है कि इस समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा आम लोगों को गर्मी से राहत दिलाना है। ऐसे में केजरीवाल का मफलर ही सूरज को कन्फ्यूज कर गर्मी के तेवर को कम कर सकता है।


भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा और कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने अलग-अलग टीवी चैनलों पर हुई चर्चाओं के दौरान ये मांग की। सांबित पात्रा ने कहा, “इस समय दिल्ली समेत पूरा देश भीषण गर्मी से परेशान हैं, लेकिन केजरीवाल बिजली सस्ती करने में लगे हुए हैं। अगर केजरीवाल को वाकई आम लोगों की चिंता है तो उन्हें तुरंत मफलर धारण करना चाहिए।”

उधर, कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने भी कहा कि राष्ट्रहित में दलीय मतभेदों को ऊपर रखकर कार्य करना कांग्रेस की संस्कृति रही है। इसीलिए भाजपा से वैचारिक मतभेद होने के बावजूद हम भी श्री केजरीवाल जी से मफलर धारण करने का आग्रह करते हैं। अखिलेश प्रताप ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इतना महत्वपूर्ण मसला होने के कारण ही वे कांग्रेस हाईकमान की विशेष अनुमति से टीवी पर आए हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने अगले एक माह के लिए अपने प्रवक्ताओं के टीवी बहस में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा रखा है।

केजरीवाल ही अंतिम उम्मीद :
इस बीच विशेषज्ञाें ने भी कहा है कि इस समय तो केवल अरविंद केजरीवाल से ही उम्मीद जताई जा सकती है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. रमण पुजारी ने hindisatire से कहा, “हालांकि इस साल केजरीवाल ने ठंड में मफलर धारण नहीं किया, फिर भी सूरज पर मफलर इम्पैक्ट बाकी है। इसी के चलते केजरीवाल के मफलर धारण करते ही सूरज को एहसास होने लगेगा कि यह तो ठंड का मौसम है और इस मौसम में इतनी गर्मी ठीक नहीं है। इस तरह कन्फ्यूज होकर सूर्य देवता अपना तेज कम कर देंगे।”

(और भी मजेदार खबरी व्यंग्य पढ़ने के लिए हिंदी खबरी व्यंग्यों पर भारत के पहले पोर्टल hindisatire.com पर क्लिक करें ...)