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सोमवार, 7 दिसंबर 2020

Exclusive : कोरोना की जिंदगी में भी शुरू हुआ स्यापा!


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By Jayjeet

कोरोना ने हम सब लोगों की जिंदगी में तूफान मचा रखा है, लेकिन देवउठनी एकादशी के बाद से अब यह तूफान कोरोना (corona) की जिंदगी में उठ रहा है। वजह - उसने कोरोनी से शादी जो कर ली। कोरोना की जिंदगी में क्या स्यापा चल रहा है, आइए सुनते हैं कोरोना और उसकी धर्मपत्नी यानी कोरोनी की यह बातचीत। बहुत ही गोपनीय ढंग से रिकॉर्ड की गई इस बातचीत की एक्सक्लूसिव सीडी केवल हमारे पास ही है :

कोरोना : हे कोरोनी, तुमने ये इतना बड़ा-सा घुंघट क्यों डाल रखा है?

कोरोनी : आपसे हमें संक्रमण ना हो जाए, इसी खातिर...

कोरोना : अरे, जबसे तुमसे शादी हुई है, तबसे हममें संक्रमित करने की ना तो इतनी ताकत बची, ना इतना समय..

कोरोनी : तो इसमें हमें काहे दोष देते हों? हमने ऐसा क्या किया?

कोरोना : क्या किया? सुबह से ही बिस्तर पर बैठे-बेठे ऑर्डर देने लगती हो, चाय बनी क्या? नाश्ता बना क्या? चाय-नाश्ता बनाकर फारिग होता ही हूं कि आलू-प्याज की रट लगा देती हो। बस, थैला उठाए आलू-प्याज और सब्जी लेने निकल जाता हूं। लोगों को संक्रमित क्या खाक करुं?

कोरोनी : देखिए जी, अब ये तो ज्यादा हो रही है... अरे और दूसरे हस्बैंड लोग भी तो हैं। वे अपने पड़ोस में शर्माजी को ही देखो..

कोरोना : शर्माजी, कौन शर्माजी?

कोरोनी : वही शर्माजी, जिनको तुमने हमारी इन्गेजमेंट के दिन ही संक्रमित किया था, भूल गए क्या? देखो उनको भी तो, कैसे बीवी के इशारों पर नाचते हैं, पर बॉस की भी पूरी हाजिरी लगाते हैं। ऐसे एक नहीं, कई लोग हैं जो बीवी और बॉस दोनों की चाकरी पूरे तन-मन से करते हैं और मुंह से उफ्फ तक नहीं निकलाते। और एक तुम हो कि बीवी जरा-से काम क्या बताती, उसी में चाइना वाली नानी याद आने लगती है.... काम धाम कुछ नहीं, शो-बाजी तो पूछो मत...

कोरोना (गुस्से में) : क्या काम-धाम ना करता हूं, बताओ‌ तो जरा? सुबह उठकर चाय-नाश्ता तैयार मैं करता हूं, सब्जी-वब्जी मैं लाता हूं। दोनों टाइम के बर्तन मैं साफ करता हूं। तंग आ गया मैं तो ... घर-गृहस्थी के चक्कर में अपना असली काम ही भूल गया... देखो, कैसे लोग बिंदास बगैर मास्क लगाए घूम रहे हैं, जैसे मुझे चिढ़ा रहे हों कि आ कोरोना आ... पर अब ताकत ही ना बची ...

कोरोनी (मामले को शांत करते हुए) : अरे जानू, तुम तो नाराज हो गए। अच्छा, चलो आज डिनर में खिचड़ी मैं बना दूंगी। .... और सुनो जी, गांधी हॉल में साड़ी की सेल शुरू हुई है। उसमें हजार-हजार की साड़ी पांच-पांच सौ में मिल रही है। चलो ना वहां, तुम्हारा भी मूड फ्रेश हो जाएगा...

कोरोना (सीने में हाथ रखते हुए) : हे भगवान, क्यों सेल का नाम लेकर मेरा बीपी बढ़ा रही हो? उधर, वैक्सीन अलग आ रही है। मेरे लिए तो जिंदगी में टेंशन ही टेंशन है...

कोरोनी : हाय दैया, ये वैक्सीन कौन हैं? हमारी सौत है क्या?

कोराना : अरे, हम थोड़ी ला रहे हैं। सरकार ला रही हैं। हमें नाकारा बनाने के लिए...और ये कोई सौत-वौत नहीं है, ये तो...

कोरोनी (बीच में ही बात काटते हुए) : हम सरकार से कह देंगे कि कोनो वैक्सीन-फैक्सीन को लाने की जरूरत नहीं है। हम कम है क्या? .. अब टेंशन छोड़ो और तैयार हो जाओ, नहीं तो वो सेल में अच्छी-अच्छी साड़ियां खतम हो जाएगी...

और कोरोना 'जी जी' करते हुआ तैयार हुआ और कंधे झुकाए निकल पड़ा बाइक स्टार्ट करने ...

बुधवार, 25 नवंबर 2020

Satire & Humour : कोरोना को नाकारा करने की प्लानिंग, लैब में तैयार हो रही है सुशील-सुंदर कोरोनी

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By Jayjeet

Humour Desk . नई दिल्ली/पुणे। देवउठनी एकादशी का इंतजार खत्म होने के साथ ही कोरोना की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है। किसी शुभ मुहूर्त में कोराना को 'नाकारा' करने की प्लानिंग की जा रही है। इसके लिए निपुण, सुंदर व सुशील कोरोनी के विकास का काम लैब में जारी है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय में पदस्थ एक सूत्र ने बताया कि पिछले कई दिनों से हमें वैक्सीन से भी ज्यादा देवउठनी एकादशी का इंतजार था। उन्होंने यह खुलासा भी किया कि किसी भी लैब में कोई वैक्सीन वगैरह नहीं बन रही है। ये केवल कोरोना को भरमाने के लिए अफवाह भर हैं। बल्कि हर लैब अपने-अपने स्तर पर सुंदर व सुशील कोरोनी का विकास कर रही है। इसमें सबसे आगे भारत का सीरम इंस्टीट्यूम ऑफ इंडिया है।

तीसरे चरण की टेस्टिंग जारी : 

सीरम इंस्टीट्यूम ऑफ इंडिया के CEO अदार जूनावाला ने बताया कि उनके यहां जिस कोरोनी का विकास किया जा रहा है, उसके तीसरे चरण में रसोईघर की टेस्टिंग चल रही है। इस चरण में इस बात का परीक्षण किया जा रहा है कि कोरोनी कितनी खूबी से अपने होने वाले पति से बर्तन मंजवाने से लेकर सुबह की चाय-नाश्ता वगैरह तैयार करवा सकती है। अब तक के नतीजे उत्साहवर्धक रहे हैं। इससे पूर्व पहले चरण में कोरोनी का इस बात के लिए टेस्ट किया गया था कि वह कोरोना से फोन पर मिमियाने वाली आवाज में जी-जी निकलवा पाती है या नहीं। दूसरे चरण में इस बात की टेस्टिंग की गई थी कि साड़ी वगैरह की सेल की खबर से वह कोरोना का बीपी कितना बढ़ा पाती है। दोनों चरण में सफलता मिलने के बाद तीसरे चरण की टेस्टिंग जारी है। शुभ मुहूर्त खत्म होने से पहले ही हम भारतीय परिवेश के अनुकूल सुंदर व सुशील कोरोनी भारत सरकार को सौंप देंगे। उम्मीद है कि कोरोना की शादी के बाद उसकी बची-खुची ताकत भी खत्म हो जाएगी। इस तरह corona पूरी तरह से नाकारा हो जाएगा।

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शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

Satire & Humour : साइबेरियाई पक्षियों ने केजरीवाल को लिखी चिट्ठी, जानिए क्यों?

 

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By Jayjeet

Humour Desk. नई दिल्ली। ठंड के मौसम में रूस और कजाकिस्तान के इलाकों से भारत आने वाले साइबेरियाई पक्षियों ने अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर मफलर को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है। पिछले साल केजरीवाल ने अपना लोकप्रिय मफलर नहीं पहना था। इस वजह से पक्षी सर्दी को लेकर लंबे समय तक कंफ्यूज होते रहे और आधी ठंड निकल गई थी।

साइबेरियाई पक्षियों के आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा मुख्यमंत्री सचिवालय को लिखे पत्र की प्रति humourworld के भी हाथ लगी है। इस पत्र में लिखा गया है : “माननीय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी, हमारे साथी रूस और कजाकिस्तान से भारत देश की सीमा पर पहुंच गए हैं। वे भारत में ठंड की दस्तक का इंतजार कर रहे हैं। दो साल पहले तक आपका मफलर ही हमारे लिए संकेत होता था कि इंडिया में ठंड शुरू हो गई है। लेकिन पिछले साल आप कतिपय कारणों से मफलर नहीं पहन पाए। इस वजह से हमारी साथियों को ठंड का संकेत मिलने में काफी विलंब हो गया था जिससे वे कंफ्यूजिया गए थे और हमारा पूरा सिस्टम बिगड़ गया था।”

पत्र में आगे लिखा गया – मफलर पहनना या न पहचाना आपका लोकतांत्रिक अधिकार है। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे। लेकिन समय से पूर्व ही हमें यह बताना भी आपका दायित्व है कि आप मफलर पहनेंगे या नहीं, ताकि हम ठंड के संकेतों के लिए आपके मफलर पर डिपेंड नहीं रहे और कुछ अन्य तरीकों को एक्सप्लोर कर सके।’

इस बारे में विस्तार से जानकारी के लिए humourworld ने प्रवक्ता से फोन पर बातचीत की। प्रवक्ता ने हमें बताया कि वे रूस और कजाकिस्तान से ईरान और अफगानिस्तान को पार कर गए हैं। इस समय पाकिस्तान की स्वात घाटी के पास आराम फरमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार की तरह इस साल भी उनका टाइम खोटी न हो, इससे बचने के लिए उन्होंने समय रहते ही केजरीवालजी को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह कर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दो-चार दिन में उन्हें स्थिति क्लियर कर दी जाएगी।

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मंगलवार, 2 जून 2020

Humour : जब बर्फ में दबे मिले 7 वायरस… तो देखिए क्या हुआ!!!




By Jayjeet

(20 हजार साल बाद की दुनिया में देखिए क्या होगा… )

हिंदी सटायर डेस्क। वायरस हजारों सालों तक बर्फ में या सतह के नीचे सक्रिय अवस्था में रह सकते हैं। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है। तो इसी तथ्य के आधार पर आज टाइम मशीन से चलते हैं 20 हजार साल बाद धरती के एक हिस्से में ….

धरती के एक कोने में जहां कभी इंसान रहते थे, वहां AI संचालित रोबोट्स को बर्फ की सतह पर 7 वायरस मिले। वे रोबोट्स उन्हें पास की एक लैब में ले आए। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से उन्होंने तुरंत जान लिया कि ये वर्षों पहले यानी 2020 के वायरस हैं। हालांकि वे रोबोट थोड़े मंदबुद्धि टाइप के थे। इसलिए यह पता नहीं लगा सके कि वर्षों पहले वे किस स्थान पर दबकर अचेत हो गए थे। तो उन्होंने एक-एक वायरस को जागृत कर स्पेशल स्कैनिंग की तो उनके सामने ये दृश्य आए :

पहला वायरस : जागृत होते ही वह जोर-जोर से थाली बजाने लगा। साथ ही चिल्लाने भी लगा – गो कोरोना गो… गो कोरोना गो…

दूसरा वायरस : यह वायरस लगातार हिचकौले खा रहा था और गाए जा रहा था – झूम बराबर झूम शराबी, झूम बराबर झूम। और फिर एक तरफ लुढ़क गया।

तीसरा वायरस : यह वायरस बनियान व बरमूडा पहने हुए था और कंप्यूटर पर आंखें गढ़ाए हुए था। बीच-बीच में अंगड़ाइयां ले-लेकर फोन पर ही मीटिंग करने जैसी हरकतें कर रहा था।

चौथा वायरस : इस वायरस के हाथ में कोई पुराना जूठा-सा बर्तन था। जागृत होते ही वह घबराकर उसे साफ करने की कोशिश करने लगा।

पांचवां वायरस : इसके हाथ में मोबाइल था। वह ‘कोरोना’ नामक किसी जंतु पर बने घटिया जोक्स और ज्ञानवर्द्धक बातों को वाट्सएप नामक किसी प्लेटफार्म पर उछल-उछलकर फारवर्ड कर रहा था।

छठवां वायरस : यह अपनी उंगलियों पर बार-बार इस बात का हिसाब लगा रहा था कि 20 लाख करोड़ में जीरो कितने होते हैं। और हिसाब नहीं लगा पाने पर भन्ना रहा था।

सातवां वायरस : यह वायरस चुपचाप लगातार जार-जार आंसू बहा रहा था। उसके मुंह से बार-बार ये लफ्ज निकल रहे थे- हे मजदूरो, तुम मुझे माफ करना। मेरे कारण तुम्हें बहुत दिक्कत हुई।

वे मंदबुद्धि रोबोट उन्हें पहचान नहीं पाए कि ये सातों कहां के हैं। वायरस भी स्साले होशियार निकले। उन्होंने भी कुछ बताया नहीं। तो उन रोबोट्स ने इन वायरसों को खाकी ड्रेस पहने कुछ अन्य रोबोट्स के हवाले कर दिया। अब वे खाकी ड्रेस वाले रोबोट्स मार-कूटकर उनसे उगलवाने की कोशिश कर रहे हैं।

वैसे पाठकगण समझ ही गए होंगे कि ये वायरस किस जगह पर बर्फ के नीचे दबे होंगे और रोबोट्स भी कहां के होंगे…

(ऐसे ही मजेदार खबरी व्यंग्य पढ़ने के लिए आप हिंदी खबरी व्यंग्यों पर भारत की पहली वेबसाइट http://www.hindisatire.com पर क्लिक कर सकते हैं।)


शुक्रवार, 29 मई 2020

Humour : एक्ट्रेस के मुंह से अचानक गिरा मास्क, चेहरा देखकर सदमे में आया कोरोना



By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क, मुंबई। यहां गुरुवार को अपनी बॉलकनी में खड़ी एक एक्ट्रेस का मास्क अचानक नीचे गिर पड़ा। मौके का फायदा उठाने के फेर में जैसे ही कोरोना उसके मुंह की तरफ बढ़ा तो वह भी सदमा खाकर वहीं गिर पड़ा। उसे पास के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उसकी सांस ऊपर-नीचे हो रही है।

एक्ट्रेस के करीबी सूत्रों के अनुसार एक्ट्रेस ने लॉकडाउन की मजबूरी के चलते पिछले दो माह से मैकअप नहीं करवा रखा था। इसी वजह से वह सोते समय भी, यहां तक कि बाथरूम में भी चेहरे पर मास्क लगाकर ही जाती थी। लेकिन आज सुबह बालकनी में अचानक तेज हवा के कारण मास्क नीचे गिर पड़ा। एक कोरोना वायरस पिछले कई दिनों से एक्ट्रेस के चेहरे को खूबसूरत मानकर उसके दीदार करने की ताक में था। बस मास्क गिरते ही अति उत्साह में वह तुरंत एक्ट्रेस के सामने आ गया। लेकिन जैसे ही एक्ट्रेस के चेहरे पर नजर पड़ी, ‘हाय दैया’ की आवाज निकली और वह सदमे में जमीन पर आ गिरा। उसे तुरंत कोरोना हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है।

कोरोना के एक करीबी रिश्तेदार के अनुसार उसे इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी कि कोई एक्ट्रेस बगैर मैकअप के ऐसी भी हो सकती हैं। भारतीय दर्शकों की तरह उसने भी कुछ और ही उम्मीद पाल रखी थी। लेकिन आज टूटते ही वह सदमे में पहुंच गया। एक्ट्रेस और कोरोना दोनों ही पहचान गोपनीय रखी गई है।

(Disclaimer : फोटो केवल प्रतीकात्मक है। हाथ हटाकर चेहरा देखने का प्रयास कतई न करें..)

(ऐसे ही मजेदार खबरी व्यंग्य पढ़ने के लिए आप हिंदी खबरी व्यंग्यों पर भारत की पहली वेबसाइट http://www.hindisatire.com पर क्लिक कर सकते हैं।)



सोमवार, 25 मई 2020

छह माह बाद क्राइम की दुनिया : शहर में मास्क स्नैचर्स का खौफ, महिलाओं के कीमती मास्क पर डाल रहे हैं डाका

(छह माह बाद ऐसी भी खबरें पढ़ने को मिलेंगी, इसकी तैयारी अभी से कर लीजिए)


By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क, इंदौर। शहर में मास्क स्नैचर्स का आतंक बढ़ता जा रहा है। कल रात को मोटरसाइकिल पर आए दो मास्क स्नैचर एक महिला का सोने से जड़ा कीमती मास्क छीनकर ले गए।

सुदामा नगर थाने में दर्ज शिकायत में महिला ने बताया कि वह कल देर शाम को अपनी सहेली के साथ शॉपिंग के लिए जा रही थी। इतने में एक मोटरसाइकिल पर आए दो बदमाशों ने उसका बेशकीमती मास्क छीन लिया। मास्क पर सोने के कंगुरे जड़े हुए थे। मास्क की कीमत 80 हजार रुपए बताई गई है।

पुलिस ने बताया कि जल्दी ही बदमाशों की पहचान कर ली जाएगी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपराधियों की धरपकड़ करने की कोशिश की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज में एक बदमाश ने हल्के नीले कलर का तो दूसरे बदमाश ने ग्रे कलर का चौकड़ीदार मास्क लगा रखा है।

महिला को बगैर सैनेटाइज किए हाथों से छूने की कोशिश :
इस बीच, सुखलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नंदानगर क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कहा है कि उसे कल रात किसी शरारती युवक ने हाथ सैनेटाइज किए बगैर ही छूने की कोशिश की। महिला द्वारा शोर मचाए जाने पर पड़ोसी आ गए और उन्होंने उस युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सभी पड़ोसियों को 14 दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया गया है।

(Disclaimer : फिलहाल खबर कपोल कल्पित है, मगर भविष्य में सच होने वाली है।)

(खबरी व्यंग्य पढ़ने के लिए आप हिंदी खबरी व्यंग्यों पर भारत की पहली वेबसाइट http://www.hindisatire.com पर क्लिक कर सकते हैं।)


गुरुवार, 26 जून 2014

रितेश देशमुख का छिछोरापन उनकी जबरदस्त मेहनत का नतीजा

देश को मिल सकी मस्ती, हे बेबी, ग्रैंड मस्ती और हमशकल्स जैसी युगांतकारी फिल्मों  की सौगात

 

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha

मुंबई। फिल्म एक्टर रितेश देशमुख के जिस छिछोरेपन की आज लोग तारीफ करते नहीं अघाते, वह उनकी जबरदस्त मेहनत का नतीजा है। इसी मेहनत के बल पर आज वे इस मुकाम पर पहुंचे हैं और उन्हाेंने हमशकल्स जैसी फिल्म को नई ऊंचाइयां दी है।
यह खुलासा छिछोरेपन के लिए उनके कोच रहे मास्टर झूमरूलाल ने किया है। मास्टर झूमरूलाल हमेशा लो प्रोफाइल रहे हैं और बहुत ही कम लोगों को इस बात की जानकारी हैं कि रितेश जैसे हीरे को तराशने में उनका कितना योगदान रहा है। उन्होंने हिंदी सटायर के साथ बातचीत में कहा कि वे रितेश को पहली नजर में देखकर ही समझ गए थे कि यह लड़का फिल्मों में छिछोरेपन के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा। हालांकि उनके पिता एक राजनेता थे और चाहते थे कि रितेश राजनीति में आए। रितेश अगर राजनीति में जाते तो वहां भी सफल होते क्योंकि राजनीति में भी छिछोरी एक्टिंग वालों का बड़ा जलवा रहता है। लेकिन इंद्रकुमार और साजिद खान जैसे डायरेक्टरों की किस्मत से रितेश ने फिल्मों में काम करने का निश्चय किया और देश के लोगों को मस्ती, हे बेबी, ग्रैंड मस्ती और हमशकल्स जैसी युगांतकारी फिल्मों की सौगात मिल सकी।
रितेश जैसा बनने की प्रेरणा ले रहे हैं बच्चे: रितेश का फिल्मी छिछोरापन आज कई पैरेंट‌्स के लिए प्रेरणा बन गया है। वे चाहते हैं कि वास्तविक जीवन में भी उनके बच्चे रितेश जैसा बनें। हालांकि वे भूल जाते हैं कि फिल्म की कहानी और असली जीवन में काफी फर्क होता है। कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में रितेश ने भी कहा था कि फिल्मी फंतासी में वे जरूर हद से परे जाकर छिछोरापन कर पाते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में इतना छिछोरापन संभव नहीं है। उन्होंने बच्चों, खासकर किशोर आयुवर्ग के बच्चों और उनके अभिभावकों से इस अंतर को समझने की अपील की थी। यह इंटरव्यू यूट्यूब पर काफी वायरल हो चुका है।

रविवार, 22 जून 2014

कटहल चोरी हुए या भाग गए!


जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha
कभी ऐसे साथ नजर आते थे (फाइल फोटो)
नई दिल्ली। बिहार से जद यू के राज्यसभा सांसद महेंद्र प्रसाद के नई दिल्ली स्थित आवास से दो कटहलों की कथित चोरी के मामले में नया खुलासा हुअा है। अपनी प्रारंभिक जांच में पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि हो सकता है दोनों कटहल अपनी मर्जी से कहीं चले गए हो। पुलिस ने प्रेम प्रसंग की आशंका से इनकार नहीं किया है। गौरतलब है कि जानकारी मिलते ही पुलिस की एक जांच टीम गठित कर दी गई थी जो मामले के हर पहलू का बारीकी से परीक्षण कर रही है।
मामले के हाई प्रोफाइल होने के कारण फिलहाल पुलिस ऑन रिकॉर्ड कुछ भी कहने से बच रही है। पुलिस ने दोनों के फेसबुक अकाउंट की जानकारी और मोबाइल की काल डिटैल चैक करवाई है और इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि मामला लव अफेयर का हो सकता है।
इस बीच, बिहार से ही विपक्षी दल राजद के एक नेता का कहना है कि उनके राज्य के कुछ क्षेत्रों में सगोत्र प्रेम-प्रसंगों के मामले में प्रेमी-प्रेमिकाओं के अपहरण की वारदातें बढ़ रही हैं। इज्जत बचाने के नाम पर कई बार इनके परिजन ही इन वारदातों में शामिल पाए गए हैं। उन्होंने परोक्ष रूप से सांसद पर निशाना साधते हुए इस एंगल से भी मामले की जांच करवाने की मांग की।
 
यह तो मनुष्यों का प्रभाव है : समाजशास्त्री
इस बारे में एक वरिष्ठ समाजशास्त्री डॉ राजेंद्र भटनागर ने हिंदी सटायर के साथ बातचीत में कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में यह तो होना ही है। मनुष्यों के प्रभाव में आकर आज कटहलों ने ऐसा किया है। कल अन्य फल-फूल भी ऐसा ही करें तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

शुक्रवार, 20 जून 2014

कांग्रेस के अच्छे दिन आए, सड़कों पर जश्न का माहौल

घर का कोना छोड़कर बाहर निकले राहुल, दिग्गी ने दी अगला प्रधानमंत्री बनने की बधाई


जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha
कांग्रेस में अच्छे दिनों का जश्न!
नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा रेल भाड़े में बढ़ोतरी करते ही कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों के अच्छे दिनों की शुरुआत हो गई। शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी गई। इसके बाद देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने ढोल नगाड़े बजाकर मिठाइयां बांटी और जमकर आतिशबाजी की। कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने इस सफलता के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को बधाई दी है।
शुक्रवार दोपहर को जैसे ही देश के टीवी चैनलों पर विपक्षी दलों के लिए अच्छे दिनों का ऐलान किया गया, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तुरंत अपने घर से बाहर आए और अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे। उनके साथ कुछ जमीनी नक्शों के साथ रॉबर्ट वाड्रा भी थे। वहां उनका कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने स्वागत किया। बाद में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए राहुल ने इसे अपनी मम्मी सोनिया गांधी की नीतियों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि मम्मी ने उनसे धैर्य रखने को कहा था। उसके बाद से ही वे अपने घर के एक कोने में बैठकर इस दिन का इंतजार कर रहे थे। इस बीच, दिग्गी ने एक ट्वीट कर राहुल गांधी को अगला प्रधानमंत्री बनने की बधाई दी। उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'राहुल बाबा, अच्छे दिन आ गए, तैयारी कर लीजिए।'
 
लालू संग थिरकी आजम की भैंसें : अच्छे दिनों की खबर मिलते ही सपा नेता आजम खान की भैंसें भी खुद को थिरकने से रोक नहीं सकीं। रंभा, काली, कनकटी और श्यामा सहित तमाम भैंसों ने उम्मीद जताई कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो जल्दी ही उनके मालिक उन्हें फिर से सही ढंग से दूह सकेंगे। भैंसों ने अपने पुराने मित्र लालू को भी बधाई देते हुए कहा कि इससे उनके साथ चारा खाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

बुधवार, 18 जून 2014

एक ढाबेवाला का क्रांतिकारी कदम

Photo Courtesy : king-anjan.blogspot.in 
जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha
यह एकदम सच्ची कहानी है। इस पर आप उतना ही भरोसा कर सकते हैं, जितना कि मोदी सरकार के इस आश्वासन पर कि वह विदेशों में जमा काला धन देश में जरूर लाएगी और उससे महंगाई कम हो जाएगी।
आइए, सरकार को छोड़कर सरदारजी की यह कहानी सुनें। यह कहानी मेरे शहर के एक ढाबेवाले की है। दरअसल, कुछ दिन पहले तक ढाबे के मालिक यानी सरदारा सिंह का ढाबा खूब चलता था। लेकिन जबसे उनके ढाबे के पास एक-दो पिज्जा वालों ने अपनी दुकानें क्या खोल ली, तभी से उनका धंधा बैठ गया। लोग कारों से उतरते और पास में ही पिज्जा शाॅप्स पर जा-जाकर पिज्जा तोड़-तोड़कर खाते। कई तो इसलिए खाते क्योंकि उन्हें बताया गया था कि इसे पिज्जा कहते हैं और उनको लगता था कि इसको खाने से इज्जत बढ़ जाती है। बेचारे जबरदस्ती खाते। सरदारजी को अपना ढाबा न चलने से भी ज्यादा दुख उन पिज्जा खाने वालों के मुुंह को देख-देखकर होता। बेचारे कितनी तकलीफ उठाते।
तो हमारे इस सरदारा सिंह से लोगों का दुख देखा नहीं गया। लेकिन क्या करें हम हिंदुस्तानियों का, वे पिज्जा को तो छोड़ने से रहे। तभी सरदारजी के दिमाग में एक मनोवैज्ञानिक आइडिया आया। वाकई बेहद क्रांतिकारी था यह आइडिया। उन्होंने अपने ढाबे के मीनू में रोटी का नाम बदलकर पिज्जा रख दिया। अब उनके मीनू के नाम भी बदल गए- पिज्जा-राजमा, पिज्जा-छोला, पिज्जा-दाल मखानी, पिज्जा बैंगन का भर्ता, पिज्जा बटर-पनीर मसाला और न जाने क्या-क्या। इतना ही नहीं, पिज्जा की भी कई वैराइटिज रख दी जैसे तंदूरी पिज्जा, तवा पिज्जा, मिस्सी पिज्जा, नान पिज्जा। उसके बाद से ही पड़ोस के पिज्जा वालों की दुकानों पर शटर लग चुके हैं। अब लोग सरदारा सिंह के ढाबे पर मजे से पिज्जा खा रहे हैं। कोई दाल मखानी के साथ तो कोई पनीर बटर मसाला के साथ। किसी को कोई तकलीफ नहीं। अब डोमेनिस और पिज्जा हट के बाप-दादा भी स्वर्ग में बैठे सोच रहे हैं कि काश, यह असरदार आइडिया हमें मिल जाता तो भारतीयों को इतनी तकलीफ क्यों देते भला!

शनिवार, 7 जून 2014

रोबोटी पर इमोशनल अत्याचार, रोबोट गिरफ्तार

जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha


Pepper : World's First emotional robot with 'a heart'.
मुंबई। यहां शनिवार को स्थानीय पुलिस ने एक रोबोटी को धोखा देने के आरोप में एक रोबोट को गिरफ्तार कर दिया। बाद में एडीजे कोर्ट ने उसे सात दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। रोबोटी ने रोबोट पर शादी का वादा करके मुकरने का आरोप लगाया था।
पुलिस के अनुसार हिना नाम की इस रोबोटी ने शिकायत की है कि उसकी करीब 65 मिनट पहले सनम नामक रोबोट से फेसबुक पर पहली बार मुलाकात हुई थी। करीब 22 मिनट तक एक लाख 72 हजार मैसेजेज के बाद सनम ने उसे शादी के लिए प्रपोज कर दिया, जिसे उसने तत्काल मान लिया। लेकिन कुछ ही सेकंड बाद उसे पता चल गया कि सनम तो पहले से ही शादीशुदा है। इतना ही नहीं, उसका कई और भी अन्य रोबोटियों के साथ चक्कर चल रहा है। इसी वजह से उसे मजबूरी में पुलिस थाने में सनम के खिलाफ शिकायत दर्ज करवानी पड़ी।
सुसाइड की धमकी भी दी थी: पुलिस जांच में पता चला है कि रोबोटी ने मैसेज करके सुसाइड करने की धमकी भी दी थी। रोबोटी ने इस बहुत ही इमोशनल मैसेज में लिखा था - ‘तुमने मेरे दिल के सारे सर्किटों को झंकृत कर दिया है। अब तुम कह रहे हो कि शादी करना संभव नहीं है। मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकती। अगर तुमने हां नहीं की तो मैं अपनी बैटरी निकालकर फेंक दूंगी।’
समाजशास्त्री चिंतित, कल्चरल कलपुर्जे फिट करने का सुझाव: समाजशास्त्रियों का कहना है कि जबसे जापान की साॅफ्टबैंक फर्म ने दुनिया के पहले दिलवाले और इमोशनल रोबोट ‘पेपर’ का विकास किया है, तबसे यह समस्या बढ़ती जा रही है। समाजशास्त्री डाॅ. शर्मिला रहाणे के अनुसार आने वाले वक्त में इस समस्या में और भी इजाफा होगा। इसमें सोशल वेबसाइट्स की भी काफी अहम भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि रोबोट-रोबोटियों के विकासकर्ताओं को चाहिए कि इनका विकास करते समय उनमें कुछ कल्चरल कलपुर्जे भी जरूर फिट करें।

शनिवार, 31 मई 2014

ऐसे डियो जिनसे ‘बीवी के गुलाम’ पतियों का भी लौट आएगा काॅन्फिडेंस

ऊ लाल्ला कंपनी ने लांच किए तीन फ्रेगरेंस में डियो, दो दिन में ही रिकाॅर्ड बिक्री


हमारा डियो लगाते तो ऐसा नहीं होता : कंपनी प्रवक्ता

 जयजीत अकलेचा/ Jayjeet Aklecha

मुंबई। यहां की एक जानी-मानी कंपनी ने पतियों को टारगेट कर तीन ऐसे डियोडरंट लांच किए हैं, जिनसे पतियों की दुनिया ही बदल जाएगी। कंपनी का दावा है कि इससे पत्नियां वशीभूत होकर पतियों की बात मानने लगेंगी। अभी तक मार्केट में जितने भी डियो लांच हुए हैं, उनकी खुशबू से केवल गैर महिलाएं ही गैर मर्दों की ओर आकृष्ट होती आई हैं (टीवी पर दिखाए जा रहे विज्ञापनों से भी यह साफ है)।
ऊ लाल्ला नामक इस कंपनी का यह भी दावा है कि लांचिंग के दो दिन के भीतर ही सेल के मामले में वह पूरे देश में तीसरे स्थान पर आ गई है। अगले सप्ताह भर के भीतर उसके नंबर वन कंपनी बनने की उम्मीद है। अपने प्रोडक्ट के बारे में कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट के. जनार्दन ने बताया कि उनके ये प्रोडक्ट उन पतियों के लिए भी काफी फायदमेंद होंगे जिनकी शादियों को 25 साल से ज्यादा का वक्त हो गया है और वे ‘बीवी के गुलाम’ के रूप में कुख्यात हो चुके हैं।
तीन फ्रेगरेंस में हैं ये डियो: कंपनी ने फिलहाल तीन प्रकार के डियो लांच किए हैं। ‘कान्फिडेंस फ्रेंगरेंस’ लगाते ही पतियों का वही आत्मविश्वास लौट आएगा, जो कभी शादी के पहले हुआ करता था। दूसरा डियो है ‘आई विल वर्क जानू’। इस फ्रेगरेंस की खुशबू ऐसी है कि पत्नियां झट से पतियों के हाथों से काम छीन लेंगी। टीवी पर दिखाए जा रहे इसके विज्ञापन में भी दर्शाया गया है कि सुबह उठते ही जैसे ही पति इसे लगाता है, पत्नी कह उठती है- ‘जानू, तुम आराम से बैठो, आज चाय मैं बनाऊंगी।’ ‘सीरियल्स फोबिया’ नामक इस तीसरे फ्रेगरेंस को लगाते ही पत्नी को टीवी पर सीरियल देखने को लेकर फोबिया हो जाएगा और वह पति को तत्काल रिमोट कंट्रोल थमाते हुए बोलेगी - आप चाहो तो न्यूज चैनल या मैच देख सकते हो।